पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१७५

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महाभारत १५१ प्रादुर्भाव और मायाके साथ कथोपथन वर्णित है), १० | की रक्षा तथा राजमिदामन पर स्थापन, मणीमाण्डव्य. ,अनुशासनिक पर्व (इसमें धोमान भीष्मको स्वर्गारोहणको के शापसे धर्मको नरयोनिमें उत्पत्ति, परदानके बलसे वात लिखी है ), ६१ पीछे सर्वपापपणाशक आश्व } कृष्णद्वैपायनसे धृतराष्ट्र और पाण्डका जन्म तथा मेधिक पर्व, १२ आध्यात्मविषयक अनुगीता पर्व, ६३ पाएडयोंकी उत्पत्ति, पाण्डवोंके धारणावर्त यात्रा- .माश्रमवास पर्ष, ६४ पुत्रदर्शन पर्व, ६५ नारदागमन ' के सम्यन्धमें दुर्योधनकी कुमन्त्रणा और उसके द्वारा

पर्व, ६ महाप्रास्थानिक पर्य, ६७ म्यारोहणिक पर्व, ६८ पाएडयोंके पास पुरोचनका भेजना, हितानुष्ठानके लिये

खिल, नामक हरिव' पर्यान्तर्गत हरिवन पर्व, १६ | रादमै विदुर द्वारा म्लेच्छ भापामें धीमदर्मराजफे प्रति विष्णु पर्व (इसमें शिवचर्या और कृष्ण द्वारा कंस | हितोपदेश देना, विदुरफे याफ्यफे फलम्याप मुरङ्गका वधका उल्लेख है), १०० पोछे अति अद्भुत भविष्यपर्य, तय्यार किया जाना, पांच पुत्रोंके साथ सोई हुई निषादी महामति ध्यासने सो पाँको लिया है। सूतकुलोद्भव और पुरोचनका लक्षागृहदाह, निविडयनमें दिलिया लोमणिके पुत्र उप्रश्रयाने नैमिषारण्यमें क्रमसे अवारह ! राक्षसीको पाएडवोंका देखना, महावल भीम द्वारा हिडिम्य- पोको संक्षेपमें वर्णन किया। उसो सशिम विवरण-! का बध, घटोत्कनकी उत्पत्ति, पाएडयोंका ध्यासका को हम यदा उल्लेख करते हैं। दर्शन और ध्यासकै आशानुसार एक प्राहाणोंके घर • पौप्य, पौलोम आस्तोक आदियशावतरण, सम्भव पाएडयोंका डागातवास, बकराक्षसयध और उनके दर्शन- लक्षागृहदाइ, हिडिम्बवध, चैत्ररथ, द्रौपदीका स्वयंवर, से गांववालोंका विस्मयान्धित होना, द्रौपदी और धृष्ट. वैवाहिक, विदुराका आगमन, राज्यलाम, अर्जुनका वन घुम्नको उत्पत्ति, एक ब्राह्मणके मुंहसे द्रौपदोका स्वयं- घास, मुभद्राहरण, यौतुकाहरण, खांडववनदाह और मय दर होना सुन कौतुहलामान्त हो पाएडयोका पाचाल देश- दर्शन-ये सब विषय आदि पर्नामें वर्णित हैं। को मोर यात्रा करना (पाञ्चाल अव पक्षाव कहलाता है), पों के विषयोंका वर्णन । गङ्गाके किनारे अङ्गारपर्ण नामक गन्धर्यको अर्जुनका पोग्यपर्व । जीतना, उसके साथ मैत्री स्थापित करना तथा उसके .. इसमें उतङ्कका माहात्म्य चर्णित है । पेलोम, मुंहसे सपती, धशिष्ट योर मओयरकी कथा सुन कर पर्वमें भृगुवंशका सविस्तार वर्णन है। आस्तीक पाएडयोंका चहांसे पाञ्चाल नगरमें जाना, यहां सारे पूर्व में गाड़ तथा सपोंकी उत्पत्ति, भीर समुद्रमन्यन, राजामोंके धोच लक्ष्यभेद कर द्रौपदीको पाना भीर यहां उच्च श्रियाकी उत्पत्ति और महाराज परीक्षितके पुत्र अन्मे-1 युद्ध होने पर भोमसेन और अर्जुन द्वारा शल्य, कर्ण और जयके सर्पयशानुष्ठानके समय भरतवंशीय महात्माओंके । अन्यान्य मदान्ध घीरोंका पराजित होना, भीमार्जुमके सम्बन्धको महाभारतोय कथा वर्णित है। अलौकिक तेज देख और उन्हें पाएडय समम एष्ण मौर . . . . : सम्भव पर्य। बलरामका भागय गृहमें यागमन । द्रौपदीफे पांच पति . . इसमें राजाओं और अन्यान्य पोरों तथा दैपा- होंगे यह सुन कर दुपदराजका विमर्ष होना, इस पर यनकी उत्पत्ति, देवताओं के अंशावतार, दैत्य, पञ्चेन्द्रका उपाण्यान, द्रौपदीका देवरत अमानुपिक दानव, नाग,. यक्ष, सर्प, गन्धर्व, पक्षी और अन्यान्य विवाह, धृतराष्ट्र द्वारा विदुरको पाएइयोंके पास भेजना, विविध प्राणियोंकी उत्पत्ति तथा भरतके नामानुसार यिदुरका : आना और भगवान् श्रीकृष्णका दर्शन पाना, भारतवंशस्याति, शकुन्तलाका पृत्तान्त, शान्तनुराज पाण्डवोंका सापडघमस्थ यास करना और यदराज्य घर गङ्गाके गर्म से पसुओंकी उत्पत्ति और सर्गारोहण, शासन, नारदफी आज्ञाफे अनुसार द्रौपदीके घरमें मामा भीमका जन्म, और उनका राज्यत्याग, ब्रह्मचर्यावलम्बन और पांचो मायोंका नियम बांधना, मुन्दोपसुम्बकी कथा, और प्रतिज्ञापालन, भीष्मकत्तुक चितानन्दको रक्षा और दीपदीफे साय युधिष्ठिर जिस घरम थे, उस घरमें नियम ' चित्राङ्गदफे मारे जाने पर उनके छोटे भाई यिचिन्तयोर्य-! तोड़ कर ग्रामोंके उपकारा मनमा गापडीयको