पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२१७

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महाराष्ट्र राजसरफारफो भेज देत और घेतनके बदले 'कमीशन' - रुपकों का कष्ट दूर करते हैं। इन चार घेणी के लोगों पाते हैं। को मूत्रधार प्रभृतिके प्राप्त पारिश्रमिकका बाधा मिलता महाराष्ट्रका पलिसमाज भारतके अन्यान्य प्रशोके है। जैसा नहीं है। यहां साधारणतः बढ़ई ( सूत्रधर ) इतिहास। लोहार ( कर्मकार ), महार (डोम) माङ्ग (ये दिन्दुओं महाराष्ट्रदेशका अधिकांश प्राचीनकालमें दएड. में सर्व निम्न णीस्थ और चमध्यवासायी है) कुम्हार फारण्य कहलाता था। सबसे पहले अगस्त्य मुनि (कुम्भकार), चमार (चर्मकार ) परोर ( रजक ), दिध्याट्रिको पार करके इस भयङ्कर भरण्य प्रदेश भाये हावी ( नापित), भर ( पुरोहित ), मौलाना (मुल्ला) यही अपना आश्रम बनाया । उन्दों ने यहां किसी गुरप, कोली (जलवाहक)-पे वारह श्रेणीफे मनुष्य एक प्रधान निशावरको साथ कर जब उस प्रदेशको पल्लिसमाजके प्रधान अङ्ग हैं। पे ग्रामवासी कृपको निर्विघ्न कर दिया, तब यहुनस पिगण भी यहां था की यथासाध्य सहायता करते और वर्ष के अन्तम या फर धस गये। इसके बाद इकोस पार पृथ्योको निः. फसल काटने के समय कृषकोंसे उसका एफ मश पाते क्षत्रिय कर महावीर परशुरामने योरहत्याफे पापसे मुक्ति- हैं। बढ़ई और लोहार कृषकोंके खेतीवारी करनेके लाम करनेके लिए मध्यमेघयका अनुधान और महर्षि सामान विना कुछ लिये ही बना देते हैं। महार प्राम-! कश्यपको सारो पृथ्यो प्रदान कर दी और थाप तपस्या रक्षक या चौकीदारका काम करते हैं। माङ्ग लोग करनेके लिये पश्चिम समुद्र तीरयत्ती कोडणप्रदेशमें रुपको के प्रयोजनानुसार चमड़े की दोरी और जलमोट जा रहने लगे। उनको चेष्टासे धीरे धीरे यह पञ्चल मादि बना देते हैं। इन सब कार्मोके लिए ये प्रत्येक मार्योंके पासोपयोगी यन गया। उन्होंने आर्यावर्त से कृषकसे २० मटिया धान पाते हैं। सिर्फ "मदार' ग्राह्मण ला फर कोकणमैं प्रतिष्ठित किया। बतायुगफे को हो इससे दुगुने पारिश्रमिक मिलते हैं। पल्लि- अन्तमें रघुकुलतिलक रामचन्द्रने दक्षिणापथके भनेर समाजमें इनका स्थान पहला है। राक्षसों का विनाश कर उक्त प्रदेशको निरविघ्न कर . कुम्भकार, धम कार, रजक और नापित ये सब दिया । प्रयाद है, कि उनके राजत्यकालमें अयोध्या. पथाफम मृतपाल, पादुकासंस्कार, वनपरिस्कार और प्रदेशसे ब्राह्मण, क्षत्रिय और पश्यगण ममशः दक्षिणदेत क्षौरकाय ग मामयासी कृपकोंको सहायता कर जा कर बस गये। फसल काटनेके समय उनसे १५ टिया फरफे धान , महाराष्ट्र शब्दको उत्पत्ति पहले पहल किस समय पाते हैं। हुई, इसका निश्चय करना दुरूद है। रामायणमें यह वेग भट हिन्दुको पुरोहिताई करते हैं। यहां सोनार.' सभी जगह दण्डकारायण और महाभारतमें दएडदेश ग्राहाण, धोवी-मोक्षण आदि विभिन्न श्रेणोके ग्राह्मण नहीं', या दएडकराज्य कहलाता है। फोडण प्रदेश महामारत हैं। मौलाना मुसलमानों का यियाहादि काम कराते ' के अपरान्त ( उत्तरकोण ) और गोकर्ण ( दक्षिण- हैं। फुनवी यदि क्षत्रियदेयताको कोई भी पशु यलि. : कोइप) नामसे ममिद था। मार्कण्डेयपुराण, शतिः स्वरूपमें उत्सर्ग करना चाहे तो उसका सिर मौलाना ' सलमतन्त, रत्नकोप, दत्संदिता भादि समीचीन को दो काटना पड़ता है। इसके लिये यह प्रत्येक पशु मन्योंमें महाराष्ट्र और इसके अन्तर्गत कोण, नासिक पर दो पैसे मोर निदस पशुका हदयांश पाता है। जब कोहापुर, धनवासी प्रभृति प्रदेशका नाम मिलता। राक मौलाना मन्स पढ़ कर मांस शुद्ध नहीं कर देता, महाराष्टशफे गाना स्थानों में जो सब शिलाशासन तब तक प्रायः कोई मी मराठा उसे मेध्य नहीं समझता और प्राचीन मुद्रादि मिली हैं, उनके लिगित यियरण • गुरव पत्तेकी पुलिया बना कर अपना गुजारा चलाते । पढ़ कर प्रत्नतत्त्वयित् शा० राम गोपाल माएडार है। कोलि भैसेको पीठ पर पानी लाद कर गांधके : कर महोदयने यह मिदान किया है, शिम्पीसन् ४.० .