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तक कलचुरियाँ, १०४०-१२१ तक होयसल बल्लाल और १२२६ से १५६५ ई० तक विजयनगर के राजाओं का गड़ग में अधिकार रहा। १६७३ ई० को नसरताबाद या धारवाड़ जिले का बङ्गापुर सरकार का प्रधान जिला था। १८१८ ई० को जनरल मुनरो ने गड़ग घेर लिया। इसमें अदालत, अस्पताल और विद्यालय वर्तमान हैं। गड़गड़ाहट (हिं०) १. गड़गड़ाने का शब्द। २. हुक्का पीने का शब्द, वह आवाज़ जो हुक्का पीने से निकलती है।
गड़गड़ी (हिं० स्त्री०) नगाड़ा, डग्गी।
गड़गूदड़ (हिं० पु०) चिथड़ा, लत्ता, फटे-पुराने कपड़े का टुकड़ा।
गड़गा— असम के शिवसागर जिले के अन्तर्गत एक प्राचीन नगर और गढ़। यह शिवसागर नगर के दक्षिण-पूर्व और देईखु नदी के तीर पर अवस्थित है। एक समय यह अहम् राजाओं की राजधानी थी। इसका ध्वंसावशेष अब तक भी विद्यमान है। राजगृह एक कोस विस्तृत ईंटों की दीवारों से घिरा था। आजकल उसका कुछ चित्र दिखाई पड़ता है। गड़चोंद— बङ्गाल के अन्तर्गत तिरहुत जिले का एक परगना। इस परगना होकर छोटी गण्डक, बागमती और लखनदेई नदियाँ प्रवाहित हैं। यहाँ बहुत-सी पक्की सड़कें हैं। इस परगना की अदालत मुजफ्फरपुर है। इसके अन्तर्गत सरोफ उद्दीनपुर, धमोर, अकबरपुर और कई एक ग्राम प्रसिद्ध हैं। अकबरपुर ग्राम में चामुण्डा देवी का मन्दिर है, जहाँ प्रतिवर्ष आश्विन मास में एक बड़ा भारी मेला लगता है। गड़दार (हिं० पु०) मतवाले हाथी के साथ भाला लेकर चलने वाला नौकर, वह नौकर जो बदमाश हाथी के साथ गड़दार (भाला) लेकर चलता हो।
गड़प (हिं० पु०) पक्षिविशेष, एक बड़ी चिड़िया।
गड़प (फा० स्त्री०) पानी या कीचड़ में किसी वस्तु के गिरने का शब्द।
गड़प्पा (हिं० पु०) धोखा खाने का स्थान।
गड़वच (हिं० स्त्री०) १. ममतल या मोचा। २. अनियमित, वह जो ठीक समय पर न किया जाता हो।
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गड़बड़ा (हिं० पु०) गर्त, खत्ता, गड्ढा।
गड़बड़ी (हिं० स्त्री०) अव्यवस्था, गोलमाल।
गड़मान्दारण— वर्तमान जिले के जाहानाबाद महकुमा के अन्तर्गत एक प्राचीन ग्राम। इसका दूसरा नाम विठुरगढ़ है। मुसलमानों के समय में यहाँ मृत्तिका निर्मित एक बड़ा गढ़ था। यहाँ समाईल गाजी वली लस्कर नामक मुसलमान साधु की कब्र है। स्थानीय मुसलमान अधिवासी साधु को अत्यन्त भक्ति-श्रद्धा के साथ देखते हैं। गड़मुक्तेश्वर— उत्तर-पश्चिमाञ्चल के मेरठ जिले का एक प्राचीन नगर। यह अक्षा० २८° ४७' उ० और देशा० ७८° ६' पू० में गङ्गा के दक्षिण किनारे, गढ़-मुक्तेश्वर-मन्दिर से दो कोस नीचे में अवस्थित है। लोकसंख्या प्रायः १०,६१६ है। बहुतों का कहना है कि यह नगर एक समय प्राचीन हस्तिनापुर का एक महल्ला कहकर प्रसिद्ध था। यहाँ मुक्तेश्वर महादेव का मन्दिर है। इन्हीं के नाम पर नगर का नाम रखा गया है। इसके अतिरिक्त और कई एक पुरातन तथा ८० मन्दिर और भी हैं। यहाँ कार्तिक मास में एक लाख से अधिक मनुष्य जुटते हैं और एक भारी मेला लगता है।}} गड़यन्त्र (सं० पु०) गड़बड़ी, बिगड़ा हुआ भाग।
गड़रातवा (हिं० पु०) लौहविशेष, एक तरह का लोहा जो प्राचीन काल में मध्य भारतवर्ष में निकलता था।
गड़रिया— युक्त प्रदेश की एक जाति। यह भेड़-बकरी पालते और चराते तथा उनके कम्बल आदि बनाते हैं। गड़रिया अपना परिचय क्षत्रिय वंशीय जैसा देते हैं। ये कहते हैं कि 'गड़वामी राजवंशियों' का नाम बिगड़कर 'गड़रिया' हो गया है। दूसरों का मत है कि गदाधारी हनुमान के उपासकों अथवा भेड़ (गद) पालने वालों को गड़रिया कहा जाता है। इनके बहुत से भेद मिले हैं।गड़लवण (सं० क्ली०) गड़देश में लवणं, साम्भरदेशोत्पन्न, शुभ्र लवण, साम्भर नमक। इसका पर्याय— शुभ्र, पृथ्वीज, महदेवन, गोड़त्व, महारम्भ, साम्बर और सम्भर। इसका गुण— उष्ण, लवण, मलनाशक, दीपन, कफ-वात और शूल नाशक तथा कोष्ठ परिष्कारक है। भावप्रकाश के मत से इसका गुण— लघु, वातनाशक, अतिशय उच्च, भेदकारक, पित्तवर्धक, तीक्ष्ण और कटुपाक है।
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गड़गड़ाहट - गड़लवण