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पश्चिम-उत्तर अञ्चल वक्रतुण्ड धीर तुण्डराज ये दोनों गणेश अति प्रसिद्ध हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराणके मतसे— "ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं" स्वाहा ब्रह्मरूपाय सर्वसिद्धि प्रदायिने विघ्नेशाय नमो नमः इस मन्त्रसे गणेशपूजा करनी उचित है। तुलसीपत्र द्वारा गणेशपूजा करना निषिद्ध मानी जाती है। इस मन्त्रको पचास लाख बार जपनेसे मन्त्रसिद्धि होती है। गणेशपूजा शेष होने पर स्तवपाठ करना चाहिये। गणेशका स्तव, यथा— श्रीविष्णुरुवाच
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स्थिरा भवेत् गृहे लक्ष्मीः पुत्रपौत्रविवर्द्धिनी। इति श्रीब्रह्मवैवर्तपुराणे गणेशखण्डे विष्णु कृतं गणेशस्तोत्रम्॥ गणेशपूजा सिर्फ भारतवर्षमें ही नहीं होती वरं और भी देशों में यथा नेपाल, चीन, जापान और मङ्गोलियामें होती है। नेपालके हिन्दू और बौद्धोंको पूरा विश्वास है कि गणेशकी पूजासे अभीष्ट सिद्ध होता है। नेपाल में पशुपतिनाथ मन्दिरके उत्तरमें एक प्राचीन तथा प्रसिद्ध गणेशमन्दिर है जिसे अशोककी कन्या चारुमतीने निर्माण कराया है। यवद्वीपमें भी गणेशके कई एक स्वरूपकी मूर्तियोंकी पूजा होती है। मन्त्रमहार्णवमें गणेशका ध्यान यूँ है— "विषाणांकुशपाशांश्च दधानं करे मोदकं पुष्करे। गणेशके हाथों में पाश, अंकुश, पद्म और परशु हैं और सूँड़के अग्रभाग पर मिठाइयाँ हैं। ये अपने साथ सहगामिनी लिये हुए हैं और अपने सुवर्ण अलङ्कारोंसे ये सूर्यके जैसे दीखते हैं। २ एक विख्यात ज्योतिर्विद्। इन्होंने आयप्रश्न-जातक-कल्पलता, तिथिचिन्तामणि-पञ्चाङ्गसाधन, तिथिचिन्तामणि-सारणी, पाटीटीका, भावाध्याय, रत्नावलीपद्धति, ताजकजातक प्रभृति संस्कृत ज्योतिषकी रचना की है। ३ शङ्कारिकाके रचयिता। ४ पिष्टपशु-स्तरगी और महिषसर्गविधि नामक धर्मशास्त्रसंग्रहकार। ५ भागवतवादिभूपणके रचयिता। ६ रसतरङ्गिणी के रसोदधि नामका टीकाकार। ७ स्मृतिचन्द्रोदय-प्राणभट्टपुत्र, ऋग्वेदपाठानुक्रमणदीपिकाके रचयिता। ८ गोपालपुत्र, इन्होंने १६१४ ई० में जातकालङ्कार नामक संस्कृत ग्रन्थकी रचना की है। १० दुरागमनाशिनीचन्द्रिका, विनोद, ताजिकभूषण प्रभृति संस्कृत ग्रन्थ प्रणयन किये हैं। ११ यज्ञालसेनके पुत्र, शिवतोषिणी नामक लिङ्गपुराणके टीकाकार। १२ रामदेवके पुत्र, नैषधोदयटीकारचयिता। १३ बनारसके एक हिन्दी कवि। यह |
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गणेश