पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२४६

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


. २१८ महाराष्ट्र प्रतिष्ठा करने लगे। उन्होंने तरुण हृदयके असीम तेज- | निजामशाहले राजाको मुगलों ने यिनष्ट कर दिया. म ... पलसे धीरे-धीरे थोड़े हो दिनमें बहुतेरे दुर्गों पर अधि. उसका एक अंश विजापुरपतिमोके मंशमें पड़ा थापूना फार कर लिया। अन्तमें आप प्रकट रूपसे विजापुरके | और सूपा परगना तशा कोकणका कुछ अंश विमापुरके राजाके विरुद्ध खड़े हुए। इस पर विजापुरका सुल- अधीनमें था ।. प्रथमोक्त दोनों परगना सुलतानने तान उनका दमन करनेमें प्रवृत हुआ। इधर मस्तफा| शाहजोको जागीरके रूपमें दिया था। फर्नाटकमें माह सां नामक एक सरदारसे शाहजीका मनमुटाव हो गया। जोफे नियुक्त होने पर उनको पूना और सूपाफा शासन इस कारणसे तथा पुत्रदोषके कारण सुलतानने उन्हें कैद भार शिवाजी पर पड़ा। इन दोनों प्रदेशाको शिवामी- कर लिया और ये तीन वर्ष जेल में रहे। इसके बाद ने नये सांचे में ढाल दिया । शिवाजी क्रमशः नये प्रदेशों. . शिवाजीने मुगलसम्राट्से पिताफी मुक्तिका परवाना | फो जीत कर स्वाधीन महाराष्ट्रको प्रतिष्ठाका मायोजन .. ला कर पिताको कारागारसे छुड़ाया। यह सन् १६५३ | फरने लगे ! . इस पर शियाजीका दमन आवश्यक ई०की घटना है। समझ अलो.भादिलशाहने पारद हजार सैन्योंके माश - इसके बाद भी आदिलशाह शिवाजीका दमन करने- अफजल खांको भेजा। किन्तु उससे कुछ भी माम , . की चेष्टा करता हो रहा । किन्तु सफलता होनेसे पूर्व ही | नहीं हुआ। 'शियाजीके हायसे अफजल मारा गया । इहलोकका उसने परित्याग किया। इसके शासनकालमें और उसको सेना पराजित हुई। सन् १६५६ के विजापुरनगर अत्यन्त विस्तृत तथा सौन्दयपूर्ण हो उठा। दूसरे वर्ष आदिल सिद्दी जोदर नामक एक सेनापति- था। इसके विलासी होने पर भी प्रजा-रक्षामें यह उदा. को उसने शिवाजीका दमन करनेके लिये फिर मेगा। सीन नहीं रहता था। इसके पास ढाई लाख पैदल, ८० किन्तु शिवांजोने कौशल से उसको यशोभृत कर लिया। हजार अश्वारोही और ५०० सौ हाथीसे परिपूर्ण सेना इस पर क्रोधित हो स्वयं आदिलशाहने युद्धपाता की। रहती थी। २० करोड़ रुपया प्रतिवर्ष सरकारी खजाने इस याताके फलसे पाहाल नामक दुर्ग: शिपाशीक में आता था। विजापुरकी एक मसजिदका गुम्बज या हाथ से निकल सुलतानके हारा भाया। किन्तु दुर्गसे शिखर इसके हुक्मसे इस तरह बनाया गया है, कि वैसा शिवाजोके दुर्गम पहाड़ी जगलों में चले जाने पर सुल.. गुम्बज पृथ्वीके किसी हिस्से में दिखाई नहीं देता। इस- तानको लौट आना पड़ा। फी निर्माणकुशलता देखने पर प्रसिद्ध पण्डित फरासन इसके बाद सिद्दी जोदर विद्रोहो हो उठा। जब ने कहा था, कि पाश्चात्य स्थापत्य विज्ञानिकको भी। तक सुलतान इसका दमन मोन कर पाये थे, किमरा इसके सामने हार माननी पड़ती है। येदनूर अञ्चलम भद्रनायक नामक एक जमादारने वलया महम्मद शाहफे याद उसका पुत्र अली (द्वितीय)/ मचा दिया । अलीन उसको भी धमन किया, किन्तु घर' आदिल शाहने विजापुरको गद्दी प्राप्त की। इस कार्यमें | शिवाजीकी शक्ति द्रुत गतिसे बढ़ने लगी। मुगल भी • उसने मुगल-सम्राटको माज्ञा न मानी । इससे राजकुमार / · उनके माचरणसे तंग आ गये थे। उनके विनाश करणे. औरङ्गजेबने दक्षिणके सूबेदारफे रूपमें विजापुर पर के लिये मुगल भीर पठाम अपनी अपनी सेना लेकर आक्रमण किया। किन्तु इस युद्धके समाप्त होनेसे पहले आये। एक ही समय मुगलों की ओर से जयसिंह सपा हो दिल्लीसे शाहजहाँको सांघातिक धीमारीका संवाद। दूसरो ओरसे विजापुर घायसनां शियालीको शक्तिको पा कर चतुर औरङ्गजेब सुलतानसे सन्धि कर तुरत ] चूर करने के लिये-आगे बढ़े। शियामीको प्राणपणसे दिल्लीको रयाना हुमा। चेटा तथा महाराष्ट्रसन्यफे यसीम साहस दिसलाने पर । इस समय मादिलशाहके राजामें दो प्रधान प्रबल भी इस घोर संकटम विजयश्री प्राप्त न कर सके । अन्त- शन ओ'ने प्रबलता प्राप्त की थी। इनमें प्रथम शिवाजी | में शिवाजीने मुगलो से सन्धि पर ली। सन्धिमे होने भोसले और दूसरा मुगलसम्राट् औरङ्गजेय था। जय कहा, कि मैं विजापुरके साथ युद् करने में सहायता दूंगा।