पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३१७

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महिप-महिपकन्द 'उसमें वश्यताका विद बिलकुल दिखाई नहीं देता। जा कर उसने घोड़े को विदीर्ण कर उसकी हड्डीको गुस्साने पर यह फभी कमी आदमी पर टूट पड़ता है। चूर्ण वर्ण और मांसपिएडको खण्ड खण्ड कर डाला। उस समय यदि वह पासवाले पेड़ पर भी चढ़ जाय, तो महिपका मांस खानेगे उत्तम और सहन्धयुक्त होता भी उसके क्रोधसे बच नहीं सकता। लाल लाल अखेिं । पुढे महिपका मांस उतमा उपादेय नहीं है जितना किये यह जंगलो मैं सा पेड़के समीप आता और अपने शिकार इस मांग तरह के खिलौने और सींगोंसे उसे उखाड़नेकी कोशिश करता है। कंगद्दी गादि काम आने लायक अनेक घन्तु पनाई इसके सींग साधारणतः लम्बे और किसो विसीके । जाती हैं। टेढ़े भी दिखाई देते हैं। भरना भैंसा जगलमें दल २श्मश्रुधारो म्लेच्छजातिविशेष। यह जाति पहले बांध कर विचरण करता है। इसकी लम्बाई १०॥ फुट ! । क्षत्रिय थी, पोछे जर सगरराजने इन्हें वेदादिमें अधिकार और ऊंचाई ६ फुट होती है । पालत महिपको अपेक्षा यह । महो दिया, तब यह दूसरा वेश धारण कर म्लेच्छ हो अधिक बलवान होता है। यहां तक कि किसी किसी गई है। समय इसने क्रोध ना कर बाधिक बलशाली हार्थीको "गरस्तां प्रतिशाच गुरोर निगम्म च । भी मार डाला है। धर्म जघान तेपो ये वेशान्य त्वचकार ह॥ ___यह शरतकालमें सक्षम करता है। इस समय नर महिप कुछ महिपियोंको ले कर एक एक खतन्न दलमें गई कानां शिरको मुगडयित्वा व्यसनं यत् । जानानां शिरः सर्व काम्पोजानो तथैव च। हो जाता है। मेधुनकाल में यह बहुत डरायना दियाई देता है। महिपो १० मास गर्भ धारण करके अन्तम पारदा मुक्तकेशन पहनाः श्मश्रुधारिणः । नि:स्याच्यावपटकागः कृतास्तेन महात्मना ।। एक या दो बच्चे जनती है। पालत महिष जगली। कोलिसाः समहिषा दाभोताः सकेरना। महिपसे एक तिहाई छोटा होता है। दोनों जातियो महिप शिवचनाद्राजन सगरण महात्मना !" घास लता आदि खाना पसन्द करते हैं। कीचड़ हो । इसके रहनेका प्रिय स्थान है। मलेरिया-प्रधान आदि (प्रायश्चित्त तत्त्व ) स्थानों में रहनेसे इसके शरीर में किसी प्रकारका लक्षण्य ३ मदिपासुर। इसे दुर्गादेवोने मारा था | महिषासुर नहीं दिखाई देता । मेनिला ( Manila) देशीय महिप- देखो। ४ अर्हनका ध्वजविशेष। ५ देवगणमेन, निरुक्त को एक स्वतन्त थोकम शामिल किया गया है। के मतसे माध्यमिक देवगण। ६ कुश द्वोपस्थित पर्वत- दक्षिण अफ्रिकाके Buvalus Cutler-को आकृति विशेष, भाकण्डेयपुराणानुसार पुश द्रोपको एक पर्यंत- भारतीय महिपसे नदी मिलती। इनके रोग बहुत छोटे । नाम । , कुशद्रोपका वर्ष विशेर, कुशदीपफे एक वर्षका होते हैं। ये दल बांध कर जंगलके समतल क्षेत्रमें नाफ। ८ अग्निविशेष, एक अग्निका नाम । ६ कृता- घूमते हैं। एक एफ दलमें पांच छः सौ महिपसे कम भिषेक भूपाल, यद राजा जिसका अभिषेक शास्त्रानुसार नहीं होते। शत्रुको नजदीक,माते देश पे पहले उसे किया गया हो। १० देशमेद, एक प्राचीन देशका नाम । अच्छी तरह देख लेते, पीछे सत्त घांघ कर उसके पोछे । ११ अनुवादका पुनभेद, अनुवादके एक पुत्रका नाम । १२ पड़ते हैं। शत्रु से घायल हुमा महिप बहुत जोरसे, साध्या पुतका नाम । चीत्कार करता हुआ उस पर टूट पड़ता है और जब तक महिपक (स० पु.) एक वर्णसंकर जातिका नाम उसकी जान नहीं ले लेता तब तक लौटता नहीं। थुन- महिपकन्द (स.पु.) महिपाख्या प्रसिद्धः कन्दः । महा- पर्गका प्रमण वृत्तान्त पढ़नेसे मालूम होता है, कि इस कन्दविशेष, मैसा कंद। पर्याय-शुम्रालु, टुलापफन्दा प्रकारका एक पौफनाक महिप एक बार अपने आक्रमण- शुक्रुकन्द, महिपोकन्द। इसका गुण-कदा कारो पर, जो घोड़े पर सवार था, दूर पड़ा। समीप फफ, वातनाशक, मुखजात्यहर, रवियर।