पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/११९

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महम्मद शाह तुगसक श्म २०६ सहा श्रमा दटने लगी। जब मुलतान देवगिरि, था! दिलीस रयाना दोते समय उसको देगमें करन तब भी मुलतानके ध्येदार बहराम घां बागी हुए । मुल. दिपाई दी। गल्लेका माय दिनों दिन बढ़ रहा था। , तानके यह सुन कर शोधका ठिकाना न रहा। दौलता-! यह देव देवगिरिमें जा कर अपने सहमीलदारीको लगान

वादसे सुलतान दिल्ली माया और फौजोंके साथ मूल- यम्ल करनेका हुक्म दिया। महाराष्ट्र में लगान यस्ल

• तानके लिये रवाना हुआ। सुलतानने यहां जा कर करने में पड़ा जुल्म हुमा था। मीर तोया, प्रमाने लगाम लड़ाम पहरामको हरा दिया। तुगलकका सर उदा देने में असक्त हो कर आरमहत्या कर लेगेको पेशा की , दिया गया । उसका सर बादशादफे घरों में डाला गया, थी । दादुओंके लूटपाटसे राज्यमें हाहाकार मचा । किन्तु इससे भी सुलतान सन्तुष्ट नहीं हुआ। उसने । हुभा था। .बहरामके कितने ही सिपाहियों को भी मार डाला। इसके बाद यह अहमद भयानको दिल्ली में रख .. . इसके बाद सुलखान दो घर तक दिलोमें ही रह तैलङ्ग पर माममण करनेको लिपे गया। मालमें जब . गया। इससे वाध्य हो कर समोर उमरायोको भी यहां यह भापा, तब उसकी फौजमें देजा हो गया। इससे रह जाना पड़ा। किन्तु उनके कुटुम्यके लोग छोलता-बहुतेरे सिपादी भोर समोर उमरा भी मर गये। पाद दो में रह गये। ऐसे समय लगानके बोझसे दये। इस पर विपक्षियोंने उस पर माफमण कर दिया, किन्तु बहुतेरे हिन्दुओंने गलों में भाग लगा भौर मवेशियोंको भन्तमें मुलतानशी दो जोत रही। यह माया पनीर पन्धनमुक कर देश मोर घर घर छोड़ कर अगलकी | मालिक भयुलको नेलाका राजा बना अपने दौलताबाद. राह लो। सुलतान प्रमाका ऐसा माय देन शिकार के लिये रवाना हुमा । यहां कई दिनों तक बीमार रह खेलनेके बहाना कर जङ्गलमें भगे सभी दिन्द्रमोको कर उसने दिल्ली जानेको इच्छा प्रकार को। इसके लिये पशुओं को सरह मार थाला। पारण के किले में प्रतिष्ठित मसरत पां सादय सुलतानोको विदा कर करल गांको हिन्दुओंको फांसी पर लटका दिया गया। उसने महाराष्ट्रका मार मपंण कर दिया। दूसरी पासा ... घर बङ्गालमें मुघर्ण प्रामके शासक पदराम पांक फे समय पदां गये हुए उमरायों को दिलो लोट मानेक .मरनेके बाद फकरा नामका एक मादमी वागो दो गया। हुपम दिया । तीन दल उसके पोछे पोछे दिलो मले। सुलतानको फोज ,इसके साथ मिल गई। फल यद | घोड़ेसे भादमो दौलताबाद या देवगिरिमें अपने रखी ..मा, कि लखनौतोके नपाद कादिर प्रां सकुटुम्य .मार | पुतफे साथ रह गपे।

साले गये और यागियों ने लगनीतीका मझाना लूट लिया मुलतान पारानगरो भोर मालया होते हुए दिल्ली

और लपनीती, पट्टगाय तथा सोनारगांय पर भी कजा पहुंचा। राहमें उसने देना, कि दुर्मिझसे प्रजा पोदित कर लिया। यह पवर पा कर मुलतान पोषसे अघोर हो रही है। राज्य भर में मशास्तिको लहर लदरा हो उठा। कनीजसे घालमऊ तक सब जगहोंके गांय ) रही है। • नगरोंको मुलतान उजाड़ने लगा। सुलतानके इस बल्म दिल्ली में मा पर उसने देण, कि यहां के मधियामि से प्रमाने जंगलका माधय लिया। पेरहम सुलतानने हमार मंगमें एक मो शापित मदों । महाल. जंगलमें जा करके मजाका प्राणनाश किया। . के कारण कितने दो भादगी गृत्युमुमो पति हर है. जिस समय मुलतान कनौज मादि देनीम इस सरद- कितने ही लोग प्राण भय भाग गये है। मा पुलनाम . का दिल ददलानेयाला तुम्म कर रहा था, उस समय ! राजकोरस रपया कर गतीयारी करने का उपोग करते 'मायर में सैयद हुसैन बागी हो गया और पादशाद गा, किन्तु उसको मेधा गिरल टिपे. गहों होनी धन पेठा। सुलतानने मायर मात्रामा किया। हुसेनका वो अंकुरित हो नदी दुर पदि हुए मी तो पौधे पूरी पुरा हमाहिम और परियारले लोग मुलनागके हाथ फेर गर्ने । अनादार तथा नारीरिक परिधमरो दुर्पन हो कर ! की प्रजा मो मरने लगी। . . . Vol. II, As .