पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१२५

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महम्मद मुस्तारी-पहम्मद हुसेन (शेख) १५ विपुल संग्राम छिड़ गया। भापिर ग्रीसयालौने अपने- महम्मद हनीफ-भलीका तीसरा सका। फतीमाके को स्वाधीन पतलाते हुए घोषणा कर दो। १८२८६० में गर्भसे उत्पन्न इसन गीर हुसैनका पैमान माई दोनेके रूमोंके साध युद्ध उपस्थित हुआ। इस युद्ध मह कारण इसे इमामशा पद नहीं मिला फिग्नु हुसैनके मदकी सेना युरी तरह परास्त हुई थी। अब मसराज मरने पर बहतोंने इसीको बालीफा या इमाम समझ दलबल के साथ कोम्सटेण्टनोपलकी मोर पढ़ा, तुर्की ने रा था। इसका दूसरा नाम था मदम्मद पिनाली। र अपने राज्यका कुछ अंश देकर मेल कर लिया। परन्तु ' दिजरीमें इसको मृत्यु हु। यूरोपफे अन्यान्य राजाओने उन्हें यहांसे मार भगाया। । महम्मद हासिम (काफी ni)-एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक महम्मद सस्तारी-हाकुल यकीन नामक धर्मप्रन्यके न्होंने तारोप काफोमान् पौर मुन्तमय-उल-टुयाय प्रणेता। सुस्तार नगगे इसका जन्म हुआ था। उन नामक दो मारनयर्षफे इतिहास प्रश्य लिगे हैं। वाद- प्रन्यका पारसियोंके निकट बटुन आदर है। माद मालमगीरको अमलदारी शेर होने पर पे दिल्ली महम्मद सैयद -'तहफत उल-मजलिस' नामक प्रन्यफे नगरमें रह कर मगलराज्यका इतिहास लियाने लगे। प्रणेता। आप शेस माहाद पाटफे समसामयिक थे। ' उक्त प्राय १५१६०को वायशादफे माममणमे लेकर महम्मद हफीम (मिर्जा)-हुमायू बादशाहका लड़का ATE HERE माहरायरोपण ककी परनामी. और अकवर वादगाहका पैमान माई। १५५४ १०का का वर्णन है। कामुल नगरमें इसका जन्म हुमा । मकबरने से फायुल. महम्मद हमन-आकापर हसेन माम माग्यो को शासक बना दिया था, परन्तु इस पर भी यह संतुष्ट । प्रणेता। गया। भागिर इसने बागी हो कर १५६६ मीर १५८१ महमद हुसेन ( मिर्जा ) नैमूरराजवंशोभय महम्मद में दो बार पआय पर चढ़ाई कर हो । उसे दए देनेफे सुलतान मिर्जाका लएका। यह अपने भाइयोमे मिल लिये खुद बादशाह अकबर माय गपे। मुगल सेनाफे। कर बादशाह मावरफे विन्द गड़ा हो गया था। इस सामनेग्रह कर तक ठहर सफता था, जान ले कर भागा। पर वादशाह व विगः भोर उन सर्वोको सम्मलपुर १५८५ १०को कावुल मगरमें ही इसको मृत्यु हुई। पीछे दुर्ग र किया। पीछे पदयम्स फर ये सबफे गर राजा भगवान दास और उनके लटके मानसिंहने कुछ । यहाँसे भागे और चम्पाने, मूरत तथा भरोच पर मधिः समय राक कायुलका शासन किया था। फार कर बैठे। बादशाद उन्हें दण्ड देने के लिये चल महम्मद इसन-दिल्लीयासी एक कयि। मा मायर । पड़े। फालके ममोप मादेन्दी नदी के किनारे अपने पावशादफे शासनकालमें १६०४ १०ी महम्मद भार ' भाइमाहिमा परामय सुम कर हुमैन दाक्षिणात्यको उनकी बेगोका यियरण तथा मुमलमान महापुरको । मागा। पोले यहां फिर सौर कर उसने गुजरात और जीयमो लिप कर कयित्व भकिका भच्या परिचय दे. माम पामके स्थानोंको मधिकार कर लिया। नौरन गये हैं। गांकी अधीनस्थ मुगलसनाने या उसे परास्त महम्मद हसन पुरदान-पुरदान -काटा नामक पारमो। मिया | अनन्तर यह बनियार उल मुल्कफे साग मिल मभिधागके प्रणेता। १६५१ ई० को इन्होंने उत. प्रत्यको गया । प्रतिहिमापरायण मारके दारी पार पाय रमना कर दरारादफे निमाम अगदुल्ला कुतुब शाह मामसे उत्सर्ग किया। सकस्य साना धागामिद गामा एक हिन्दू उग. पाकाम तमाम किया। मदम्मद दादरी-बादशाद जहांगीरमा प्रतिपालित एक सम्भ्रान्त उमराय । इसने तमफजदागिरी नामफ प्रसिद मम्मद हुसेन (शेष)-भरपदेशोय एक गुमलमान कपि। इतिहासके शेष अंगको समाप्त किया था। इसका | पारयताख विरपुस्पत्ति होने कारण न मिलमा पहला मनमय बादशाद जोगीरन मोर पिचला मग को उपाधि मिली थी। मिगल मगर मामिद सनि लिया था। पदना सीसा पा । भी सानिम पानेर बाद में