पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१४४

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१३२ पहाड़कर पहातारा २ उक्त तालुकका एक शहर । 'यह अक्षा० १८५ महातपन ( स० पु.) नरंकभेद। . . . .. उ० तथा देशा० ७३.२१ पूल के मध्य सावित्री नंदोके महातपश्चित (सी०) सत्रमेद। .. . दाहिने किनारे अवस्थित हैं। अलीबागसे इसकी दूरी महातपस् ( स०नि०) १ घोर तपस्याकारी, कड़ी तपस्या ? ... ५३ मोल है। जनसख्या आठ हजारके लगभग है। करनेवाला। २ विष्णु ।३ एक मुनिका नाम । ४ सह्यादि... मगरसे एक कोस उत्तर-पश्चिम पालका विख्यात वर्णित एक राजा। पौद्ध-गुहामन्दिर अवस्थित है। प्रत्नतत्त्वविद्गण महातप्तकृच्छ ( स० स्त्री० ) एक व्रत। इसमें तीन दिन इसे ११वीं शताब्दीका वतलाते हैं। पुर्तगीज-प्रवर तक गरम दूध, गरम घो या गरम जल पी फर चौथे दिन दि-कैप्ट्रो १५३८ ई०में इस स्थानको वाणिज्य- ! उपवास किया जाता है। वृद्धिका उल्लेख कर गये हैं। महाराष्ट्र-राजधानी महातमःप्रभा ( स० स्त्री०) महती तमसा प्रभा प्रकाशो. रायगढ़के समीप रहनेसे इस नगरमें सभी समय महा. ऽस्यां । नरकविशेष। यह नरक धोर तमसाच्छन है। राष्ट्र सरदार आते जाते थे। १७७१ ई०में यह नगर "धनोदधिघनवातंतनुवातनभःस्थिताः । दुर्गादिसे परिशोभित और धनजनसे पूर्ण था। १७६६ रत्नशर्करावालका पचधूमतमःप्रभाग ई०में यहां नानाफड़नवीस, वाजीराव और अगरेजको महातमःप्रभा येत्यधोऽयो नरफममयः ॥" (हेम) . जो सन्धि हुई, उसके अनुसार वाजीरायको पेशवा-पद महातमस् (सं० को०) अविद्या । अविद्यासे हो तामिस्र, और नाना फड़नवीसको मन्त्रीका पद मिला था। १८०२/ अन्धतामिस्र, महातमः आदि होता है। ईमें होलकरने जब पूना पर धाया मारा, तव पेशवाने "सोऽनुविष्टो भगवता यः शेते सजिलाशय।। इसी नगरमें आ कर आत्मरक्षा की थी। १८१८ ई० । लोकसंस्था यथापूर्व निर्ममे मंस्थया स्थया ।। यह नगर अंगरेजोंके दखलमे आया। ससर्ज छायमा विद्यां पञ्चपर्यागामग्रतः।.. ____ यहां समुद्रोपकूल-वाणिज्यका कारवार पूर्ववत् जारी तामिसमन्धतामिस्त्र तमो मोहो महातमः" . . . है। मलवार, गोआ, कोङ्कण और बम्बईके वाणिज्य द्रष्य . . . (मागः ॥२०१८) . समुद्र के रास्तेसे सावित्रीके मुहाने में आते हैं। यामदनी विशेष विवरण महात्म्य शब्दमें देखो। । द्रयों में अधिकांश पहाड़ी रास्तेसे दक्षिण भारतमें भी | महातरु (सपु०) महाश्चासौ तरुश्चेति । १ स्नुहो भेजा जाता है। महावलेश्वर जानेके लिये यहांसे एक पृक्ष, मनसाका पेड़। २ वृहदक्ष, घड़ा पेट्र। .. अच्छी सडक दौड़. गई है । शहरमें १८६६ ६०का महातल (सं० लो०) महान्य तत् तलश्चेति । पाताल. . भ्यनिस्पलिटी जारी हुई है। यहां एक अस्पताल, सव विशेष, चौदह भुवनों से पृथ्वीके नीचेका भुवन चा जजका इजलास, पफ मिडिल स्कूल तथा चार और भी | दूसरे दूसरे स्कूल हैं। "अतानं वितलाशय नितमय तलातलम्।। .. महाडकर-एक प्राचीन टीकाकार। महातालय,मुतनं सप्तमन रमातमम् ॥" (शब्दमात्रा) महाव्य ( स० पु०) महान् आन्यः शोभासम्पन्नः। १ "पातासमेतस्य हि पादमूल पठन्ति पाणि प्रपद-रयागतम् कदम्ब । (त्रि०)२ अतिशय धनयुना, धनी। । महातन विश्वमजोऽथ गुल्फी वाताने ये पुरुषस्य ॥" महातङ्क (सं० पु० ) १ मदात्यय रोग। २ महायाधि ।। ... .(भागवस २९पांगास देखो। महातस्य (स' लो०) ज्ञानतत्त्व, सांस्योक्त द्वितीय तत्त्व ।। . महतत्त्व देखो। महातपश्चित (सं० को०) सनमेद। । महातत्त्वा (सं० रखी०) दुर्गादेवीकी एक अनुरोका 'महातारा ( स० स्त्री० ) तारयति संसारादिति तृणिचा .. ' अच, नियां , टाप, : राता महती चोसो तारा 'चेति महातपासप्तमी ( स० स्त्री०) एक प्रकारका उत्सय ।। फर्मधा० । · बौदोंकी एक देवीका नाम । पोय--तारा, महातप्त देखो। , महाधी, ओंकारा, स्वाहा, शी, मनोरमा, सारिणी,"जयां, .. तल।