पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२२८

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। २०८ महाराष्ट्र "इन यदु गोय गजामोंके समय में हो याधुनिक महा.. मोगको प्रनाको प्रायः निगार जमोन गोगनेको राष्ट्रीय भाग और माहित्यका प्रथम उदप हुमा । इनके इस तरहसे जो लोग जमीन लेने थे, उन्हें गुरुके समर पूर्वदेगीय भाषामें रचित किसी अन्य या कविताका मन शस्त्र ले कर राजाको सहायताले लिपे असा होगा. निदर्शन नहीं मिलता। अति प्राचीनकालमें (०१म पता था। परन्तु पहलेसे संवाद पापे दिना पुर में ताम्दी ) महाराष्टी नामक मारन भागमें सप्तशती उपस्थित होना उनके लिए संभव न होता था। नाफा एक फाय-अन्य रचा गया था। उसके बाद मय समय पहलेसे दिना पर पहुंचा कोई फिमोर भूति, राजशेखर, मारयो आदि पण्डिनोंने संस्टन भाषा पर पात्रमण भोग करता था। कारण ठिप कर पा में अनेक अन्य रचे थे। परन्तु मुकुन्दराजसे पहले प्रच- अचानक आक्रमण करना सब अधर्म समझा जाता लित वजी भाषामें शानगर्भ म्यादिको रचनाको फोगित! मुसलमानोंने इस देनमें मा कर नपान परगीतिका थी, इसका कोई प्रमाण नहीं मिलता। अपलम्बन कियाथा। घर भारतीय राजग भी रामा. यादवयं गीय नरपतियोंने महाराष्ट्र देशके छोटे नोतिके भनुशासनका दलघन पर महाराष्ट्रको समा. छोटे राज्योंका लोप कर एक विशाल महाराष्ट्र माम्राज्य चार देने लापरयाही कर रहे थे। गुसलमाग दरबार स्थापित किया। उनके द्वारा स्थापित एफच्य साम्राज्य में उनके गश्य पर माममण करने के लिये जो गुन मन में यथोचित ढ़ता मानेमे पहले हो सहसा उत्तर भारत समाए होती थी, उनको गोजगी शासी, सोशापर से मुसलमान विप्लयका स्रोत चार यार महाराष्ट्र देश ये इस नरद अपित भवस्याम माकान्त गहोरो । राम पर घेगसे उमड़ने लगा। इसीलिये थोड़े ही दिनों में यह वय राय पर भी दो सय कारणों में या पिपत्ति भा .. साम्राज्य छिन्न-भिन्न हो गया। रामदेय रायफे राज्य. दूरी थी। फालमें हो (१२६२६०) अलाउद्दीन खिलजी ५ हजार सेना कुछ भी हो, रामदय रायको तरको सन्धिमा लेकर पहले तो शिकारफे यहाने और फिर मोरंगलके प्रस्नाय र जाने पर मनाउदोगने अपनी कमजोरियों राजाफे पास नौकरीकी तलाश देवगिरिक पास पहुंचे पर गपाल फरपो तुरन्त ही उसे साकार कर दिया। थे। महाराज रामचन्द्र युद्ध के लिए बिलकुल पी सैयार ग, उन्होंने निर्भय म्यरूप धन ले पार भयरोपणे कर थे, यहां तक कि पहले ये भलाउदोनके कौशलको भी न ले जाने का निश्शाय किया था। इसमें CRITY समन्द सके थे। इस कारण अब अलाउद्दानने समस्मात्, सबके पुरा गरय मतमो मेनामे र पिना देवगिरि पर चढ़ाई को, तब महाराज रामबाहकी तरफसे : उदाराय दयगिरि निकट भा पने। मानिने अत्यन्त व्यस्तताफे साथ किसी तरह घार हजार सेना दुर्गका भयरोध गैका स्यों रहने दिया बल और दुर्गमें ज्यादा दिनों के लिये रसद कहा की गई। सना ले पर गारदेयके पिद मने पर पित मुसदमानाने दुर्ग के बाहरफा सारा शहर भात्राण करके देवगिरिक पास जो पुरा हुमा उममे गुममा लग लूट लिया और दुर्गये, चारों तरफ घेरा मार दिया। परामिताय हो गपे । मनाने गाको मन सुभातुर अलाउदीनने कौशलसे यह अफवाह फैला दी, विधि देखने के लिपे पास ही एक दगा रोटी फिदिलो पादशाहबदो भारी सेना ले कर देवगिरिको यो। उस संगाने भाकर गहमा-गुसनमाinाप जीतने भा रहे . यह सैन्यदल तो उसका माला हिस्सा दिपा। उम माम मसा भाग गोपी है। इस सयरको पा कर रामा रामचन्द्र मो घारापेमें उड़ा दुई पुरसे भामागपा, सिगाराप. उन्होंने मप मुसलमानास विरोध करना स्पर्म समभा को भगाने सोगा कितिको जो मापाठो पो भौर सम्विका मम्ताय किया। यह मा गई। दिनमा मरर मागी , । उस जमाने में प्रारही मदीने पतन पर मंना गाने ता मनवाल को महापनाग मनादाम गर । की परम्पा गी।- मामन्त रामामों पर समीदारों को पात किमा . सैम्पल गठन हिप भूसम्मगि दी जाती थी। राम राप र मEि REAT TITre