पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२९

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मल्लारि-पत्रिका

ऋतु वर्षा और समय रातका दूसरा पहर है। इसका । मल्लाजुंग (संपु० ) राजभेद ।

रंग श्याम, आकृति भयानक गलेमें सांपको माला पहने, ' मल्लासुर-ससुरभेद । इमगे देवादिदेव महादेयके साथ फूलोंके आभूषण धारण किये मस्त्रीक बतलाया गया है। घोर संग्राम किया । ममारि माहारगमें विस्तृत विवरण "शायदात पलितं दधान प्रलम्यकर्णः कुमुदेन्दुवाः । देखो। • कोपरीनयामाः सविहारचारी मल्लाररागः शुचिसान्तमूर्तिः ॥" मलातुर ( स० पु० ) अमुग्भेद । श्रीकृष्णने इसका वध सङ्गीतदर्पणके रागाध्यायमें लिखा है, कि यह राग किया था. इसीसे इसका लारि नाम हुआ है। पड़रागोंमें चौथा है। | मल्लासोमयाजिन्-जीयन्मुक्ति पाल्याण नानक प्रन्यके "भैरवः पञ्चमो नाटो गालारो गौहमान। प्रणेता। देशालय येते पढ़ रागाः मोच्यवे लोकलिश्रुताः ॥" मलाह (१० पु.) एक अन्त्यम जाति । ये लोग नाय मेघमलारिका, मालकौशिक, पटमारी और भाशा- चला कर और मछलियां मार कर अपना गुजारा चलाने घरी ये सय राग मलारसंध्रय हैं। है। धीवर देखो। "मेघमनमारिका मान्तकौशिकः पटगजरी। मलाही (फा०वि०)१ मल्लाह सभ्यन्त्री, मन्नादका। । आशावरीति विज्ञेया रागामजनारसंथया ।" (रागार्णव) (वि०)२ मल्लाहका काम या पद। इस रागका स्थान विन्ध्याचल, वस्त्र फेलेका पत्ता मल्लि ( स० पु०) मल्लते धारयति विज्ञानमिति मल्ट और मुकुट फेलेकी फलिका कही जाती है। इसका अन्न (गर्वधातुभ्य हन । उण ११२७) इति इन् । १ सेन शात्रा. 'धनुष, कटारी और छुरा बतलाया गया है। नुसार चौवीस जिनमि उनीसवें जिनका नाम । इन्? मलारि (सं० स्त्री०) १ रागिणीभेद । फोई इसे वसन्तराग गल्लनाय फहते हैं। जैन शब्दमें रिस्तृत विवरण देखा। को और कोई गेघरागको पत्नी यतलाते हैं। (पु.)२ (स्त्री०) २ मल्लिका । कृष्ण। ३महादेव । ४ ग्रहलाघवयं पक टीकाकार। मल्लि-वर्तमान पाल जाति। पुराणमें यह मालय नाम मल्लारि-१ पृत्तमुक्तावली और मृत्तमुक्तावली तरल नामक विख्यात है। अलेकसन्दरके समय यह जानि मल्लि' दो प्रन्यों के प्रणेता। | फाहलाती थी। २दिवाकर देवके पुत्र । पेगी पिता जैसे विख्यात 'मल्लि-एक नोर्थका नाम । ज्योतिविद् थे। इनको यनाई हुई गणेशस्त ग्रहलाघव मलिक ( स० पु०) मल्यने धार्यतेऽसौ मल्ल इन् स्यायें की रीकाका आज भी लोकसमाजमें भादर है। कन् । १ मलिन चचुचरणयुक्त हस, जिसके तर और मल्लारी (स'० स्त्री०) मल्लार डोप । यसतरागको चोंच काली होती हैं। २ जमींदारों की एक उपाधि । रागिणी। ३ झोलाहोंगी डरको । ४मायका महीना। मनिक देगे। "आन्दोलिता च देशाल्या तांता प्रथममरी। मलिका (स०सी०) मल्लिगेयेति मलिल साथै कन, , . माननारी चेति रागिययो वसन्तस्य सदानुगाः ॥" स्त्रियां टाप । यता मलिन्टस इव शुपत्यान् मदिन- (सीवदामो०) याथै यन्। एक प्रकारका येरा जिसे मोनिया पादने हलायुधने इसे मेघरागकी रागिनी और मोड़ब हैं। संस्थत पर्याय-गुणान्य, भूपदो, गनमार, गुण. जातिको माना है। इसका वरनाम-घ, नि, रि, ग, म, शन्या, शीतमीम, महवल्ली, गौरी, बनमहिका, प्रिया, सौम्या, नारोटा, गिरिजा, मिता, मल्टी, पदपन्नी, 'इसका ध्यान- चंद्रिका, मोदिनी। गुग-कटु, नित, पशुमान, मुम्न- • "गौरी कक्षा कोकिझकपठनादा गीतन्दलेनात्मपति स्मरन्थो। पाक, कुष्ठ, विस्फोटक, पापद्धति, बिर, मनाना, कफ- भादाय योग्या मलिना रुदन्ती मनुमारिता योग्नदूननिता ।", नागरु, उज्या, गृय, वातपिन, अनुयाधि और मावि (पनीवदर्पण) ! नाना। Vol.XII. 7