पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१७१

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महाराध्यद्वनी-पहामागिन महायोध्यग्यतो (म० बी०) तन्त्रोक देवताभेद । । मनाली-मीमको पाल, स्यामादसा, भगीर, कलो पला, महामालन (म0पु0) परम ग्राम। समर, विमला, मोगा, पिसाप, ममममन्द, पप, महापाक्षण (स० पु०) महानतिनिन्दितः प्रायणः। गैरकी नकदी, माल गन्दन, मापन, गोठ का परही निम्दित प्राक्षण, निरप्ट ग्राहण | २ यद प्रावण जो भदमो मूलको माला गिरायमा. गुहयोग मनको दास, मुनक परयका दाग लेता दी, कट्टदा । साधारणतः लोग यिददक, गोपालाराका मूल, गुरगामूल, furs. ऐसा प्राण निन्दित माना जाता है। इन्द्रमा, यिन, चितामल, स्तिका, पलामीछान, महामट ( म० पु.) हांश्चासी भटेश्चेति । भतिगय गुलश, गोहीमकी हार, परसा पसा, पिता, दाह. रवीर, यदा मारो योसा। दरिदा, पीपर, गगतसासर. फली मक्षा, लियाको नमा देत्यमहाभटापिट भागदन्तःम उदोर्णदीपिनि ॥" लना, भोल, गौनाधाम, मीठ, पाकुग्दफा पीस. ताल. (मागान हम.) मूली, प्रियंगु, करपट, गारपुर निरोपको जालपरपे महामत-पाकवटी (सं० रखी०) यटिकोपविशेष प्रस्तुत , दो पल, पाकार्य गल ६४ सेग, शेषर, भल्लाता मपालो-सोनामापी, पारा, गंधक, हरताल, मैनसिल, हमार, जल ६४ मेद शेप १६ संर दोनों प्रकार का अपरक, कान्तलौह (कांतसार), निसोध, दन्तीमूल, को अयडी गरद छान कर साथ मिला। पो0 मोथा, चीता, मोड, पीपर, मरिच, हरीतकी, जमानी, उसमें पुराना गुह १२ मेर मौर पसार मान्दारकी काला जीरा, हींग, कटकी, सैन्धयलयण, सायफल और मना देकर पाक फरें। इसके बाद विराटु, सिमला, यमशार, प्रत्येक २ तोला इन्हें अच्छी तरद गूर कर एक मोथा, सेग्धय मीर यमानी, प्रत्येक एक पलादारमोनी, साथ मिलाये। पीछे अदरका, सरदाल, सूर्यायन, ज्योनि- सेमपत्र, इलायची पार नागेश्वर प्रत्येक दो शोमा गई प्मती, प्रत्येक रसमें सात सात पार भावना देकर अच्छी तरह चूर्ण कर उन, कामें माल दे। मगातर एक रसीको गोलो पनाये । इसका भनुपान लयद्गचणं गुरपाकप विधागानुसार पाक करके उसे एक गो.. है। मामरोग, चिराग्निमारा, कोएपरा, शोध, उदरी । सममें गये। इसका अनुपाम गुन्या पया मार रोग, भगोण, शाल और खिदोषम्यरमें यह भोपथ बहुत दूध सधा पध्य 3m मम । चिगिरगफको रोगीला लाभदायक है। (रसेन्द्रमारस. मनीणाषि०) बलावल देख कर मासा मिथर करणी धादिय । म महामद (म.पु.) १ पतभेद । २ मेग पर्वतफे उत्तर : गुहका सेवन कार्गस ममी मारक कुर, पातरम्पा. एफसरोयरका नाम। पतं, गर्ग, पाट भादि यिविध मेग पति शोर मारोग्य - मयो', एर: पून मानग' दहिग गया। होने हैं। पुछाधिकारमें यद पर गायुगम मौरय मानी शोवोद पश्चिमे मेरा हामद समाना।" गई।(भेगमारना० कु ) (iii. v३) महामाग ( स.वि.) मदान् गागा गया १ पदा महामना (सरली ) मद मर महल पम्पाः रा। भाग्यपान, किस्मतयर । ( पु. ) हा माप, १ गहा। २ काश्मरी। महामय (सलो०) १ मतिमय भय, वहा मारी पर, महामागपत ( ) परम वैजय राम. (पु.)२ महामारस गनुसार अधार. एक पका : भेदमदामागयपुगण भागात पारदमाग माम। मोनिमा ति गर्म से उत्पन्न हुमा यार मत मयु. समकादि,मारदारपि, पनि, महारया (गबी०) पुराणानुसार कमीका गाम मीम, प्रामाद, गुरुदय, पमं माम्या : महामरी ( स० ) यमगिरीष महामरी गगा पार माताभार दो । कपनाशमानी गई है। महाभागा (ग ) शापिनीका एक माम। मदामातगुट (गला भारपिशेष मान महामागिन (स.नि.) पाणी शि | Vol. XVII 10