पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२५

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पल्लट-मल्लभूमि बैठा कर कहा था, 'पुति ! क्या तुम इस लड़के को पति । मल्लतूर्य (सलो०) मल्लेद्यमान सूर्य मल्लाय तृर्य- स्वीकार करना चाहतो हो ? प्रश्न पया था ? यद उनका ! मिति था। पायविशेष, लड़ाईका ईका । पर्याप- 'अपनी पुत्रीका विवाह-प्रस्ताव था । मल्लजीने यह प्रस्ताय । महास्वन् । स्वीकार कर लिया। किन्तु अन्तर्मे यादवरायने इनकार : मल्लदेव (स.पु.) कालशान नामक कन्यके कर दिया। रचयिता। जो हो, इस पर भी यह निरुद्यत नहीं हुए। किन्तु मल्लदेव-दाक्षिणात्यके चेरराज्यके एक राजा। उन्होंने अपने पुत्रका विवाह उक्त रायकी पुतीके साथ २एक प्राचीन हिन्दुनाजा, उमाधिपति राजा अभय . . करनेका निश्चय कर लिया था। इस समय निजाम । देवके पुत्र । ये चन्द्रवंशीय राजा थे। शाहीके सम्बन्धसे इनको अत्यन्त धन-सम्पत्ति हाथ लग: मल्लदेव-मल्लप्रकाश नामक वैद्यकमन्यके प्रणेता। एत- गई। उनको मन में यह भाव उत्पन्न हुआ, कि कहीं। द्भिन्न कालज्ञान और तृतीयज्यराटक नामक दो खण्ड. लोग मम पर सन्देह न करने लगें, इससे अपने धन-, अन्य इनके बनाये हुए मिलते हैं। सम्पतिको ले कर घर चले आये। यहां आ कर इन्दोन मल्लद्वादशी (स. स्त्री० ) प्रतविशेष । प्रचारित किया, कि भगवतीने मुझे यह धन दिया है। मल्लनाग (सपु०) नागो हस्तीय मल्ला, पूर्वनिपातः । मल्लजो ईस धनसे कुपं तालाव खुदवाने लगे, मन्दिर, कामसूत्रके प्रणेता यात्स्यायन मुनि। मल्लो पली- धनवाने लगे। इन्होंने धार्मिक कार्यों में बहुत धन पर्न । यान नागः । २ मनमातङ्ग, इन्द्रके हाथोका नाम । मल्लो- किया। इतने कार्यों में उलझे रहने पर भी यह अपने । । नाग इव । ३ लेनदार, चिट्ठीरसां। ४ कामशास्त्रविशेष । . उद्देश पसे विचलित नहीं हुए। अपने पुत्रका विवाह है . मल्लपुर ( स० लो० ) नगरमेद, मल्लपुर। 'और घुड़सवार-सेनाकी वृद्धि इनका उद्देश्य था। 'निजामशाहीके जैसा ऋणग्रस्त राज्यमें किसी अर्थ मल्लपुर-मान्द्रामप्रदेशके उत्तर-सरकारके अन्तर्गत एक धानका ही प्राधान्य रहना चाहिये। अतएव पाँचहजारी। । प्राचीन नगर । यहांके देवतीर्थादिका सविशेष परिचय ग्रह्माण्डपुराणान्तर्गत मल्लापुर-माहात्म्यमें दिया गया। घुड़सवार सैन्यका अध्यक्ष-पद और राजाको उपाधि "। मल्लभट्ठ- एक प्राचीन चैयाकरण | मल्लिमायने नेपध- 'करने में उनको अधिक प्रयास न करना पला। धीरे धीरे | चरितमें इनका मत उद्धत किया है। भमरा देखो। 'इन्हें सर्वनेरी, चाकन, पूना, सूवा आदि जिलों में जागोर मिल गई और इन मिलों के अध्यक्ष भो नियुक्त हुए। २ मानन्दलहरी-टीकाके प्रणेता। सुलतानको सिफारिससे यादवरावको अपनी पुत्रीका । " मल्लभू (सत्रो० ) मल्लाना भूभूमिः। मलभूमि, पुश्ती लड़ने की जगह, अघाड़ा। विवाह मल्लजोकं पुत्र शाहजोसे करने पर राजी होना 'मल्लभूपत्ति दाक्षिणात्यके एक राजा, मोलन नायक पड़ा। ‘सन् १६०४ ई० स्वय' सुलतानने अपनी उए. स्थितिमें यह विवाह कार्य सम्पन्न कराया । मन्लजी जो पुर्व। १०७ शताडोमें उस्कोर्ण शिलालिपिम इनकी 3 धनागार छोड़ गये धे, उसोसे शिवाजोने अपने समयमै । हा दानशीलताका परिचय देशा जाता है। 'इतना राज्यविस्तार किया था। शिवाजी देखो। मल्लभूम-यङ्गालके बांकुड़ा जिलेफे विष्णुपुररा। एक मल्लट - मेवारराज्यके गुहिलवंशीय एक राजा। । समय यह स्थान विष्णुपुर मल्लराजामों के अधिकार, मल्लणगुन्दि-वीरशेवामृनपुराण नामक अन्धके प्रणेता। । था। विष्णपुर देखा। मल्लतरा (स. पुं० ) पियालक्ष, चिरौंजोका पेड़। मलभूमि (सरलीक) मल्लनां भूमिः त्यानं । मल्ल मोटा माटताल (सपु०) सङ्गोत शास्त्रानुसार एक तालका स्थान, अखाड़ा । पपाय-अक्षयाट, रगभूमि, रणस्थली नाम । इसमें पहले बार लघु और फिर दो दनमावाए मल्लभू, अक्षपाट। ( अदाधर )२मलन नामक देगा। होती है। यह तालकं मुख्य आठ भेदोंमसे एक माना , "अय: पामे पाय: पान सरवनभोजनम् । । । जाता है। शयनं तारुपमे च माझममेरिक गतिः॥" (उपट) ___Vol. xil.0