पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२०७

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THI महायानदेव-महारतिवल्लभमोदक . “१८ जाने लगे थे। मगधफे नालन्दामें उस समय भी जो पितामह, पुलस्त्य, यशिष्ट, पुलह, मदिरा, मनु मोर सब बौधतान्त्रिकगण थे, उनमेंसे बहुतोंने मुसलमानोंके कश्यप ये सब ऋपि महायोगेश्वर कहलाते हैं। . अत्याचारसे खदेश छोड़ कर नेपालमें आश्रय लिया महायोगेश्वरी ( में खो०) १ नागदमनी, नागदौना । और अधिकांश मनुष्य मुसलमानोंक हायसे मारे गये। २ दुर्गा । इस तरह बुद्धको जन्मभूमिसे बौद्धधर्म जाता रहा। महायोनि (स० स्त्री०) योनिरोगयिशेप, बैंधके अनु. नेपालमें जिन्होंने शरण लो, ये पुनः तान्त्रिक आचार्योंके , सार स्त्रियोंका एक प्रकारका रोग। इस रोगमें उनकी शिष्य बन गये। वही तान्त्रिक माचार्यगण यनाचार्य योनि बहुत बढ़ जाती है। यह रोग अत्यन्त दुःपदायक नामसे प्रसिद्ध हैं। इन्होंने अपनी अपनी प्रधानताको है। योनिरोग देर।। रक्षाके लिए जो मत प्रचार किया, वही यनयान कह- महायोगिक ( स० पु०) माताओंके छन्दों की संज्ञा । लाया। यब भो नेपालमें वज्रयान-योर तिव्वतमें काल-! महायाघाजय ( स०सी०) साममेद। । चक्रयान प्रचलित है। महाय्य (स० वि०) पूज्य, पूमने लायक। हीनयान और बौद्ध शब्दमें विस्तृत विवरण देखो। महारक्षस् ( स.ली. ) भीषण राक्षम। महायानदेव ( स० पु०) चोन परिव्राजक यूएनचुवंगकी महारशा (सप्रो० ) बौद्ध कुलदेवोमेद । महामतिसरा, 'उपाधि । | महामायूरो, पहासहस्रममहिनी, महाशीतयतो और महा- महायानपरिग्राहक (सं० पु.) महायान-मतावलम्यो । मन्त्रानुसारिणो ये पांच महारक्षा हैं। महायानग्रमास (सं० पु० ) घोधिसत्रभेद । | महारक्षित ( स० पु० बोद्ध आचार्यभेद । । महायानसूत्र ( स० लो०) महायानोंके कुछ सूत्रप्रन्यो- | महारक्त ( स० लो० ) प्रवाल, मूंगा।' '...' महारजत (स० ० ) महरा तन रजतति । १ सुवर्ण, महायाम ( स० ० ) सामभेद । 'सोना। २धुस्तूप धतूरा। ३गृहद रोप्य।"":" महायान्यं ( स० पु०) विष्णु । मदारजन (सको ) रज्यतेऽनेनेति रअ फरणे'ल्युट् महायविनाल (से० पु.) देवधान्यवृक्ष, ज्वारका पौधा।। (भनिदित मिति: या ६२४) इत्यत रसरजगरमा महायुग (सं० लो०) सत्य, त्रेता, द्वापर और कलि इन | सूपसंख्यानं फस्तथ्य" इति काशिकोपरया में लोपः, चारों युगोंका समूह । मानवोंका यह चार युग देवताओं. ! - महश्च तत् रमनश्चेति कर्मप्रा० । १ 'कुसुम्मपुष्प, का पफ युग होता है । युग देखो। कुसुमका फूल । २ स्वर्ण, सोना। महायुत (से० पु०) एक बड़ी संख्या जो सौ अयुतको , महारण (स० पु०).महायुद्ध, पार लगाई। होती है। महारण्य (सं० को )महम् अरण्या हवन, बढ़ा महायुध (सं० पु०) महान् आयुधो यस्य । १ शिव, महा- धन। पर्याय-मरण्यानो, कान्तार । देष। (.नि०) २ महा 'आयुधयुक्त, जिसे बड़ा शस्त्र या ___ 'भविश्य तु : महारयम दया कारपयमात्मवान् । । हथियार हो। । .. ___रामो ददर्श दुद्ध पस्तारणामम मपदप्तम् ॥ (रामायण महायोगिन् (स ) १ श्रेष्ठ योगी। विष्णु । ३ शिव ।। महारत ( फा० खो०) अभ्यास, मक। महायोगी (स0पु0) महायोगिन देलो। . . महारतिपलममोदक (स पु०) 'मादफोपपिपिरोरा महायोगेश्वर (सपु०) पितामह गीर पुलस्त्य आदि । प्रस्तुत प्रणालो-सिद्धिवीजचूर्ण ५ पल, घो४ पल, शण १६ पल, शतावर्गका रस १२.पल, दूध ३२५पस, १... : पितामहः पुप्तस्त्वरच यसिर: पुलवधा। . सिद्धिरस या उसका कादा . ३२०पल, सरोका अमिरारच प्रीत काय च महानृषिः। : दुध ३२ : पल. इन्हें एक साप.मिटा कर ICE .............मायोगेश्वराः स्मृता ॥"..: . . .. करे।। पीछे उसमें मायला, जीरा, मंगला, मोया, Toi. XVII. 48 के नाम ।