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है — पूर्वकालको द्रविड़ देशमें पाण्डुवंशीय इन्द्रद्युम्न नामक कोई प्रबल पराक्रान्त विष्णुभक्त राजा रहे। किसी दिन नरपति एकाग्रचित्त हरिकी आराधना करते थे, उसी समय अगस्त्य मुनि वहां जा पहुंचे। राजाने उनको लक्ष्य न किया, अपनी मानसिक आराधना ही लगे रहे। इस पर मुनिको राग लगा। उन्होंने राजाको पुकार करके कहा था — नराधम तूने ब्राह्मणका अपमान किया है, इसके फलसे कुरोनि प्राप्त होगी। मुनिका वाक्य मिथ्या न निकला, कुछ दिन पीछे ही राजाको हाथीका शरीर धारण करना पड़ा। मृत्यु कालको भी उनकी हरिभक्तिका ह्रास न होनेसे पूर्व जन्मकी सब कथा उन्हें स्मरण रही। नरपति इन्द्र हाथी होकरके वन वन घूमने लगे, दैवात् किसी दिन वह चित्रकूट पर्वत जा पहुंचे थे। इस पर्वतपर वरुणोद्यान नामक एक मनोहर उपवन है। राजाके उसी उपवनमें जा करके स्नान करनेको सरोवर अवगाहन करने पर एक कुम्भीरने उनको आक्रमण किया था। उनके सब सहचर मातङ्ग उनको साहाय्य पहुंचाने लगे और वह भी कुम्भीरसे खूब लड़े, किन्तु किसी क्रमसे उस महान क्रूरको पराजित कर न सके। इन्द्रद्युम्न अन्य उपाय न देख करके विष्णुका स्तव किया था। उनके स्तवसे सन्तुष्ट हो विष्णुने जा करके उनकी रक्षा की। राजा उसी दिन शापसे भी मुक्त हो गये। विष्णुने राजाके प्रति सन्तुष्ट होकरके और एक वर दिया था — तुमने जिस स्तवसे हमें सन्तुष्ट किया है, उसको पढ़नेवाला कोई भी व्यक्ति ऐहिक कीर्ति पायेगा, उसका दुःखप्रदोष दूर हो जावेगा, दुःख उसके पास न पहुंच पावेगा और चरमको वह स्वर्गमें जा करके आनन्द उड़ावेगा। प्रातःकाल उठ करके जो इस... गजेन्द्र (सं० पु०) गजेन्द्र इव कर्णा यस्य। शिव, महादेव।
गजेन्द्रगढ़ — धारवाड़ जिलामें रोण तालुकका एक शहर। यह अक्षा० १५° ४४' उ० और देशा० ७५°
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५८' पू० पर कलादगीसे ५१ मील दक्षिण-पूर्वमें अवस्थित है। जनसंख्या प्रायः ८८५३ है। महाबीर शिवाजीने इस स्थान पर गजेन्द्रगढ़ नामका एक दुर्ग निर्माण किया था, इसी कारण इस नगरका नाम गजेन्द्रगढ़ पड़ा। यहां विरूपाक्षदेवका प्राचीन मन्दिर है और नगरके बाहर दुर्गा, रामलिङ्ग, रामसीता और वीरभद्र प्रभृति देवताओंके मन्दिर अवस्थित हैं। गढ़के निकट पहाड़की ओर एक शिवतीर्थ विद्यमान है जहां धर्मार्थी यात्री आकर ठहरते हैं। पहाड़के ऊपर बहुतसे तीर्थ और शिवालय हैं जिनमें से वीरभद्रका मन्दिर और पातालगङ्गा तीर्थ प्रधान हैं। पातालगङ्गाके पार्श्व हीमें नन्दी मूर्ति है, बहुत बंध्या स्त्रियां सन्तानके लिये नन्दीकी पूजा करने आती हैं।
गजेन्द्रगुरु (सं० पु०) सङ्गीतमें रुद्रतालका एक भेद।
गजेन्द्रनाथ (सं० पु०) हाथियोंमें श्रेष्ठ।
गजेन्द्रमोक्षण (सं० क्ली०) १ वामनपुराणके किसी भागकी आख्या। २ महाभारतके किसी भागका नाम।
गजेन्द्रविक्रम (सं० पु०) गजेन्द्र इव विक्रमो यस्य, बहु०। हस्ति सह पराक्रमी, वह जो हाथी सरीखे बलवान हो।
गजेर — भरोच जिलाका एक शहर। यह जंबुसरसे लगभग ५ मील उत्तर पूर्वमें अवस्थित है। इसमें १२४४ घर और प्रायः ४०३० मनुष्य वास करते हैं।
गजेष्टा (सं० स्त्री०) गजानामिष्टा, ६ तत्। भूमिकुष्माण्ड, बिलाइकन्द।
गज्जल (हिं० पु०) पौर।
गजोदर (सं० पु०) गजस्य उदरमिवमुदरं यस्य, बहुव्री०। देवविशेष, एक असुरका नाम।
गजोपकुल्या (सं० स्त्री०) गजप्रिया उपकुल्या पिप्पली, मयूरमध्यपदलो। गजपिप्पली, गजपीपर, बड़ी पीपर।
गजोष्णा (सं० स्त्री०) गजानां प्रिया जवणा गजपिप्पली, स्त्री। (गजपीपर)।
गञ्ज (हिं० पु०) १ बुलबुलोंका समूह जो पानी, दूध वा किसी तरल पदार्थमें उत्पन्न हो। गान। २ खजाना, कोश। ३ सम्पत्ति, दौलत, धन।
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गजेन्द्र – गज्भा