पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१०९

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महमद विन फराज-महम्मद वेग खां (हानी । कोकलतूमयो समर्प किया था। इस प्रथम १४६४ | महन्मद विन युमुफ-तारिणी-हिन्द नामा विदामरे १०में शाहवेग खांकी भाससके धाम पासके देशों पर प्रणेता। ये दिल्लीयासी पाजा हसन के सममान. चढ़ाई, तैमुरयंशकी पराजय तथा सन्नाट अस्वरके मन- किये। सामयिक अबदुल्लाका इतिहास आदिका विस्तृत विवरण । महम्मद यिन मेन-बदार उल दिदाया' नाम करती किया गया है। । आईन अन्य प्रणेता। इसके अतिरिकाहोंने पारमी महम्मद विन फराज-पक मुसलमान धूर्त साध। यह तथा यरसी मिधित भापा हपात उल फगान नामय भाने की फसे निकला मा ममा बालाया करता था। मंग मो लिसा है। १५८५ में इनका देहान्त एमा। एक दिन बटोफा मुदगिलने से हम तरह पिटपाग महम्मद गुगारी (सरक-एक गुमलमान माशु। मवाद कि जान निकल गई। शाहजहाँप समय इनकी विशेष प्रतिधा थी। ताजा. महम्मद यिन महमूद (मलाकामी)-~-'फजन्दर-म- रोजाफे पश्चिम द्वार पर इनका मश्यरा मौजूद है। समी' नामक थके प्रणेता। याणिज्य व्यापारके लिये महन्द-युगरी (सेस)-मुगल सम्राट अफररवं. एक यह प्रथ विशेष उपयोगी है। । सेनापति । मिना भजीतकी मोरने इन्लान गुजरातम युद्ध महन्मद यिन मूसा-मलजरर यल मुकाविला नामक वीज किया। पत्तनफे युद्ध में पे दलबल ममेत निहत हुए। गणितके प्रणेता। । सम्राट् मकबरने इनको विद्वता तथा विश्वामिता पर महम्मद विन मूर्तशा-'मुफती' नामक सिया-संप्रदायके । प्रसन्न हो इन्द भरण पोषण के लिये अजमेर में एक नचल धर्मशास-रचयिता। | और शेम्म मुइन-इ-फिस्तीके समाधि मन्दिरफा यादम महम्मद विन याकुत्र (अलकुलिनी)-काफी नामक एक यनाया था। अरयो के प्रणेता । यह काफी सियासंप्रदायके लिये महम्मद घेग-मीरलका एक अनुरन दुराचारी। हम विशेष भादरणीय है। दुरात्माका पालन पोषण पगि अत्यहाँको मविपीने हो महम्मद विन याकुर ( फिरोगापादो )-एक प्रसिस किया था, फिर भी यह घोंपर मिराचदौलाके इत्या- मामिधानिक । इन्होंने 'कमूल-उल्-लुघाट बदर उल! काएडमें लिप्त था । या गर-गिमार ने सलयार. मुहित' नामक प्रचलिया था। इस प्रथमें अरबी को सपने लिये सिराज कारागृह मुसा और उनका साहित्य समुद्रका इन्टोंने मन्यन किया। इनकी विद्या.. मर उतार लिया। युदि देख कर मापाविद माल मोहित हो जाते हैं। यह : महम्नर येग यां (दामो)-मययप्रदेश. पक सहभाग प्रय भरवके राजा बिन अब्बासको उत्सर्ग किया गया' शासनकर्सा । यद 'मानोर तालियोफे प्रणेता मिन्ना गाा था। १४७४ ई० में इनकी मृत्यु दुई। । तालिय सांके पिता थे। इस्पाइनफे मोर भवासावाद- महम्मद बिन याफुय (अल कलिनो अपराजि )-ममा- . में इनका जन्म हुमा था। यद नुरु-मंगोस्य धे। अल काफीके प्रणेता । यद गलमय रच कर इन्होंने, परसियाके राजा नादिर गाद माचारमै पोटिती 'रस उल मुहिसीन'को उपाधि पाई थी। यह नप दाजी अनभूमिको खोद पार भारतमा मोगुण- गोस भागों में विभक्त है। इसको समाप्त करने में प्रायः , का परिचप पा कर गुणमाही गपाद अपुन मगर घोस पर्ष लगे थे। इस प्रधः अतिरिना और भाप दिया । १७१० में भारी मात भी भनेको प्रथइनसे बनाये हुए पाये जाने हैं। , शासकमा सयम रायमरने पर नपादन ० यागदाद नगर इनको सर कारमा स पर नियुशनुपरमार महम्मद पिन युसुफ-दोरवासी पकिम । रोने नवाको नामजी साह उन.पान सहायक भरदी भाषामें उल अयादिर' नामक एक अभिधान कर गई थे। मुमा ददीटाके विदोहरे समन्द कुली लिखा था। प्रस्तुतः यह शिल्प तथापिमान पिपा मारे गए थे जान ले कर मुनिदावार मागे। यहीं पर यक एक पिस्तूत कोप-बंध है। कोमका परलोयाममा।