पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३२३

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पहीतट-महोपाल २५५ । (कि० ) ३ भूमिजातमाल । | महीधक (सं० पु०) १ एक राजामा नाम । महोध्र, ‘महीतटे (सं० क्ली०) जनपदभेद । महोघर । महीतपत्तन (स' क्लो०) स्थानभेद, एक नगरका नाम। महीन (हिं० वि०) १ जिसकी मोटाई या घेरा बहुत ही महीतल (सं० क्ली०) महाः तलम् । मूतल, पृथ्वी। कम हो। २ जिमके दोनों ओरके तौके धीच बहुत कम 'महीदत्त-पालविवेक नामक ज्योतिग्रन्थके रचयिता। । अन्तर हो, वारीक। ३ जो बहुत कम ऊंचा या तेज हो, महीदास-१ भाष्यकार महीधरका एक नाम। २ चरण-, घीमा। व्यूहभाप्यके प्रणेता। ३ ताजकमणि, मणित्य, वर्षफल महीन (सं० पु०) राजा, महीपति । पद्धति और लीलावती टोकाके रचयिता। इन्होंने १५८७, मदीनगर-महीनदी-तीरस्थ एक प्राचीन नगर। ई०में लोलावतो टीकाको रचना की थी। महीना (हिं० पु०) कालका एक परिमाण जो घर्ष के मदीदासभट्ट (सपु०) भाष्यकार महीधरका नामान्तर। बारहवें अंशके यरावर होता है। माग देखो। महोदेव ( स० पु०) १ सूर्यवंशीय एक राजा । इनको राज- महोनाथ (सपु०) मह्याः नाथः । पृथिवीपति, राजा । 'महोप (सपु०) महीं पाति पा-क। १ पृथिवीपति, धानी पुष्पपुरमें थी। २ ब्राह्मण। .. राजा। २ एक अभिधानिक ।। महीधर (सं० पु० ) १ विष्णु। २ पर्वत। ३शेषनाग । महीप-१ सोमपके पुत्र, एक अन्यका। इन्होंने अने. ४ वी के अनुसार एक देवपुत्रका नाम । ५एक अर्णिक ____फार्थ तिलक वा नानाथरत्नतिलक और शदालाफर वृत्तका नाम जिसमें चौदह वार ममसे लघु और गुरु नामक दो अन्य वनाये। वासवदत्ता शिवरामने इनका भाते हैं। नामोल्लेख किया है। २ वघेलवंशीय एक राजा। महीधर-१ एक प्राचीन कधि । २ हजातक विवरणफे महीपनारायण-१ याराणसीके एक राजा । १७८१६०. प्रणेता। ३ मगधवासी एक प्राचीन कवि। ये राजा की १४वीं सितम्बरको टिश सरकारने उन्हें एक सनद पर्णमान और रुद्रमानके समय १०५६ शकमें मौजूद थे।। दो धौ। ४ विख्यात दीपिकाकार। इन्होंने याजसनेय-संहिताके महीपतन । संको) महाः पतनं । सामाङ्ग प्रणिपात, वेददीप' नामक भाष्यकीरचना कर अच्छी प्रसिद्धि पाई।। झुक कर प्रणाम करना। ये रत्नाकरके पौत्र तथा रामभकके पुत्र थे। वाराणसी महीपति ( स० पु० । मह्याः पतिः। पृथ्वीपति, राजा । धाममें रह कर इन्होंने केशयमिश्रके पुत्र रत्नेश्वर मिश्रसे महीपति- पञ्चसायके रचयिता। २ वनपलीके विद्याशिक्षा प्राप्त की। इन्होंने अभुतवियेक, ईशावास्योप. चूडाममागीय एक सामन्तराज ! निपनाप्य, एकाक्षरकोप, कात्यायनगृह्यसूत्रभाष्य, कात्यायन महीपति उपाध्याय--एक प्राचीन कपि । यीन्द्र चन्द्रोदय शुन्यसूत्रमाष्य, नृसिंहपटल, पुरुषसूक्तको टीका, मातृका । में इनका नामोल्लेवह। क्षरनिघंटु या मातृकानिघंटु, योगवाशिष्टसारवियति, राम-, महीपतिमएडलिक-एक प्राचीन कवि । गोताको टोका, पद्मपभाष्य, पढ़गपदभाप्य, सारस्वतः । मदीपद (स.पु०) किचुलुक, केचुआ। प्रक्रियाको टोका और सीलामणिविनियोगसूतार्थ नामक महीपाल ( संपु०) महीं पालयतोति पालि-अण। १ बहुत-से,अन्य वनाये। इसके अलावा इन्होंने १५६० और राजा । १५८६ ई०में प्रमशः विष्णुभक्ति कल्पालता-प्रकाश तथा "नीरत्ताच महोपाल रक्तपीजो महामुरः॥" मन्त्रमहोदधि और नौका नामको टोका लिखी । ५, (मा०पु० ८८६) सहाद्रिखएड-चर्णिन एक राजा। २१. राज्ञाका नाम। महीध (सं० पु०) महों घरतोति धृ-क। १ पर्यंत । २ महीपाल- पालयंशीय एक गोदाधिपति । पामरान, पृथ्वीफे उद्धारकर्ता। । देखो। सह्याद्विखएड-णित दो राजे। ३ रासपूतानेका Vol. ITIl, 72