पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२९०

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


२५८ . पहालया-पहायजातील "येयं दीपान्त्रिता राजन ख्याता पञ्चदशी भुवि । महालोमन् (सं० पु)! शिव। २ पृहहरोमयुन, दस्यां दद्यान चेद्दत्त पितृणां ये महाशये ॥ जिसके बड़े बड़े याल हों। महान्तये कन्यागतापरपक्षे ॥" (तिथितत्त्व ) महालोल (सं० पु०) महदतिशय लोल लोल्यमस्य ।। ५ गृहदालय, बड़ा मकान ।६ पुराणानुसार एक काक, कौआ। (त्रि०) अत्यन्त चंचल । तीर्थका नाम। महालोह (सं० लो०) महदतिरापगुणयन् लोह । श्रय महालया (सं० स्त्री०) महालय स्त्रियां राप । आश्विन | स्कान्त, चुम्यक पत्थर । कृष्णा अमावस्या । इस दिन पितरों के लिये पार्षणध्राद्ध । महावंश (सं० पु०) १ प्रसिद्ध घंश। २ पालि भाषा फरना होता है। जो तर्पण कृष्ण पतिपद्से शुरू होता है। लिखित प्रसिद्ध सिंहलोय राजाका इतिहास । इस यह इसी मदालयके दिन शेष होता है। अन्य में स्थिीसन् ५४३के पहलेसे इस्वोसन १७५७ नका माहालस (स.पु०) अतिशय अलस, बड़ा भालसी। की अनेक ऐतिहासिक घटना लिखी है। पहना महालसा ( सस्त्री०) प्रसिद्ध टीकाकार नारायणको | भिन्न भिन्न प्रकारोंसे रखा गया है। महानामने इसके माता। प्रथम भागकी रचना की है। इस प्रन्यके पद सिंहल. महालिकटभी (सस्त्री०) महान्तः अलयः तेषां फटमी में घौद्धमाधान्य विस्तार तथा धातुसेग युद्धदास आदि आश्रयीभूतपक्षः । श्वेतकिणिही पृक्ष, चिरचिटेका राजाओं द्वारा आतुरालयस्थापनादि और राजनैतिक पौधा। उतिका यथेष्ट प्रमाण मिलता है। महालिङ्ग (सं० पु०) महान् पूज्यतमो विपुलो वा महाशायली-ध्रुवागन्दमिश्र विरचित बंगाल के गल्लालो लिङ्गोऽस्य। १ शिव, महादेव । फोलीन्यका एक सामाजिक इतिहास । "अकरोत् स महार्महालिन महावृपः। | महावश्य ( स० त्रि०) महशोत्पन्न, जिसका जन्म महानिशूनमहती महामाहेश्वरी महीम् ॥" उसफुल में हुमा हो। (राजत० २११३७) महायकाश (स० १०) अतिशय प्रशाश, काफी समय । २ हिमालयस्थित शिवलिङ्गभेद । (लि०)३ वृह- महावक (स० वि०) १ पदत् मुखयिशिष्ट, यहा मुंह- लिङ्गयुक्त, जिसका लिङ्ग पड़ा हो । घाला। (पु.) २ दागयभेद । महालिङ्गयोगी-लिङ्गलीला-विलासचरित्रके प्रणेता । महायक्षस् ( स० पु०) महत् यक्षः यिराम देहो यस्य । १ महालिङ्गशास्त्री-उणादिरूपावलीके रचयिता। महादेव । (ति०) २ गृहद यसोयुका, कोडो छालो. महालीलसरस्पती (सं० स्त्री०) लीलया सरस्वती, महतो पाला। लीलसरस्वती कर्मधा। तान्त्रिकों के अनुसार तारा- महायसकतेल ( स० ० ) तेलापयविशेष । प्रस्तुत देवीका एक नाम। प्रणालो-सफेद सरमों, कर, सप्तरणों, पूतिकरण, "तीमया याकमदा चेखि तेन नीलसरस्वती। हल्दी, दायहन्दी, रसायन, फुटज, मका, गृगाइनो तारानरहिता त्या महाशीलसरस्वती ॥" (तन्त्रमार) (यालककड़ी), लाम्य, सरस, म, अपराजिता, मार• महालुगि-एफ. विख्यात ज्योतिर्विद ! नारायणरत। ग्यध, स्नुहो, गिरोष, नुया, मरकर, यम, कुछ, विका मात्तण्ड पलमप्रन्यमें इनका नामोल्लेख है। मजीठ, लागलो, चिवक, मालती, निमलॉकी, गंधाली, मदालोक (सं० पु.) मर्लोक देखो। मूला, मैग्धय, फरयोग, गृहयूम, थिए, गाम्पिल, सिग्नूर . महालोध्र ( स० पु०) महान् लोध्रः । लोध्रविशेष, सूतिया और गपीपल, परार भाग लेकर जिमना हो पठानी लोध। | उससे दूने गायके मूतमें उसे अच्छी तरह पामे। पांच महालोभ : स० पु०) महान् लोमो यस्य ! १ काक, उसे चौगुने करतील या सरमों. मेलमें काम करे। . फौमा । (नि०) अतिशय लोमो, बड़ा लारची। • इमीको महावत कहते है। इस मलको मालित