पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१३५

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महाकोश-महागा १२५ महाकोश (सपु० ) १ मुराहम्' कोगमुक्त । (en महाझाम्प (म.पुवासा मनुमार. एक बहुत बड़ी ___tuni)२गि । मंग्या । महाकोशफला (म मो०) महान् कोन: फळे यम्याः। महापरिन ( म० लो०) पुतीपगिरीर। प्रस्तुग देवदाली लता, घघर येल । प्राली-पो १६ मेर , काढ़े के लिये गैरकी डाल ५७० महाकोशा (म० मी०११ एक नदीका नाम । मनपल, गीतम. पेशी छान १० पल, भमनको पाल गोंका देवताविशेष! १०० पल, करजको छाल, नीमको बाल, यसको हाल महाकोशातको (म० बी० ) महनी चासो कोनातकी , क्षेवपर्पटी, फटाको छाल, मटमको छाल, पिल घेति । हस्तियोपा, मनुमां, धीमा-तरोई नामको तरफारो। हरिदा, दारदरिदा, समलतास, गुलश, विफला मीर यह स्निग्ध, रक्त, पित्त और वायुदोषनाशक मानी निमोप प्रत्येक ५. पल, जाट ६४० मे, गेप ८० गई है। सेर, चूर्ण'फे लिये अतीस, ममलताम, करको, मायन- महाकौपीतक (सी ) आश्वलायनगृायसूत्रोल येदिक का मूल, मोथा, मगसका मृल, विफला, परवलको प्रन्यविशेष। पत्ता, नीमफी छाल, पिसपापड़ा, दुरालमा, लाल महाकाष्ठील (स'• पु०) गीतम युद्ध के एक शिष्यका नाम । चन्दन, पोपर, गजपीपर, पाठ, दरिद्रा, दामहरिदा, महामतु ( स० पु.) बहुत बड़ा या । जैसे-राजसूय, यय, गोपाटकर्फटी, तमलो, रामालना, भनम्नमूल, अश्वमेघ यादि। महाम ( त्रि०) विष्णुका एक नाम ।

न्टमी, भट सकी छाल, मयांका मूल, गुलध, चिरापता,

महायोध ( स० वि०) १ मतिमान मोधफे जैसा । पु०) मुलेठो और गूलर प्रत्येम दश पफ पन्ट । पोले गुना २ शिय, धून टी। पारुप नियमानुमार इस पृतका पांक करे। इस सेयनमे कुष्ठरोग भारोप होता है। महारशीतन (स० ० ) मालपणों। महागीतनिशा (मस्त्री० ) शाटपों। परनिरिमा ..) महाबयं ( म० पु.) एक बहुत बड़ी मया जी माँ महाक्ष (सं० पु.) १ महादेय । २ यिष्णु । ___(भारत १३।१४६।३.१) मयं को होती है। महाक्षत्रप (सपु० ) १ श्रेष्ठ क्षण । २ राजाको पाक महाबलाल ( म०पु० ) सम्प्रदायभेद । उपाधि | पराजयस देगे। महापान (म०वि०) पिस्तातगुना, बहुस मया महाशपणक-काश्मीरफ रहनेवाले एक पण्डित । माप चीक्षा गरदा। (सी०)२ सुमाचीन सातादि पुराने अनेकार्य ध्यान मञ्जरी भीर एकाक्षरकोप नामक दो भि जमानेके गई। मान लिख गये हैं। महापान (म.लि.) यिम्पान, मदर महाशार (मपु० तेस्र क्षायिशेष । महाग (म०वि०) महान् उमाविस्य । उन्नन, महासीर ( स० पु०) सुयश, ब। . ममुम। महाक्षेत्र--कालिकापुराण-णित एक नीयंका गाम । यद महागडा ( स० रत्री.) गोमेद, महामान. मनुमार गुमदना मदीफे पूर्य और ग्रामसेव तीफे पश्चिममें एक मदोका नाम | भयभित है। यहां मादित्य नामक भैरवको मूनि , मदाग ( ०) दिग्गज । प्रतिहित। यमन्दिर पुग्ध विमोना नामक नदी . महागण । पु मााममा रोगसमोगी. ' तथा पोत भौर करण नाम यो पुण्य है। दोनों का समूह । ३ मतिषि, भाग मद। . अगदर्भ स्नान पर निगो गिनाट पर पर पूर्ण महागणपति ( पु.) गणेश पनाम पूमा फरगंग मशेष पुष्य नाम होगा और मनमें पूर्व में एक भनुमरवा माम। मोकको मामि दोनो । ( पु.! महागा (स.पु.) ग ए . माम। Vol. ITI