पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/८५

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रोम-साम्राज्य इन फाडू जातिके औद्धत्य निवारणार्थ राइन तट पर गया। नाससे रोम-साम्राजाका अधिकार निकाल लिया। और लिसिनियास विद्रोही मेक्सिमिनके दर्पको चूर्ण] इसके साथ ही उसके अधीनके शासनकर्ता मार्टिनिया- करने के लिये वैजन्ती नगर पर अधिकार कर इसी वर्षके नासको अन्तर्हित होना पड़ा । लिसियानास थेलेलो. १७वीं अप्रिलको हिराक्लियामें परस्पर सम्मुखीन हुप । निका नगरमें नजरबन्द हुआ। पीछे राजद्रोहिताक अप मेक्सिमिन परास्त हो कर निकोमिडियामें भाग गया। राधमें उसको यमसदन जाना पड़ा। डाइयोलिसियनने यहां उसकी मृत्यु हुई। नुशासन-व्यवस्थाके लिये जिस रोम साम्राजाको चार सन् ३१४ ई०में कनस्तान्ताइन और लिसियानास रोमीय भागोंमें विभक्त किया था, वह आज ३७ वर्षके बाद सन् जगत्के एकमात्र अधीश्वर हुए । दोनों अधीश्वर बलदप ३२४ ई० में रोम सामान एक छत्ताधीन हुना। राजा से उत्तेजित हो कर एकाधिपत्यकी आशाले आपसमें विभागोंके एक हो जानेसे और राजाकार्यको नुविधाके युद्धविग्रह करने लगा । कनस्तान्ताइनके अन्यतम वहनोई लिये उसने खनामसे कनस्तान्तिपोल नगरी स्थापन वासियानाको सीजरको उपाधि और इटलीका सामन- किया और अलेफसन्दर सेभेरेस जो दिष्ट या ईसाधर्मका भार मिला। इससे लिसियानासका हृदय विहे पाग्निसे प्रश्रय दे गया है, वह उनकी सम्यक प्रतिष्ठा कर गया। जल उठा । वह अपने अधीनस्थ अपराधियोंको दूसरे दो अधीश्वर कनस्तान्ताइनके दो एनिवां थी। पहली बादशाहोंको विचागर्थ देनेमे असम्मत हुआ। इस पर मिनाभिनाके गर्भसे कमान क्रोस्पास और दूसरी पत्नी घोर युद्ध हुआ। सन् ३१५ ई० में ८वीं अक्तूबरको पानो फटाके गर्भसे कनम्तान्तान दूसरे, फनम्तान्सियास नियाके अन्तर्गत किवालिस नगरके निकट घोर लाई और कनम्नान्सने जन्मग्रहण किया । कनम्तान्सियासको होनेके वाट सिसियानास पराजित हो कर डोक्यिासे सीजरको उपाधिके साथ गल प्रदेशका शामनभार देनेसे थेसमें भाग गया। निम्नोक्त स्थानव. मार्दिया रणक्षेत्रमे चस्पासका दृदय विढे पाग्निसे जल उठा। इस समय दूसरी लडाई हुई। लिसियानासकी सेना रात्रिके राजाने जीवन-नाशके सङ्कल्पमे पडयन्त्रकारी कह पर धनान्धकारमें इस बार भी खडीई। कृरूपास पकड़ा और मार डाला गया । अघीयर कनस्ता- दो वार लगातार पराजयसे लिसिवानासको श्रीभ्रष्ट ताइनने प्रथम अपने जीरनके वीस और तीस वार्गिक देख कर कनस्तान्ताटनको दया हुई। उसने सन्धि कर राजभोगोत्सव सम्पन्न र सन् ३३७ ई० में २२वीं मईको सापसके मनोमालिन्यको दूर करनेका यत्न किया। किंतु निकोमिडियाक आकुरियन राजमहल मे देहत्याग किया। युद्धके क्षतिपूरण स्वरूप पानोनिया, डालमासिया, इसके बाद उनकी पत्नी फटाके गर्भसे उत्पन्न नीनों पुत्र डाकिया, माफिटोनिया टोर यूनान पश्चिम साम्राजामे राज्यके अधिकारी हुए । ज्येष्ट कनस्तान्ताइनको नई राज- मिला लिये गये। कृप्पास और छोटे कनस्तान्ताइन । धानी, कनन्तान्सियासको थेस और पूर्वी नगर तथा पश्चिम सीजर नियुक्त और कनिष्ठ लिसियानाम पूर्व/ कनस्तान्सको इटली, अफ्रिका और इलिरिकाम मिले। राजाका सीजर हुआ। इसी समय नारगेपके पौत्र और हरमजका पुत्र सापुर इस घटनाके ८ वर्ष बाद सन् ३२३ ई०की मी जुलाई । प्राच्य रोमराजा पर अधिकार कर अपने शासनका को कनस्तान्ताइन अपने सहयोगी लिसिय नामके सर्व विस्तार कर रहा था। क्नस्तान्सियास प्राणपणसे युद्ध नाश करने पर उतारू हो उठा। हवस नदीको पार कर करके भी उसे हटा न सका । सन् ३४८ ई०के शिड्डाडा- उसने भीमवेगसे अपने शत पर आक्रमण किया। युद्ध में रोमक पराजित हो कर भागे। इसी समय भारत- लिसियानास आत्मरक्षामें असमर्थ हो वैजन्ती किलेमे को फौजोंने पारसिककी सहायता को थो। टुक गया। किन्तु वहांले वह कालसिडनमे उसके बाद इसी समय मस्सेगेटीके अधीन शक पारस्यके पूर्ण निकोमिडिया भागा। अन्तमे वहन कनस्तान्तियाके | भाग उपद्रव कर रहे थे। पारस्पराजने दूसरा उपाय न कहनेसे अधीश्वर कनस्तान्ताइनने अपने बहनोई लिसिया- देख रोम-सम्राट के साथ सन्धि कर ली। इधर भ्रातृ-