पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३०९

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पहासुदर्शन-महाहनु २७५ तरह इसमें भो सभी गन्धद्रव्यको शोधन कर लेना । जब यह रोग होता है तब आदमी सात दिनों के अन्दर होगा। इसके व्यवहारसे विविध पातव्याधि नष्ट | मर जाता है। इसका दूसरा नाम महामुपिर भी है। होती हैं। मुखरोग देखो। ऊपर कहे गये करकसे दूना फलक ले कर तेलमें पाक | महास्कन्ध (स० वि०) महान् स्कन्धोऽस्य । १ वृहत् करनेसे लक्ष्मीविलास तेल बनता है। स्कन्धयुक्त, बड़ी गरदनवाला । २ उष्त. ऊट। महासुदर्शन (स.पु. ) चक्रवतीराजभेद । महास्कन्धा ( स० स्त्री० ) जम्बूवृक्ष, जामुनका पेड़। महासुपर्ण ( स० पु.) पक्षिभेद । (सतपत्रा० १२।२।३।७) मदास्कन्धिन (सं० पु०) अष्टपदविशिष्ट जन्तुमेद, रिहो। महासुर (सपु० ) दानवभेद, एक दानवका नाम। महास्तूप (सं० पु० ) योद्ध स्मृति-रक्षित मंदिरके भाकार- महासुरी ( स० स्त्री० ) महादेवी दुर्गा । का ऊंचा स्तूप। महासुहय (सं० पु०)श्रेष्ठ अश्व, बड़ा घोड़ा । २ एक महास्तोम (स० वि०) स्तोमयुक्त । - भूपि । महास्त्र (सं० पी० ) अनविशेप, बड़ा अन । महावत (सपलो०) १ वैदिक महास्तोत्र । (९०)२/ महास्थली ( स० स्त्री०) स्थल ( जानपदकुपडगोलेत्यादि । ऋग्वेदके दशवें मएडलके एक अपि और उनका १-१२८/ पा ४११०४२) इति डोप महती स्थली। १ पृथ्यो। २ सूक्त । श्रेष्ठ स्थान, बहुत सुन्दर स्थान । महासूम ( नि०) महाश्चासौ सूक्ष्म । अतिशय सूक्ष्म, | महास्थविर ( स० पु०) बौद्धभिक्ष । बहुत वारीका महास्थान (सं० लो०) ऊंचा और मुन्दर स्थान । महासूक्ष्मा ( स० स्त्री० ) मदतीय सूक्ष्म । पालुका, महास्थानमात (सं० पु०) वोधिसत्यभेद । चालू। महास्थाल (सपु०) पक्षभेद । महामचियूह (स० पु० ) व्यूहभेद, युद्ध के समय सेना मामा महास्नायु (सपु०) महती स्नायुः। यह प्रधान नाड़ी रखनेकी क्रियाविशेष। जिसमें रक्त वदता है। इसे फंसरा या अस्थिबंधन नाड़ो भी कहते हैं। महासूत ( स०पु०) रणंवाधभेद, प्राचीन कालका एक 'प्रकारका याजा जो युद्ध क्षेत्रमें बजाया जाता था। महास्नेह ( स० पु०) छदिरोगकी एक दवा । महास्पद ( स० वि०) महान् आस्पदो यस्य महाप्रभाय महासेतु ( स० पु० ) १ बृहत् सेतु. बड़ा समुद्र । २ शालो, यड़ा वलयान् । एक प्रकारका मन्त । | महास्मृति (सं० स्त्री०) १ चिरप्रवलित याश्य, किंवदंती। महासेन (मपु०) महतो सेना यस्य । १ कार्तिकेय । २ दुर्गा। महती सेना अनुबरोऽत्य । २ शिव ! ३ महासेनापति, महाम्रग्थिन् (सं० पु०) महती सम् अस्थिमोला-सा बहुत बड़ा या सबसे प्रधान सेनापति । ४ वृत्ताई त पितृ- अस्त्यस्येति विनि। महादेव । विशेष.५ एक राजाका नाम। (नि.)६ विपुल | महावन (संपु०) महान् स्वनःशब्दो यस्य। १मल. सैन्यविशिष्ट, पड़ो सेनावाला ! सूर्य, लवाईका डंका । २ हच्छन्द, जोरका शम्म । (वि०) महसेननरभ्यर (सं०३०) अम अर्ह तके पिता । | ३ वृहन्मदविशिष्ट, जिससे भारी गन्द होता हो। ४ महासमा (स.स्त्री०) विपुल सैन्य । असुरभेद। महासेनाव्यूहपराक्रम (सं. १०) यक्षराजभेद ।। महास्वर ( स० वि०) १ उश स्वरयुक्त, धडा शन्द करने. महासोम ( स० पु०) सामभेद। याला। (पु०) २ उच्च स्वर, जोरफी आवाज । महासौपिर (सं० पु०) दस्तोटगत रोगविशेष, दांतका एक महास्वाद ( स० पु. ) स्वादु, मुमिष्ट । प्रकारका रोग । इसमें दांतोंके मसूड़े सड़ जाते हैं महाईस (सं० पु० ) १६सभेद । २ विष्णु । . धीर मुहमसे यहुत दुर्गन्ध माती है। कहते हैं, फि ! महाहनु (म० पु०) माहतो धनुर्यस्य । १ गिय, महादेय ।