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२. वन्ध्या स्त्री, वह स्त्री जिसे कोई सन्तान न होती हो। गतार्थ (सं० त्रि०) १. गतो विदितः अर्थो यस्य, बहुव्री०। जिसका अर्थ मालूम हो गया हो, चरितार्थ। २. जिसका प्रयोजन निवृत्ति को गया हो, जिसे अब किसी चीज़ की माँग न रह गई हो।
गतासु (सं० त्रि०) गता असवो यस्य, बहुव्री०। १. मृत, मरा। २. शव, मुर्दा।
"गतारूनां गतसूनां च नानुशोचन्ति पण्डिताः।" (गीता) ३. गतायु, जिसकी आयु शेष हो गई हो।गति (सं० स्त्री०) गम् भावे क्तिन्। १. गमन, चाल।
"नही गतिः शकुनीनां च दृश्यते ख इव स्थिते।" (महाभारत) २. परिणाम, नतीजा। ३. ज्ञान, पहुँच। ४. प्रमाण, सबूत। ५. मार्ग, राह। ६. स्थान, जगह। ७. स्वरूप, रूप। ८. विषय, वात। ९. यात्रा, मुसाफिरी। १०. अभ्युपाय, तदबीर। ११. आश्रयण, शरण। १२. सरणी। १३. कर्मफल। १४. दशा, हालत। १५. यान्त्रिक गृह की संज्ञा। यान्त्रिक शास्त्र के मुख्य ७५ मुख तक गति संज्ञा निरूपित हुई है। १६. मुक्ति, मोक्ष। १७. सितार आदि बाजों में कुछ बोलों का क्रमबद्ध मिलान। १८. घड़ी की चाल जो तीन प्रकार की होती है, शीघ्र, मन्द और सम।१९. जैनमतानुसार— गतिनामक कर्म के उदय से जीव की पर्याय विशेष को गति कहते हैं। गति के मुख्य चार भेद हैं— नरकगति, तिर्यञ्चगति, मनुष्यगति और देवगति।(तत्वार्थसूत्र) २०. जीव जब दूसरा शरीर धारण करने जाता है, तब उसकी विग्रह गति होती है। इसके चार भेद हैं— ऋजु, पाणिमुक्ता, लाङ्गलिक और गोमूत्र। गतिक (सं० क्ली०) १. गति, चाल। २. अवस्था, हालत। ३. आश्रय, पनाह।
गतिक्रिया (सं० स्त्री०) गमनक्रिया, जाना, चलना।
गतिभास्कर्त्तु (सं० पु०) कार्त्तिकेय का एक सैन्य।
गतिनामकर्म— जो कर्म जीव का आकार नारकी, तिर्यञ्च, मनुष्य और देवादि समान बनाता है, उसे गतिनामकर्म कहते हैं। (कर्मग्रन्थिका २।११ सूत्र)
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गतिबद्ध— जैनमतानुसार गतिनामकर्म का आत्मा के साथ मिल जाना।
गतिभण्डल (सं० पु०) नृत्यों में एक प्रकार का अङ्गहार।
गति मार्गणा— जैनमतानुसार जीव के स्वरूप वर्णन करने का एक तरीका। गतिनामकर्म के उदय से होने वाली जीव की पर्याय की गति कहते हैं। उसके चार भेद हैं— मनुष्य, देव, तिर्यञ्च और नरक।
गतिया (हिं० पु०) तबलाची।
गतिला (सं० स्त्री०) १. वेतलता, बेंत। २. नदीविशेष। ३. परम्परा, सिलसिलेवार।
गतिविधि (सं० पु०) गतेर्विधिः, ६-तत्। १. गतिविधान। २. सामान्य ज्ञान।
गतिशक्ति (सं० स्त्री०) गतेः शक्तिः, ६-तत्। गमनागमन की क्षमता, आने जाने की शक्ति।
गतिसमञ्ज (सं० पु०) गतिर्वाञ्छा म चासो समञ्जश्चेति कर्म०। परमेश्वर।
"गतिसमञ्जो मोहितानां च बद्धिकर्त्ता मवताः।" (विष्णुसहस्र०) गतोज (सं० वि०) गमन योग्य, जाने लायक।
गत्ता (हिं० पु०) कूट, कागज़ की कई परतों का बनाया हुआ।
गन्तृ (सं० वि०) गमनकर्त्ता, जाने वाला।
गन्त्वर (सं० वि०) १. गमनशील, चलने वाला। २. पथिक।
गल्वरा (सं० स्त्री०) प्राचीन काल की एक प्रकार की नाव। यह ८० हाथ लम्बी, १० हाथ चौड़ी और ८ हाथ ऊँची होती थी और प्रायः सागर में चला करती थी।
गद (हिं० पु०) १. पूँजी, जमा। २. माल। ३. झुंड।
गदना (हिं० क्रि०) एक को दूसरे में मिलाना। आपस में गूंथना।
गद (सं० पु०) १. रोग। "मदाग्नि हुतमे सोऽयं जातो गदः।" (माधव०) २. समध्वनि, मेघ का शब्द। ३. विष। ४. कुष्ठ, कोढ़। ५. श्रीकृष्णचन्द्र के छोटे भाई। इनके पिता का नाम वासुदेव और रोहिणी माता का नाम था। ६. रामचन्द्र जी की सेना का एक वानर। ७. एक असुर का नाम।
गदकारा (हिं० पु०) गुदगुदा, गुदगुदी।
गदग— बम्बई प्रान्त के धारवाड़ जिले का एक ताल्लुका। यह अक्षा० १५° २' तथा १५° ३८' उ० और देशा० ७५°...
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