पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१६६

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महाममूत-पहावल

- ", पादोदकञ्च निर्माल्य नैवेद्यञ्च विशेषतः। - महामोतिहा (सं० स्त्री०) तान्त्रिकोंके मतानुसार एक
  • . महाप्रसाद इत्युक्त्या ग्राह्य वियोः प्रयत्नतः॥" .: । -देवताका नाम । : . . " :. :.

. . . . . . . . . . . (एकादशीत०) महाफणक (सं०:पु०) नागभेद। :.: .;-: ' विष्णुके पादोदक, निर्माल्य और नैवद्यको महाप्रसाद महाफल (सं० पुं०) महत् पूजादी प्रशस्त पूज्य पा कहते हैं। . . . . : . फलमस्य । १. विल्ववृक्ष, येलका पेड़ । २ नारिकेल घुस, ..२ जगन्नाथजीका .चढ़ा हुमा भात ।। २ अतिशय नारियलका गाछ । : ३ तालवृक्ष, ताड़का पेड़। ४ पोलू प्रसन्नता। महान् प्रसादोऽस्य । '४ शिव । ५ मांस । वृक्ष, एक फलदार पेड़का नाम:। महाय तत्फलश्चेति। ६ अखाद्य पदार्थ । .(क्लो०) ५वृहत् फल I...:... ::. :: ... . . महाप्रसूत (स.पु०) एक बहुत बड़ी संख्याका नाम। ____ "श्रोत्रियायैव देयानि हन्यकत्र्यानि दातृभिः)........ महाप्रस्थान ('स' 'क्ली०) प्रस्थीयतेऽस्मिन्निति प्रस्था- महत्तमाय विप्राय तस्मै दच महापालम् ॥"...... ल्युत् । महत् प्रस्थानं, महापथः तत्र गमनं। १ मही- (मनु ३६१२८) . पथ-गमन, शरीर त्यागनेकी इच्छासे हिमालयकी ओर महाफला (सं० सी०).१.इन्द्रयारुणी। २.राजजम्बु, पड़ा जाना। कलियुगमें यह निषिद्ध बतलाया गया है। जामुन । ३ कटुतुम्वी, छोटा कडवा कह । ४. महा- 'किसीको मरनेकी इच्छा होते हुए महाप्रस्थान नहीं करना कोशातकी, धीआ तरोई। ५ मधुर मातुलङ्ग कमलानी । चाहिये। 'मोहवशतः यदि कोई ऐसा करे, तो उसे. वनवीजपूरक। ७ नीली, नोलका पौधा । ८ नागवला, , | गुलसकरी। प्रायश्चित्त करना होगा। . . . . . . महाफेज खां-गुजरातके. अधिपति सुलतान महमूद "समुद्रयात्राखीकारः कमण्डलुविधारणम् ।। विगाड़ाके अधीनस्थ अलंदाबाद प्रदेशके एक फौजदार। द्विजानामसयासु कन्यासूपयमस्तथा ॥ . . । इनका प्रशत नाम जमाल-उद्दीन-शिलादार यां। सुलतान देवरेण मुतोत्पत्तिमधुपर्के पशोधः ।.. .. २य मुजफ्फर और वहादुर शाहके राज्यकालमें इन्होंने मोसादनं तथा श्राद्ध वानप्रस्थाशमन्तथा विशेष प्रतिष्ठा पाई थी। दत्तायाश्चैव कन्यायाः पुनर्दानं वरस्य च। . महाफेजखाना-मुसलमानों को कचहरोका एक घर । दीर्घकालं ब्रह्मचर्य नवमेधारयमे घको । । यहाँ पूर्वायत्ती मुकदमेकी नत्यों रहती है। . . महामस्थानगमनं गोमे घञ्च तथा मखं। महाफेणा (सं० स्त्री०) महती फेणा | हिंडीर, समुद्रफेन । इमान् धर्मान कलियुगे वानाहुर्मनीषिणः।" , २ फाटल नामकी मछलीका कांटा। . (उद्वाहत्त्व) महायनिज (सं.) श्रेष्ठ व्यवसायी, वही तिजारती। - २मरण, मौत। -- महावन्ध (सं० पु०) योगप्रकरणसे हाथ पांवका बांधना। महामस्थानिक (स० त्रि०) १ महाप्रस्थान-सम्बन्धीय । महावन्ध्या (सं० स्त्री) चिरवन्ध्या रमणी, वांझ लो। २ महाभारतका १७यां पर्व। . . . | महावभ्र (सं० पु०) खोहमें रहनेवाला एक प्रकारका जान " महामाश सपु० ) अतिशय 'ज्ञानी, बड़ा ज्ञानवान् । यर। महाप्राण (सं० पु०) महान्तो दीर्घकालस्थायिनः प्रोणा | महावर्वरिका (सं० सी०) मागों, वरंगी। यस्य । १ द्रोणकाक, काला कौआ। २ वर्णविशेष । ख, महाबल (सं० लो०) महादतिशपितं वलं सामध्यस्माद घ, छ, झ, उ, ढ, थ, ध, फ, भ, श, ष, स और ह ये सब महत् पलमंस्पेति या। १ सीसक, सीसी (०) २ युद्ध । वर्ण महाप्राण हैं। "वर्गाणां प्रथमतृतीयपञ्चमाः प्रथम पितरों के एक गणका नाम । तृतीययमौ य र ल वा श्वाल्पप्राणाः अन्ये महामाणा" ! महान महात्मा महितो महिमावान महावसः। (सिद्धान्तकौ6) i (त्रि०) ३ महावल, बड़ा ताकतवर! गयाः पच तयवे ते पितृणां पापनाराना। "... . . ......... (मार्कपटेयपु० ६१).. महाप्रीतिवेगसंभवमुद्रा (सं० सी०) मुद्रा विशेष