पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२४०

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• २१४ महाराष्ट्र । अधिकार जमा लिया और मुगल प्रतिनिधि तथा सर- राज-रक्षाके विषयमें यत्नवान था; किन्तु अदूरदशी सुल...' दार खानखानाको पराजित किया। इसके बाद वह ! तानने अन्यान्य परामर्शदाताओं के अनुरोधसे उसको राज्यके भीतरी सस्कारों और प्रजाके उन्नतिसाधनमें कैद कर लिया। इस कार्यसे निजामशाहीके दूसरे सर... प्रवृत्त हुआ। उसकी प्रजाहितैपिता आज भी उस देशकी दार भी भयभीत हुए। लुखजो यादयराव इससे पहले प्रजाके मुंहसे सुनाई देती है। भूमिको मालगुजारीके | एक बार मुगलोंके पक्षावलम्वन करने पर भी इस समय .. सम्बन्ध में प्रजाके हितके लिये जो सव संस्कार हुए | निजामशाही राज्य-रक्षाको ही चेष्टा करते थे। किन्तु . . । उसमें भी सवाजी आनन्द राय, शिवाजोपन्त, मुत्सुद्दो | सुलतानने सन्देह कर गुप्त सलाह करनेके बहानेसे और सखाराम मोकाशी प्रभृति मरहहे कर्मचारियोंने | बुला कर मरवा डाला। यादवरावके एक युवक पुत्र निजामशाही राज्यको कई तरहसे सहायता दे कर अमर-| थे। ये भी इसी दुर्घटनामें मारे गये। इस घटनासे कोर्ति प्राप्त की है। मालिक अम्वरके इजारा पदपद्धतिका सारी मरहठा-सेना सुलतान पर क्रोधित हो उठी । । । उन्मूलन करनेसे प्रजा अति सुखी हुई। खजाना वसूली लुखजीफे भ्राताने मुगलोंका साथ दिया। उनके दामाद का भार ब्राह्मण-कर्मचारियों के हाथ सौपना हो अम्बर- शाहजी भोसले राज्यरक्षा विषयमें हताश हो कर पूनाके . को उचित जचा था। इन सब नई व्यवस्थाओंसे मजाके चारों ओरके प्रदेशोंको यथासम्भव शीघ्र अपने अधि. सुखी और सन्तुष्ट होने पर मालिक अम्वर मुगलोंके कारमें करने लगे। ये निजामशाहो और आदिलशाही । विरुद्ध शक्तिसवाद करनेमें शीघ्रतापूर्वक समर्थ हुए थे। दोनों राज्यके शासनाधीन प्रदेशोंको हस्तगत करने । इधर जहांगीरने अहमदनगर पर पुनः अधिकार फर लगे। इधर मुगल सैन्यने राजधानी पर अधिकार कर ' लेनेके लिये फिर सैन्य भेजा। इस समय मालिक | लिया । इस समय राजकर्मचारी जो जिस प्रदेशका .. मम्बरने गुजरातके मुगल-सरदार अब्दुल्ला खांको परा- शासन करते थे वे उसे अपने अपने अधिकार में जित किया था। मुगलोंने उस समय भेदसे धीजारपुरके कर स्वतन्त्ररूपसे शासन , करने लगे। इस समय आदिलशाहो सुलतान और गनेक महरठोंको फोड़ कर मरहठे सरदारोंमें कुछ एकताका सवार एओ. था। मालिफ अबरसे अलग कर दिया । नियपाय हो । शाहजी भोंसले इनके नेता थे। जूनानगरमें श्रीनिवास मालिक अम्बरको मुगलों के साथ युद्ध करना पड़ा। नामक एक अमलदार था। उसने शाहजोके साथ मिल फलता मुगलोंने अहमदनगर और उसके समोपके | फर शामगढ़ हस्तगत कर लिया। इसके बाद क्रमशः गाँवों पर फजा कर लिया। इसके बाद शाहजहां सैन्य संग्रह कर सङ्गमनसे अहमदनगर और दौलता. ससैन्य काश्मीर पर चढ़ाई करनेके लिये चला। यह याद तक सारे प्रदेश उसके हाथ आ गये। शाहजीने ' देख मौका पा कर अम्बरने दक्षिणसे मुगलोंको भगा विजापुर राज्यके जिन प्रदेशों को जोता था, उनका पुनय. कर निजामशाही राज्यका उद्धार किया। फिर शाह. | द्धार करनेके लिये विजापुर पतिने मुरारराय, नामक एक जहांके दक्षिण लौटने पर मालिक अम्यरको पराजित ब्राह्मण सेनापतिको अधीनतामें सेना भेजी। इस सैन्य- होना पड़ा। इसके बाद मुगलोंके साथ मालिक अम्बर- दलने पूनाको वहुत क्षतिग्रस्त कर दिया था। . " फा झगड़ा न हुआ। सन् १६२६ ई में अस्सो वर्षको इस समय स्नानजहां लोदी उत्तर भारतमें दिल्लीके उम्र में मालिक अम्बरको मृत्यु हो गई। इसके ऐश्वर्य, | वादशाहके विरुद्ध बलवा कर महाराष्ट्र में भाग भाया । औदार्य, ईश्वरनिष्ठा, सदाचार और न्यायपरताने मरहठों. शाहजी भादि मरहठे सरदार लोदोके साथ मिल गये। फे चित्तको आकर्षित कर लिया था। किन्तु जब शाही फौज दक्षिणमें उपस्थित हुई. तब लोदो- __ मालिक अम्बरके बाद उसका पुत्र फतह खां निजाम को परित्याग कर उन्होंने शाहजहाँकी अधीनता स्वीकार कर शाही राज्यका एकमात्र कर्णधार हुआ। यह पिताको ! लो। फलतः शाहजीको वादशाहकी ओरसे पांच हजारी तरह बुद्धिमान् और फ़ार्य दक्ष नहीं था, तथापि मालिकको मनसबदारी मिली। लोदी अब निजामराज्यमें भागा .