पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/२९२

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पहावन-महावादी पालभाचार्य सम्प्रदाय या गोकुलस्य गोसाइयोंका प्रधान | २ शरपुरके एक राजा। अहा होनेसे यह स्थान बहुत कुछ प्रसिद्ध हुआ। गुज- महायरी (हिं. स्त्री०) महायरको धनी हुई गोलो यो रारा था बम्बईयासी समी हिन्दू पणिक इसी संप्रदायके । रिकिया जिससे स्त्रियोंके पैर चित्रित किपे जाते है। शिष्य हैं। अतएव उमयो द्वारा नयप्रतिष्ठित गोकुलनगरी. महावरेदार ( म०वि० ) मुहावरेदार देतो। की शोमा पढाई गई हो, इसमें माश्चर्य हो पया १ यथायं महापरोह (स० पु० ) महान् अमरोहः निफानो भयो। में घालमाचार्यफे अभ्युदयसे. गोकुलनगरीको समृद्धिको ऽयतरण यस्य । लक्षयक्ष, पाकरका पेड़। ... पाल्पना को जाती है । गोकुन और पालमाचार्य देखो। महापर्णभू (मखोर) श्वेतपुनर्नया । .. महायग--हजारा जिलेके पेशावर सीमान्तयसी यागि महायल-एक जैन राजा। स्थान नामक प्रदेशके अन्तर्गत एक पर्वत । यह इसलाम- महायल-गिरनरप्रदेशके अन्तर्गत पर गिरिकन्दर। यह मौलवन के पूरव भोर सिन्धुनदफे दाहिने किनारे अपः गिरमर दुर्गसे आठ कोस पर अयस्थित है। गुजराधि स्थित है। इसकी ऊंचाई समुदपृष्ठसे ७४००, फुट है। सुलतान महमूद विगहा जूनागढ़ और गिरनर दुर्ग जीतने इसका दक्षिणमाग घने जंगलोंसे दका है इसीसे इस की माशाले ससैन्य यहां आये। यहाँके दिरामा पर्वतका महावन नाम दुआ है ।. . . . राय मलिकने अपने बचायका कोई रास्ता न देन दल. ___ यह गिरिरथाला विशेष स्वास्यप्रद है। किन्तु यहां बलफे साथ मदारल पर्वत पर भाकर माध्रय लिगा। दुद्ध अफगान जातिका यास होने के कारण किसीको घदा युयराज तुगलक पाने उन्हें ससैन्य हराया। इसके भी इसके ऊपर चढ़ने का साहस नहीं होता। चारों ओर उशिसर मानों स्यमायतः हद दुर्गरूपमै महायाध (स.हो. ) योगप्रक्रियासे हाप मोर पांयका ! गठित है। यहाँका प्राकृतिक दृश्य उतना खराब नहीं है। वोधना। स्थान विशेष स्वास्थ्यप्रद है। महापप ( स० पु.) महामेध। ... .. .महावल्क (संपु) जातीकरलयक्ष, जायफलका पेड़। महायर (हि.पु.) लापसे बना हुमा एक प्रकारका महायलो (संखो० ) महतो घासी पाली घेति ।। लाल रंग, यापक | इससे सौभाग्यवती नियां अपने माधवीलता। २ उत्तमालना, मच्छी लता। ३ श्वेत पांघोंको चिलित कराती हैं। ला, सफेद फ६। ४ कटुबलिका, फाटकी। .. महावर:-हजारीबाग जिलान्तर्गत एक गिरिधणो। यह महायस (सपु०) महती वसा यार । गिमार, : पूर्वपश्चिममें प्रायः १४ मोल विस्तृत है। पर्वत पर मगर नामक जलसन्तु । चढ़ना बहुत पातरनाक है। किन्तु ऊपरको अधिायका- महायसु (स'० लि.) १ मभूत धगशाली, बटा दौरतमन्द। भूमि प्रायः १ गोल घोहो है। शकरोनदी इस पर्वतके (पु०) २ इन्द्रायणका एफ. गा| ३ रोपवादो पश्चिम को कर यह गई है। यहां कोकलदार नानक मायापय ( समो०) महद्यापर्य। 'सts' ६०० फुट चा एक जलप्रपात है। उस प्रपातफे सामने शङ्कराचार्यजीक मतानुयायियों के मनसे भिर महागि', प्रतियप मेला लगता है। 'तपमसि', 'प्रहानं ग्रा' मार 'अयमारमा प्रा reयादि महावरा ( स० स्रो०) प्रियतेऽसौ यादिभिरिति ए-मन उपनिषद्के याश्य । ३याम माविक समय पढ़ा जान. टाप महतो यरा । १ दूया, दूव। २ मूर्या, मरोहफलो। याला संकल्प। महायरा ( म० पु०) मुहारा देशो। . .. .. . महायात (स.पु.) मतिगर यायु, मोरको दया, महापराह ( स० पु. ) महान विरोऽपि सन् वराहा, तूफान. . . महांश्वासी यराहश्चेति या। बराहरूपो भगवान्। महाबातम्याषि (स.पु.) रोगभेद। . . "महावरादो गोविन्दा गुसेना कनकानदी। महायासम ( , साममेर।। (मारत ARE) महावादी (सं.लि.) पिम्यादी, विषय बोलनेवासा -