पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२४७

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मेहाराष्ट्र २१६ • फैलतः बिलम्ब न कर मुगलसेना शिवाजीको सहायतासे। फलतः दिलेर खांको असफल हो कर दिल्लीको शरणं विजापुरकी ओर बढ़ी और विजापुर पर आक्रमण होने लेनी पड़ी। 'लगे। अचानक सिर पर शत्रु देख- ओदिल शाहने सन १६८३ ई०में स्वयं वादशाह औरङ्गजेब बहुतेरी युद्धको यथाशीघ्र तय्यारी की। सर्जा खां और खवास फौजोंको ले कर दक्षिण विजयके लिये रवाना हुआ। • ये दोनों प्रधान सेनापति प्राणपणसे युद्ध करने लगे। शिवाजीके पुत्र शम्भाजी पिताको नीति अवलम्बन कर इस विपद्के समय फुतुब शाहके विजापुरकी सहायताके | उस समय विजापुरको रक्षा कर रहे थे। सिकन्दर उस लिये भागे माने पर जासिंहको बार बार परास्त और समय १६ वर्षका था । दरवारमें कोई भी बुद्धिमान मुगल सैन्यको नितान्त जर्जरित होना पड़ा। एक युद्धमें दरवारो न था। अतः जब औरङ्गजेबने विजापुरको घेर • सजो खांकी मृत्यु हो गई। निहत होने पर भी मुगल-! लिया तब समूचे राजाम हाहाकार मच गया। सुलतान सेन्यको परास्त होना पड़ा। दूसरे जयसिंह बहुत कपसे ! सिकन्दर निरुपाय हो कर मुगलसैन्यके शरणापन्न हुए। "मृत्युमुखसे छुटकारा पा कर दिल्लोको ओर भागे। औरङ्गजेबने उसे १ लाख यार्षिक वृत्ति दे कर औरङ्गा- इस तरह अली आदिलशाहने प्राणपणसे अपने राज्य वादके किले में वन्द कर रखा। विजापुरने १६७ वर्ष तक आत्मगौरवकी रक्षा कर १६८६ ई०को १५यों' अफ्ट्टयर- की रक्षा कर सन् १६७२ ई० में इहलोकका परित्याग किया। यह विलासी होने पर भी प्रजाको ओरसे उदासीन नहीं। को मुगलों के हाथ आत्मसमर्पण कर दिया । औरण- रहता था। यह कवि और विद्वानोक आश्रयदाता था। | जेवने सन् १७०१ ई०में हतभाग्य सिकन्दरको विष दे कर इह जगत्से आदिलशाहोवंशकी जड़ उखाद कर . विजापुर दरवारमै मन्त्रियों में परस्पर घोर ईर्ष्या द्वेपं चल फेंक दी। रहा था किन्तु अलोके चातुर्यपूर्ण शासनके फलसे यह कुतुबशाही वंश। 'उनको भमलदारोमें प्रकट न हो सका। शिवाजीके घोर 'विद्रोह करने पर भी उसके पाश्रयमें कितने हो मरहट्ठ। । कुतुबशाही-चंशने गोलकुएडापरेशमे १५१२ से १६८७ सरदार और ब्राह्मणं रहते थें। 7 ई. तक राजा किया था। यह प्रदेश महाराष्ट्र-देशके अन्तर्गत न होने पर भी यहांक सुलतानों के अधीन -re सिकन्दर अलो भादिल शाह इस चंशका अन्तिम रह कर अनेक मरहट्ठा परिवारोंने विशेष उन्नति की थी। राजा था। पिसाकी मृत्युके समय, यह ५ वर्षका था। सन् १७०० ई० में महाराष्ट्र जातिका जो अभ्युदय हुआ, इसोसे मन्तियोंकी ईर्ष्याकी अग्नि भभक उठी और इससे उसके साथ मरहठा-परिवारका घनिष्ट सम्बन्ध था। , राज्यभरमें बड़ी गड़बड़ी मच गई । मस्त्रियों के कलहसे। इस कारण इस राजवंशक सम्बन्धमे कई वातोंका -:शन औको वड़ा लाभ पहुंचा । शिवाजीने पहनाला | लिखना आवश्यक है। दुर्ग पर फिर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया। वह- कुलो कुतुबशाह इस वंशका आदिपुरुष था। यह लोल खाने शिवाजीके विरुद्ध युद्ध कर उन्हें बहुत बाह्मनो मुलतानका सूबेदार और सरदार था। अन्तमें तग किया । खावास खाने कौशलपूर्वक मुगलमूवे., उक्त सुलतानको भोरता देख उसने,स्थतन्त्रताको घोषणा दार बहादुर खांके साथ सन्धि कर ली । यह सन्धि। कर गोलकुण्डामें पृथक एक राजवंशकी प्रतिष्ठा की। -अधिक दिन तक टिक न सकी । पठान सैनिकोंने तैलङ्गक हिन्दू राजाओं के साथ युद्ध कर उनको स्वत. येतन न पाने पर दंगा मचा दिया । मुगल-सरदार । न्नाके अपहरण करने में उसका बहुन समय व्यतीत दिलेर खाने मौका पाकर विजयपुर पर माक्रमण किया। हुआ। किन्तु उस समय तक आदिलशाही राजाको आयु कुछ। उमके छोटे लड़के जमसेद कुनुव शाहको अमल. ओपथी इसीसे शिवाजी विजयपुर दरवारको विशेष धारोमें मरहटोन दरवारमें प्रतिपत्ति लाम को । जमसेदक ‘सहायता दे कर दिलेर खोके विरुद्ध उठ खड़े हुए। सहायक . सेनापतियोंमें जगदेव राव नामक