पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३२५

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पहीतर-महोपाल , (कि० ) ३ भूमिजातमात्र। | महाधक (सं० पु०) १ पक राजामा नाम। महोध, • महीतरी (सं० क्लो०) जनपदभेद । मझोघर । महीतपत्तन (सक्लो०) स्थानभेद, एक नगरका नाम । ! महीन (हिं० वि०) १ जिसकी मोटाई या घेरा बहुत ही महीतल (सं० क्ली०) महा: तलम् । भूतल, पृथ्वी। कम हो। जिसके दोनों ओरके तलोंके धीच बहुत कम महीदत्त-पालविवेक नामक ज्योतिन्यके रचयिता। । मन्तर हो, वारीक। जो बहुत कम ऊंचा या तेज हो, महीदास-१ भाष्यकार महोघरका एक नाम । २ चरण- धीमा । व्यूहभाप्यके प्रणेता। ३ ताजकमणि, मणित्य, वर्षफल , महीन ( सं० पु०) राजा, महीपति । पद्धति और लीलायती टीका रचयिता। इन्होंने १५८७, मदीनगर-महीनदी-तीरस्थ एक प्राचीन नगर। में लोलावतो टीकाको रचना की थी। महीना (हिं० पु०) कालका एक परिमाण जो वर्ग के महोदासमट्ट (स० पु०) भाष्यकार महीधरका नामान्तर । बारहवें संशके यरावर होता है। माग देखो। महीदेव ( स० पु०)१ सूर्यवंशीय एक राजा । इनको राज. महोनाथ (सपु० ) महाः नाथः । पृथिवीपति, राजा। महोप (सं० पु०) मही पाति पा-क। १ पृथिवीपति, धानी पुष्पपुरमें थी। २ ब्राह्मण । राजा। २एक अभिधानिक । महीधर (सं० पु० ) १ विष्णु। २ पर्वत। ३ शेषनाग ।।.. मदीप- सोमपके पुत्र, एक अन्यकर्ता। इन्होंने अने. ४ बौद्धोंके अनुसार एक देवपुत्रका नाम । ५एक वर्णिक कार्य तिलक वा नानाथरत्नतिलफ और शदरत्नाकर वृत्तका नाम जिसमें चौदह वार प्रमसे लघु और गुरु : नामक दो अन्य बनाये। वासवदत्ता शिवरामने इनका यात है। नामोल्लेख किया है। २ वघेलवंशीय पक राजा! महीधर-१ एक प्राचीन कथि। २ वृहन्नातक विवरणके । महीपनारायण-१ याराणसीके एक राजा । १७८२ १०. प्रणेता। ३ मगधवासी एक प्राचीन कवि। ये राजा । को १४चीं सितम्बरको युटिश सरकारने उन्हें एक सनद पर्णमान और रुद्रमानके समय १०५६ शकमें मौजूद थे।! दी थी। ४ विख्यात दीपिकाकार। इन्होंने वाजसनेय-संहिताके महीपतन । मं० को) महा: पतनं । साष्टान-प्रणिपात, वेददीप' नामक भाष्यकीरचना कर अच्छी प्रसिद्धि पाई1 मत कर प्रणाम करना। ये रताकरके पौत्र तथा रामभक्तके पुत्र थे। वाराणसो-महीपति (म. पु० ) महाः पतिः। पृथ्वोपति, राजा . धाममें रह कर इन्होंने केशवमिश्रके पुत्र रत्नेश्वर मिथ्रसे महीपति- पक्षमायके रचयिता। २यनथलीक विद्याशिक्षा प्राप्त की। इन्होंने अद्भुतयिक, ईशायास्योप- चूडाममायंशीय एक सामन्तराज । निपदाप्य, एकाक्षरकोप, कात्यायनगृह्यसूत्रमाप्य, कात्यायन महीपति उपाध्याय-एक प्राचीन कयि । कवीन्द्र-यन्द्रोदय शुल्बसूत्रभाष्य, नृसिहपटल, पुरुषसूक्तको टीका, मातृका- में इनका नामोल्लेख है। सानिया मातानिघंट, योगवाशिष्टसारविवृति, राम- महीपतिमएडलिक-एक प्राचीन कवि। गीताको टोका, रुद्रमपभाष्य, पहाभाष्य, सारस्वत महीपद (स.पु.) किञ्चुलुक, केचुआ। प्रक्रियाको टोका और सौतामणिपिनियोगसूत्रार्थ नामक महीपाल (सं० पु. ) महों पालयतीति पालि-मण । १ बहुत-से प्रन्य बनाये। इसके अलावा इन्होंने १५६७ और , राजा। १५८६ में प्रमशः, विष्णुमति कल्पलता प्रकाश तथा नीरक्ताच महोपान ! रक्तवीजो महासुरः।" मन्त्रमहोदधि और नौका नामको रोका लिसी । ५ ( माई ० ८ ) सह्याद्विखएड-चर्णित पक राजा। २एक रामाका नाम ..महोध (सं० पु० ) महीं घरतीति घृक। १ पर्वत । २ महीपाल-पालवंशीय एक गोदाधिपनि ! पानराजार पृथ्वीफे उद्धारकर्ता। . देखो। इसधादिसएड-णित दो राजे।३ रामनानेका ___Vol. ITII, 72