पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२७

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. मनयुद्ध २३ आमन्त्रित किया था। यथासमय यहां सभी एकन! दांव पेंच आपभमें होने लगे। कोई किसीको पटकता हुए और मल्लयुद्धकी प्रतीक्षा करने लगे। कृष्ण वलराम कोई किसीको खींचता तथा कोई किमीको लात मुक्का भी फंसदूत मकर द्वारा निमन्त्रित हो कर कंसके घर थप्पड़ जमाना भादि एक दूसरेको पराजित करने पर माये। साथ ही नन्द तथा अन्यान्य श्रेष्ठ गोप भी राजा तुला हुभा था। कुछ समय तक युद्ध करने बाद या द्वारा आमन्त्रित हो कर मधुरामें पधारे। राजकर्मचारी | यो कहिये, कि कृष्ण बलरामने उन मल्लोको प्रेल तथा सामन्स राजोंके साथ स्वयं फंस अन्यान्य सरदार- ग्येला कर एक एक करके मार डाला । और तो क्या, के साथ उस अखाड़े के निकट बने सुरम्य मञ्चमें, कंस तथा उसके भाइयोंको भी कृष्णयलराम द्वारा प्राण विराजमान हुआ। विसर्जन करने पड़े थे। ये सब विचार इसी उपलक्षम ____ यथासमय मल्लमेरी वज उठी। अखाड़े के रण | अपने गिय-प्राण गंवा दिये। दुन्दुभिको श्रवण फर पहलवानोंका हृदय धोररसके उमङ्ग- महाभारतमें लिखा है,-युधिष्टिरने जब राजसूप में सराबोर हुआ। सुन्दर वेश भूपासे सुसजित वीर बड़े। यश करनेका सङ्कल्प किया, तब इस कार्यमें प्रधान याधक उत्साहसे अखाड़े में उतर आये। इसी समय कृष्णवल. मगध राजा जरासन्धको मार डालने का विचार हुआ। राम भी मल्लदुन्दुभि सुन कर युद्ध देखनेके लिये तुरंत इस उद्देश्यसे श्रीकृष्ण, भीम पीर गर्जुन वहांसे मगध. यहाँ मा उपस्थित हुए । दुए कंसने इन दो भाइयोंको मार के लिये रवाना हुए। इनका उस समय ब्राह्मणवेश डालनेके लिये उनके पथम-ही एक हस्तीको नियुक्त किया था। कौशलपूर्वक जरासन्धके नगरमें घुस कर उसको था। इन दोनों भाइयोंने उस हस्तीका प्राणसंहार कर युद्ध के लिये ललकारा। पहले जरासन्धने भीमफे साय उसके दोनों दांतको दोनों भाई अपने अपने कन्धे पर बाहयुद्ध आरम्भ किया। यद्यपि जरासन्धने उस दिन उप- धर कर उस अखाड़े के पास आये। उस समय दर्शक- वास किया था, तथापि यह ललकारको सहन न कर सका, मएडली उन धोरोसे द्रष्टि हटा इन दो भाइयों के रूप कार्तिक कृष्ण त्रयोदशीके दिन उपवास रह कर उसने दिन लावण्यको अपूर्व छटा देखने लगो। इसका वर्णन श्री. रात भीमके साथ युद्ध किया । यद्यपि जरासन्ध घोर मदभागवतमें सुन्दरतासे किया गया है। उसका एक युद्धमें धक गया था, तथापि कृष्णको उत्तेजनामें आ कर श्लोक इस प्रकार है- फिर युद्ध आरम्म हुआ। अन्त में जरासन्धको भीमने "मरलानामशनि या नवर: वीणा स्मरो मूर्तिमान इमी युद्धर्म मार डाला। इस युद्ध किसीने भी गस्त्र गोपान स्वजनोऽरातो क्षितिमुजां शास्ता स्थपिनो शिशुः शस्त्र नहीं लिया था, इसलिये यह युद्ध मल्लयुद्ध में परि- • मृत्युभोजपतेपिराइविदुषां तत्स पर योगिना। गणित हुआ। जरासन्धको मृत्युफे बाद उसके सभी

सृष्णीयां परदेवतेति विदितो रगतः सामजः ॥" कैदमानेसे पटुतेरे कैदी राजा मुक्त हो गये।

(भागयत १०४३।१५), प्राचीन पुराण प्रन्धोंमें भी मल्लयुरो और कितने दो कृष्ण बलराम दर्शक हो कर यहां आपे थे। किन्तु, वर्णन पाये जाते हैं। पहले जमाने में मल्लयुद्ध एक प्रधान कसकी साजिशसे उनको उस मल्लयुद्धमें उन वीरोंके युद्ध माना जाता था। इस समय भी भारतवर्षफे कई साथ अखाड़े में उतरना पड़ा। युद्धका बाजा यजा। प्रदेशमि मल्लयुद्ध हुआ करता है। सिवा भारतके ममे. पीरोंका हदय प्रफुल्लित तथा कायरेका हृदय सिहर , रिका, यूरोप, पगियाके अन्यान्य देशमि मी यह युद्ध उठा। मल्लयोद्धाओंके हुंफारसे मेदिनी फाप उठी। होता है। दर्शकमएडलो गौरसे उस समयका दृश्य देखने लगी। यूरोपके प्राचीन समृद्धशादी रोमराज्यमें भी इस पहले पहल चाणूरके साथ कृष्णफा और मुष्टिकके साथ मल्लयुद्ध या पुलीका वहा आदर था। यहाँफे 'कलो. घलरामकी कुश्ती आरम्भ हुई। हाथ हाथसे, पैर पैरसे, सियमा' नामक प्रसिद्ध नाट्यघरमें नाना प्रकारके ऐसी • छाती मूपफेसे परस्पर प्रतिघात होने लगे। रिविध फ्रोडायें दिखाई जा चुकी हैं। इसके सिया कितने ही