पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३१

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मचिनाय--मल्लोत २७ मंलिनाथ-१ एक प्रसिद्ध टीकाकार । इनका असल नाम | मल्टीकर (स० वि०) अमलमपि आत्मानं मलमिय कोलाचल मलिनाथ था। लेकिन लोग इन्हें पेडमट कहा करोतीति स-मच्। चौर चोरी करनेवाला। फरते थे। पेह मट्ट नामसे मालूम होता है, कि ये दाक्षि मल्लीनगर-प्राचीन नगरभेद।। णात्यके रहनेवाले थे। ये ध्याकरण, काथ्य, अलङ्कार, छन्द, मल्लु ( स० पु० ) मल्लुते मयं धारयतीति मल्लु-याहुल. अभिधान, नीति, ज्योतिष, स्मृति, दर्शन, वेद, उपनिषद | कात् उ। १मालुक, भालू । २ घंदर। मादि सभी शास्त्रों में पारदी थे। आज कल भी लोग | मल्टूर ( सं० पु०) मण्डूर, लोहकिट, लोहमल। इनके नामको दोहाई देते हैं। जर कमी कोई विचित मल्लेश्वर-गोदायरी जिलेफे अन्तर्गत एक ग्राम । यह छटामय विषय देखने में आता है, तब शिक्षित व्यक्ति कहा तनकृसे ५ मील दक्षिण-पूर्वमें भपस्थित है। रेहावंशीय करते है, कि यह मालूम होता है, मानो मलिनाथकी राजाओं के शासनकालमें (१३१८ से १४२७ ई०) यहां टीका हो। एकपुरानी घेदोके ऊपर मन्दिर बनाया गया है। मन्दिर अमरपदपारिजात नामक भमरकोपटीका, उदारकाथ्य, ' में एक गिलालिपि उत्कीर्ण देखी जाती है। एकायलोरीकातरल, किरातार्जुनीय अन्धको घण्टापथ ! मल्लोत-हिमालयश्रेणी लवणशैल पर अवस्थित एक नामक टीका, कुमारसम्मवकी सीवनीटीका, तार्किक प्राचीन नगर। रावलपिएडी माणिषपालको घूम कर रक्षाटोका, जीवातु नामक नवधीय टीका, सोयनो। इस नगरमें आना होता है। प्रततस्थविद् डा० फनि- नाम्नी मेघदत और रघुवंश टीका, रघुयोरचरित और हम इसे चीन-परिग्राजक यूपनचुयङ्ग यर्णित सिहपुरकी सर्वङ्कमा नाम्नी मेघदूत और रघुवंश टोका, रघुवीर- राजधानी यतला गये हैं। चित और सपा नानो शिशुपालयघटीका प्रभृति फन्दार काहरसे 8 कोस दक्षिण-पूर्व तथा फेतस इनके यनाये हुए काव्य, महाकाव्य और खण्डकाध्यकी नामक स्थानसे मील पश्चिम एक गिरि पर टीका मिलती है। मल्लोन नामक दुर्ग मौजूद है। कहते हैं, फि मल्लुराज २एक प्राचीन हिन्दूराजा। ३ कलातम और वैद्य- नामक किसी जजुदा सरदारने इस दुर्गको बनवाया था। रत्नमालाके प्रणेता। ४ शब्देन्दुशेखर और लघुशब्देन्दु किन्तु किस समय यहां उजुहा जानिकी प्रधानता थी शेखर नामक ग्रन्धको टीकाके प्रणेता। ५एक जैन तीर्थ ! सो टोक टोक मालूम नहीं। गजनीपनि महमूदने जय दूर । मलिनाथपुराणमें इनका विषय आया है। भारतवर्ष पर चढ़ाई को उस समय जुजहाजातिने इम: जैन शब्दमें विस्तृत विवरण देखा। लाम धर्म अवलम्बन किया था। अतपय महमूदसे मल्लिमी ( स० स्रो० ) अतिमुक्तक पुष्पवृक्ष, माधयो. पहले मल्लूके राजत्व और मल्लीत नगरकी श्रोरधिकी लता। कल्पना की जा सकती है। मल्लिपन (सं० लो० ) मल्ले परमिव पत्र यस्प । छन्त्रक, प्रायः आठ सदी तक विधर्मी मुमलमान राजामौके खुमी। हाथमें पड़कर मल्लोत नगरने अपनो श्रोगदिनी दी। मलिमार (सं० फ्लो०) स्थानभेद, मलबार देश। भाज भी यहां हिन्दू प्रधानताके निदर्शनसरूप एक देय. मलिराय होल फर-मल्हारराय होल करके पीन। ये मन्दिरका ध्यसायशेष दृष्टिगोचर होता है। उसका पितामहको मृत्युके बाद सिंहासन पर ये सहो, पर गटनकार्य काश्मोरदेशीय मन्दिरादिनिएका सा अधिक दिन तक राज्यमुम्बका भोग न कर सके। उनके दिखाई देता है। मन्दिर, जो प्रतिमूर्ति है उन्हें देखने मरने पर राजमाता अहल्याबाईफे साथ दीयान गवाघर से मालूम होता है, कि एक समय यहां ग्राण्यधर्म की यशोयतका विवाद पड़ा हुआ। | प्रधानता थी। कहते है, कि पहले उत्त मन्दिर महादेव माली (सं० सी०) मलि पदिकारादिति पक्षे छोए । १ को मूर्ति भो विराजतो यो। चीन परियातक यूपन . मल्लिका । २ सुन्दरी प्रत्तिका एक नाम । ! चुवन एक स्तूपका उल्लेख कर गये हैं।