पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३०५

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पहाश्यापा-महापष्ठी २७१ होता है, तो फिर जन्म मृत्युकी सम्भावना नहीं रहती। , भ्यास रोग। २ मृत्युकालीन चरमश्यास, यह अन्तिम महाश्यामा (स. स्त्री०) महती चासी श्यामा चेति।। सांस जो मरनेके समय चलता है। १ श्यामालता । २ शिशपा वृक्ष, शीशमका पेड़। ३ वृक्ष- | महाश्वासारिलोह (सं. पु०) खांसो दमे आदिको एक पादिवृक्ष । महौषधि । प्रानुन प्रणाली-लोहा ४ तोला, अवरक महाश्रम (स पु० ) तीर्थभेद । यहाँ स्नान करनेसे सब १ तोला, चीनी ४ तोला और मधु ४ तोला, इन्हें तथा पाप नाश होते हैं। त्रिफला, मुलेठी, दाख, पीपल, थेरको आँठीका गूदा, - महाश्रमण (सपु०) महान् श्रेष्ठश्चासौ श्रमणो वौद्ध-' वंशलोचन, तालोशपत्र, विद्या, इलायची, कुट और भिक्षुश्चेति । भगवान् बुद्धका एक नाम । पर्याय-सर्वार्थ नागेश्वर, नामक द्रव्य, इनके एक तोले सूक्ष्म चूर्ण को सिद्ध, फुलिशासन, गोपेश। लोहेकी खरल में अच्छी तरह पीसे। इसको मात्रा आध महाश्रय ( स० पु०) अलोट वृक्ष, अखरोटका पेड। । माशेस २ माशे तक वतलाई गई है। मधुके साथ इस. महाश्रायफ (सपु०) शाक्य वुद्धका प्रधान शिष्या का सेवन करनेसे महाश्वास, पांच प्रकारकी खांसी और महाश्रावणिका (सं० स्त्री० ) महती घासौ श्रयणिका । रक्तपित्तादि रोग जाते रहते हैं। चेति ।। स्वनामख्यात महाक्ष प, गोरखनुण्डी । पर्याय- (भैषज्यरत्नाकर हिकाभ्वसाधि०) महामुण्डी, लोचनो, कदम्बपुप्पी, विकचा. फोड़ा, चोड़ा, महाश्वेत ( स० पु० ) १ अतिशय श्वेत, बहुत साफ ।२ पलया, नदीकदम्ब, मुण्डाख्या, महामुण्डणिका, माता, महाशण पुप्पिका, सफेद चिचड़ा। ३ शुभ्र शर्फराखएड, स्थविरा, लोतनी, भूकदम्ब, अलम्बुपा। इसका गुण- चीनी। उष्ण, तिक्त, ईपत, मधुर वायुमशमक, स्वरवर्द्धक, रेचक महाश्वेतघण्टी ( स० स्रो०) महाराणापुष्पका पेड़। तथा रसायन। ( राजनि०) | महाश्वेता ( स० स्त्री०) महत्यतिशया श्वेता, महान् श्वेतो भावप्रकाशके मतसे इसका पर्याय-मुण्डो, भिक्ष, वर्णा यस्या था ।१ सरस्वती । २ दुर्गा । धावणी, तपोधना, श्रवणहा, मुण्डितिका, श्रवण- ! "श्वेत शुक्ल शियस्थानं यस्माचे हे समागता। शोपिका. थणिका. भगतम्बिका. कदमयपपिका. महाभाव समुत्पन्ना महाश्वेता ततः स्मता" तपस्यिनी । इसका गुण-पाकमें कटु, उणवार्य, ( देवीपु. ४५ भ.) मधुर, लघु, मेध्य, पाण्डु, श्लोपद, अरवि, अपस्मार, ३ कृष्ण भूमिकुष्माण्ड, भुस्कुम्हड़ा । पर्याय- प्लीहा और मेदोरोगनाशयः । (भावप्र०) क्षीरविदारिका, क्षीरविदारी, ऋक्षगन्धिका, क्षीरयलो, महाश्रावणी (स. स्त्री० ) महाशायणिका, गोरखमुण्डो। क्षोरकन्दा, क्षोरिका । ४ श्वेतापरामिता, सफेद अपरा- महाश्री ( स० सी० ) महती थीरिव। युद्धशक्तिविशेष, ! जिता । ५ सिता, चीनी । ६ श्वेत किणिहो वृक्ष, सफेद युद्धको पफ शक्तिका नाम । पर्याय-तारा, ओंकारा, चिवड़ाका पेड़। ७ कादम्बरी-यर्णित हंस नामक गन्धर्य- स्वाहा, श्री, मनोरमा, तारिणी, जया, अनन्ता, शिवा, राजको स्त्रो गौरीके गर्भसे उत्पन्न कन्या। लोकेश्वरात्मज्ञा, खदूरवासिना, भद्रा, वैश्या, नील- महापष्टिक (संपु०) साठो घान । सरस्वती, शाहनी, महातारा, चसुधारा, घनन्ददा, महापष्ठी (स० सी०) महती चासो पष्ठी व महामङ्गल- तिलोचना, लोचना। दालो पष्ठी वा। दुर्गा। ये चालकको रक्षा करती है महाश्रुति (सपु० ) गन्धर्वभेद । इसलिये इनका महापष्टो नाम पड़ा है। महापष्ठीकयच महाश्व ( स० पु०) श्रेष्ठ अश्य, वड़ा तथा सुन्दर घोड़ा। लिख कर बालकके दाहिने हाथमें बांधनेसे उसको सारी महाश्वशाला (स' स्त्री०),राजाको अभ्यशाला या अस्त विपद दूर होती है। पल । । कवचका मन्त्र,-"ओं दुदुदु दुर्गे दुर्गे नाशय.. महाश्वास (स.पु) १ श्वास रोगमेद, एक प्रकारका माशय हन हन दह दर्द मय मय यध वध 'सर्च हिसाब .