पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३०७

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पहासमाप्त-महासारीय २५२ महासमात (सपु०) अत्यू संख्याभेद, एक बहुत । जाबालके मतमे सात दिनमें होनेवाला एक बत। इस बड़ी संख्याका नाम। प्रतका अनुष्ठान करने में पहले दिन गोमूत, दूसरे दिन महासमुद्र (स० पु०) महासागर । गोवर, तीसरे दिन दूध, चौथे दिन ददो, पानवें दिन घो, महासम्मव (सपु०) जगभेद । छठे दिन कुशोदक पान और सातवें दिन निरम्नु ( विना महासम्मत (सं० त्रि०) १ अतिशय सम्मानित, वड़ा पानी पी कर ) उपवास करना होता है , यह व्रत बहुत भादरणीय । २ वौद्धमतसे वर्तमान युगका प्रथम | कप्टसाध्य है। प्रायश्चित्तविवेकमें लिखा है, फि जो धरणीश्वर। | व्रत सात दिनमें शेष होता उसे सान्तपन और उससे महासम्मतीय (सपु०) वौद्धसम्प्रदायभेद। । तिगुने अर्थात् इकोस दिनमें शेष होता उसे महासान्तपन महासम्मोहन ( स० वि०) १ अतिशय मुग्धताकर, बहुत कहते हैं । जहां सात दिनमें महासान्तपन पतलाया गया मुग्ध करनेवाला। (फ्ली) २ तन्त्रभेद । है वहाँ सान्तपन दो दिनमें और जहां सात दिनमें सांत- महासरस्वती (स० स्त्री०) श्रेष्ठा सरस्वती। पन कहा है वहां महासालपन इक्कीस दिनमें शेष होता महासरोज (स० क्ली०) एक बहुत बड़ी संख्याका नाम।। है। यह महासान्तपन व्रत करनेसे भारोसे भारी पाप दश निखर्व का एक पद्म और दश पद्मका एक महापद्म | नष्ट होता है। अशकोंके लिये छः धेनुदान महासान्त- होता है। पन व्रत करनेके समान फलदायक है।* सान्वपन देखो। महासर्ग ( स० पु० ) महांश्चासी सर्गश्चेति । जगत्को महासान्धियिमहिक (स'० पु०) महाश्वासी सान्धि. वह रचना जो मदामलपके उपरान्त फिर होती है। विप्रदिकश्चेति। राज्यका शान्तिस्यापक और युद्धका महासन (सपु०) महांश्चासी सजश्व । १ असन-' व्यवस्थापक सचिव वा मन्त्री। घ.क्षभेद, पीतशालका पेड.। २ पनसक्ष, कटहलका महासामन् (संपली०) सामभेद । पेड. महासामन्त (सं० पु० ) सामन्त प्रदेश के अधीन राजा । महासर्प (स.पु.) १ फणवाला साप ।२ सामभेद । ' महासामराज (सं० पली०) सामभेद । महासह ( स० पु०) सहते इति सह-अच, महान् सहः। महासार ( स० पु० ) महान सारः स्थिरांशो यस्य । कुलकय क्ष, वाणपुष्प । । दुष्प्रदिर, एक प्रकारका बेर । महासहस्रप्रमई (स० पु०) १ वौद्धदेवताभेद । २ वौद्ध- महासारथि ( स० पु.) १ अरुण। २ ए सारथि । सूत्रभेद । महासहस्रप्रमर्दिनो ( स०सी०) महासहस्त्रप्रमई देग्यो। "पृथक सान्तपने व्यैः पड़हंसापवासकः । महासहा ( स० स्रो०) महासह स्त्रियां टाप । १ माप-1 सप्ताहेनैव कृच्छोऽयं महासान्तपनः स्मृतः ॥ पणी, जंगली उडद । २ मग्लानब क्ष, इमलीका पेड़।। एतत् सप्ताहसाध्यं जायाप्तः- महासांख्यायन ( स० पु०) महासाबका गोलापत्य । गोमूत्र गोमय जोर दधि सपिः युशोदकम् | महासांघिक (सपु०) बौद्धसम्पदायमेद। एकैफ क्रमशोऽश्नीयादहोरात्रमभोजनम्॥ महासागरमभागम्भोरघर ( स० पु.) गरुड़ोंके पक राजा कन्छः सान्तपनो नाम सर्वपापप्रणाशनः। का नाम। एकैकमेतदेव हि पिरात्रनुपमोजयेत् ॥ महासाधनभाग (सं० पु०) १ राजकार्यका प्रधान ।। यहचोपरसेदन्त्य महासान्तपने विधिः। (Executive minister or officer ) २ प्रधान मन्तो ।। एप सप्ताहमाध्या सान्तपनमुत्ता एकविंशति दिनसाध्य गहा- महासाधु (स.नि.) बड़ा साधु । सान्तपननुक्तम् । महासान्तपने धेनुपटकदानसमम् । जायालोक्त. महासाध्यो (स' स्रो०) महासती, पतिता। महासान्तपन एकविंशतिर्दिनमध्यत्येन सप्ताहणाध्यसान्तपनान मदासान्तपन (सली . ) महत् सान्तपनं । प्रतविशेष, ! महासान्तपनेधेनुपटकं देयम् ।" (प्रायश्चित्तविक ) Vol. XVII, G9