पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१९६

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पटामृत्युजपरस-यादा भायुको बढ़ाता है। यह मन्त्र यदि मिद हो पाय, इन्द्रयय, रोनकी, पनपपानी, पपानी, वृतिया, . सो मानय निरामय हो कर दीर्घायु होते हैं। मृत्युशप भीर रसाइन, प्रत्येक ४ माशा। इन्दै पल पीमर सन्स इसके मन्त्रादिका विश्य इस प्रकार लिया है। मदरफ गौर गुलशकरसमें मायना देनी होगी। दो 'यदि इत महती प्रौनिम्मपास्ति कुनभेरय । उसमें २ पल मधुमाल कर रसीको गोली मा कपपप पिशेष महामानुपामिपन् । दोस्फे अनुसार निकटमकको मनुपान स्थिर करना । मा दैवि प्रामामि महामृत्युमपानिधन। चाहिये। प्रतिदिन सपेरे रसका मंचन करनेमे हा. भारदिफर पुगा मृत्योत्तर परम् ॥ ज्यर, पांसी, शिमग्यर, गुला, शोप मादि पिविष पस्प विमानमाग्य निरजीको निरामयः। रोग मान्त होते है। (मपापरनारी ) नित्यमशिरा जप्त्या मृत्यु मत्युपर्य मयेन् ।" महामृध (सं००) मीपण पुत। (मृत्युपत्र) महामेघ (स.पु.) महान मेप य । महामृत्युञ्जय मन्त्रका प्रतिदिन १०८ बार जप महान मेघः। २ अतिशय मेघ, कालो घटा। । करनेसे मृत्यु जय होतो है अर्याम् यह दीर्घायु होता है। मदामेघवान (स' को०) पमपात जैसा निवारण करिनमे कठिन रोगमें यदि महामृत्युञ्जय शियपूजा शाद। की जाय, तो यह रोग अवश्य दुर होता है। महामृत्युशप | महामेघायनिघोष ( स० वि०) जोमूतमका गमोर सदपारा विगिटा . शियपूलासे बढ़ कर दुःसाध्य रोगको और कोई चिकित्सा " महामेधनियासी ( स०पू०) गिय । पेनिर, गुगल ही नहीं है। इससे प्रत्यक्ष फल दिखाई देता है। मृत्युभव देभ्यो । महामेद (म0पु0) मेदपति स्निग्धीकरोतीगि मिड-जिय, महामृत्युअपरस (स० पु०) रसोरविरोर इसको प्रस्तुत भय महान मैदा। मगमे एक प्रसिद भोपति. मपालो--पारा, गन्धक, लोह, अवरक, सांवा, मनसिल, पर्याव-पुरोन्नय २ मे निसपर मोमका पहा , विपरि, कोढ़ी, चूतिया, शव रसायन, जापफल, कटको महामेवा (मनोक) मेथनीति मिर-निय प टार, साविक्षार, ययशा जयपाल, सोंठ, पोपल, मिर्च, होगी महली मेवाप्रयाग मेसे पा, प्रशिक्ष मोसिनाम- सैन्धय लयण इनका परावर परापर भाग ले कर चूर्ण गयात कम्मनाकः । पयांप-यापिटना, भोपगो, पाय- करें। पीछे सूर्यावर्त और दिल्यपरक रस ७ बार गागिणी, देपेटा, मुरामेदा, दिया. देपमणि पगाया, मापना है। इसके बाद फिरसे सूर्यापतरसमें घोर कर | मदारिया, गगा। इसका गुण हिम, गिरकर २रत्तीको गोलो पनाये। भनुपाम दोपकै पलायलय मौर गुमानिकारक, दाद, मल, पित्त, प, पाnire भनुसार स्थिर करना होगा। इसके संयनमे प्लीहा ग्यरमानक माना गया (रामना) 'पफल, गुल्म, मठोला, अममास, शाय, उदरी, पातान.. मामाक मो-महामे पार कर म मौर विधि भादि रोग प्रमित होते हैं। पापा जाता। प्रधान प्रधान मुनि से महामे रसेन्द्रसारमोनि.)। पर देखने में मदरफफे गमाग दाता ६ im महामृत्यप्रपलौद (सको०) गौपपपिर। प्रस्तुत ' पलती है।मको मामले का मेमोमाइ प्रणानी-पारा, गंधक पीर मरफ प्रत्येक ४ मामा, : इससे रम निता। मेद, बहुममगि माम है। सोहा १ तोला, मावा २ तोता, यासार, सेभय, पिट, पाAmri, मजिशिया मदा, गोमा और कोशीको भस्म, की मम्म, गितामल, दालान होग. , अपरा| मंद मोर मार दोनों ही गुरु, मरण, करणी, रोहिताको पात, निमोप, मोकी प्रारको करना, Arg , m. miram भस्म, गोपाल कररीका मून, भगको माम, ताल. या गोगमा पिम माप मोर HRAREt। अगंगे मग, मन्नत हरिदा दायमा, वि.