पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२०५

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1 . ... महायानदेव-पहारतियल्लममोदक . १८१ जाने लगे थे। मगधके नालन्दामें उस समय भी जो | पितामह, पुलस्त्य, यनिष्ठ, पुलद, अगिरा, फतु और सब धौधतान्त्रिकगण थे, उनमेंसे बहुतोंने मुसलमानोंके फश्यप ये सब ऋणि महायोगेश्वर कहलाते हैं। अत्याचारसे स्वदेश छोड़ कर नेपालमें आश्रय लिया महायोगेश्वरी ( सं स्रो० ) १ मागदमनी, नागदीनी । मार अधिकांश मनुष्य मुसलमानोंके हायसे मारे गये।। २ दुर्गा। इस तरह बुद्धको जन्मभूमिसे योधर्म जाता रहा। महायोनि (संखो०) योनिरोगविशेष, वैद्यक अनु. नेपालमें जिन्होंने-शरण लो, वे पुनः तान्त्रिक आचार्योंके , सार स्त्रियोंका एक प्रकारका रोग। इस रोगमें उनको शिष्य बन गये। वही तान्त्रिक आचार्यगण यनाचार्य योनि पहुत बढ़ जाती है। यह रोग अत्यन्त षदायक नामसे प्रसिद्ध हैं। इन्होंने अपनी अपनी प्रधानताको है। योनिरोग देखा। रक्षाके लिए जो मत प्रचार किया, यही अञयान कह- महायोगिक ( स० पु०) २६ मात्राओंके छन्दोंकी संज्ञा । लाया । . अनमो नेपालमें वज्रयान-और तिश्चतमें काल- महायोधाजय (सं० वी ) सामभेद । चक्रयान प्रवलित है। महाप्य (सं० लि.) पूज्य, पूजने लायक'। हीनयान और बौद्ध शब्दमें विस्तृत विवरण देखो। महारशस् (सम्लो ) मोपण राक्षस । महायानदेव ( स० पु०) चोन-प्ररियाजक, यूपनचुवंगकी | महारक्षा ( स० स्रो०) बौद्ध-कुलदेवीमेद । महामतिसरा, उपाधि। महामायूरो, पहासहस्रममहिनो, महाशीतवती और महा. महायानपरिग्राहक (सं० पु. ) महायान-मतावलम्बी। मन्त्रानुसारिणो ये पांच महारक्षा हैं। महायानप्रभास (स०पू० ) योधिसत्वभेद । मदारक्षित (सं० पु० बीच आचार्यभेद। . महायानसूत्र ( संशो० ) महायानोंफें कुछ सूत्रप्रन्यो । महारक्त (स' को ) प्रवाल, मूगा। ..." महारजत (स' ०० ) महश तत् (जतति । १ सुवर्ण; महायाम ( स० लो० ) सामभेद । सोना। २धुस्तूप धतूरा। ३गृहद रोया 39 महायाम्य ( स० पु०) विष्णु। | मदारजन (सलो ) रज्यतेऽनेनेति रस फरणे ल्युट् महायविनाल (सं० पु०) देवधान्यक्ष, ज्यारका पौधा ।। - ( अनिदित मिति:। पा ६२४) इत्यय करजनमः महायुग (सं० लो०) सत्य, प्रेता, द्वापर और कलि इन सूपसंपयानं फसण्य' इति काशिकोयत्या में लोपा, चारों युगौंका समूह । मानयोंका यह चार युग देयताओं महश तत् रमन ति कर्मपा० । १ 'कुसुम्मपुष्प, का पफ युग होता है। युग देखो। कुसुमका फूल । २वणे, सोना। .. महायुत (से० पु०') एक बड़ी संख्या जो सौ अयुतको | महारण (स० पु.),महायुद्ध, पारसलाई । होती है। महारण्य (सी )महम् अरण्य। यूएछन, बड़ा महायुध (सं० पु०) महान् मायुधी यस्य । १ शिव, महा. वा! पोप-अरण्यानो, कान्तार। प्रविश्य तु महारपय दण्डकारण्यमात्मवान। . देय। (त्रि०) २महा मायुधयुक्त, जिसे 'बड़ा गात्र या हथियार हो। , . . रामो ददर्श दस्तापसाभम मपदलम् ॥ (रामायण शार महायोगिन् ( पु०) १ श्रेष्ठ योगी। विष्णु । ३शिव महारत (फा० स्रो० ) अभ्यास, मश्क । महायोगी (10) महायोगिन् देखा । महारतियलममोदक (स0 पु०) मादफायपियिरोग। महापोगेश्वर (.स.पु. ) पितामह गीर पुलस्य आदि। प्रस्तुत प्रणाली-सिद्धियोलपूर्ण ५ पल, धो ४ 'पान, .पि. . . . . . राण१६ पल, शनायरोका रस ३२ प्रल, सुध ३/मल, ... पितामह पुतस्त्वरय यसिहा पुनदस्तथा। सिदिरस या इसका काढ़ा ३२-पंन्ट, रोका ' मिरारन मनुष्य करमपच महानपिः। घ २२ . पल इन एक साथ मिला. ,फर पाक एवं......मरायोगेरपराः स्मृताः।":, . . .. करे।। पोठे उसमें आंवला, जीरा, मंगरेला, मोया, Vol. XVII.48