पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३००

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महावीरस्वामी ३० वर्ष तक भनेक देशों में इसी तरह धर्मोपदेश करते है। dstrrg योल्डर वर्गकी - Tihe Bankhe" नाRE हुपे विधार किया और सब जगहोंसे हिंसाका प्रचार बन्द | पुस्तक में स्पष्ट लिखा है, कि नातपुस महायोरको कहा कर अहिंसाधर्मका प्रचार किया। अनेकोंने मिथ्यात्व त्याग गया है, कि जिन्होंने निर्मन्य मतका प्रनार किया है। फर मम्यग्ज्ञानका लाम किया। प्रभुको दिव्यध्यनिमें महापौरस्यामीको प्रशंसा साफ्टर रगोन्द्र नाm जो सारगर्मित उपदेश हुमा था, उसको गीतमस्वामी ठापुरने फदा है- गणधरने भाचारांग भादि द्वादश प्रकारकं महान प्रग्धों में | ___OMnhnvira proclaimed in Indin the niessage रया। उन्होंका कुछ अंश आधुनिक प्राप्त प्रन्योंमें उप ot sulration that religion in reality and not n mere social courention:-that. salrntion लब्ध है। comes from taking retuge in thot true religion कार्तिक कृष्णा अमायस्याफे प्रातःकाल प्रमु विहार and not from oheerring the externatorrenmonica - प्रदेश पायापुरीके बनसे शुम्लध्यानपूर्वक चार अघातिया of the community-that religion cannot rogant ary barrier between man and mons in काँका गा कर मुनघाममें चले गये। अपने साध्यको I cternal verits" सिदि. करके परमात्मपदका लाम किया । रोरफो। जिस पयित धर्मका उपदेश धोमहावीरसागाने । छोदते दो क्षणमात शुद्ध आत्माने उसी ही ध्यानाकारको दिया उसके प्रतापमे भारतका बहुत उपकार हुमा है। धारण किये हुये निर्याण-भूमिको मीघ पर हो जा कर यशमें होनेवाली ऐसो पशु-हिसा, जिसमें रनको मदिया लोकाप्रमागमें निवास किया और अनंत कालके लिये यह जाती थी, फिलफुल यंद होगा। इस बात परम सुखी हो गये। प्रसिद्ध तश्या यालगंगाधर तिलशने भो भपने यामा ____ यह स्थान, जहांसे धीमभुने निर्वाण प्राम किया था, ! में स्पष्ट कहा है: - "यश यागादिकाम पशुओं को सम्पूर्ण नियोका अति माननीय और पूजनीय (विहार कर जो 'यार्थ पहिसा' भाजल नहीं होगा . स्टेगनस ६ मील दूर ) पावरपुर ( पायापुर ) ६। उस जैनधर्मने यदीपक पदो भारी छाप (मुहर) प्रामगधर्म प्रामफे बाहर एक पदन् सरोयरफे मध्यमें पफ जिनमंदिर पर मारी है। पूर्ण पालमें यागेलिपे भानगर पाभी. द, जिसमें भगवानको चरण पादुकाएं शोभित है। प्रति को हिंसा होती थी, उसके प्रमाण मेगहतका समागीर वर्ष निर्वाणके दिन ( अर्थात् कार्तिक कृष्णा अमाया भी मनेक प्रन्याम मिला है।" को) यहां पड़ा भारी मेला होता है। बहुत दूर दूरफ जैन-पुराणों में लिया है, कि महावीरस्यामी गर्म अनेक जैनयाती यहां दर्शन पूजनार्थ आते हैं। प्रचारक मास थे. प्रवर्तक नहीं। उनफे पूर्ण भी ग्राम जिस दिन महावीर स्यामोको निर्माण प्रार_g.आ नासे ले कर पानाथ पन्त २३ सादर भी हो था, उसी दिन गौतमस्यामीने फेयलझानरूप लक्ष्मीको गये हैं, उन्होंन गो समय समय पर जैनधर्मका मार प्राप्ति को । उस दिन बड़ी मारी पूजनकी महिमा हुई। और प्रचार किया था। जैनधर्म भनादि। धायकोने नगर नगरम योपोत्सव किया । तमोस दीवाली कुछ मां जैनधर्म में मिलाता है कि गशेप का पद उत्सय प्रचलित है। धीमहावीरस्यामीने अपनी पयिन जीवन हो मामोनिया या साप है और मायुफे ७२ वर्ष भति ही पविलताफे मायमें परम गदिमा उमको मत्यता महिमा हो पिचमान है। जगत्मे धर्म का पालन करले पविताये। मदिसा दो पफ ऐमा uit, जो संसार म ____ महापौरस्यामो ऐतिहासिक मदापुर थे भौर ऐसे प्राणिमासको सुख शान्ति पा सकता है। धर्मके प्रयारक, जो बौद्धधर्मसे मिल था। इसका मामे ५२० वर्ष पदने मगयान मदागीरने गिर्वान प्रमाण पोलोंके प्राचीन अन्य सिपिटक, महायग, मदा प्रकिया था। उमो समय मोका गार निर. परिनिष्यासपमुत, दिग्धनिकार मादि प्रज्यों में मिलता! मयन् प्रचलित मा। १, जिनमें महावीरस्यामीको मानपुत (मालपुर ) लिगा ! ___ " Refini