पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३३६

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२९६ पाहदरमुख-महोबा ३ नागविशेष, पर नागका नाम। ४ दानवविशेष । ५ ' महोन्नत (स.पु.) महाननिय उन्नतः १ तास धृतराष्ट्र के एक पुतका नाम! ६ शिव। गृह, ताडका पेड़। २ नारिफेर वृक्ष, नारियल का पेट। ' मदोदरमुन (सपु०) शियानुगरमेद, गियफे एक अनु। ३ धाराफदम्ब, एक प्रकारफा कदमका पेद। (नि.) चारका नाम । | ४ अत्युन्नतियुक्त, जिसकी यड़ी उन्नति हो। महोदरी सखोल ) महागलायरी। |मदोन्नति ( सं रसी० ) महती चासावुन्नतिश्य । मतिः . महोदरेश्वर (म० को०) शिवलिङ्गमेद । शय गृद्धि, बड़ी उन्नति । मदोघम ( स० वि० ) महान् उद्यमो यस्य । १ महोत्माह! "भूयात महदेरपर्य पुपादीना मोनतिः । बड़ा उत्माही। अत्याधिना शरीरेण चिरंजीय मुखी भर ॥" (उट) "भग निमित्य दायाददलल्या पदी हितीवरः। मदोन्मद (स. पु०) १ मत्स्यविशेष, मोय मउली । (सिक) . जिदिग्विजय फत्त श्रीमानासीन्महोयमः ॥" २अत्युन्मत्त, घोर पागल। (राजत० ५।१४१) मदोन्मान (मं० वि०) १ विस्तृत, लया नौला । २ भार• (पु० ) अतिशय उद्योग, वड़ा यन। युक्त, जिसे बोम्म हो। महोद्योग (मलि०) महान उद्योगो याय । १ उपम- महोपनिषद् ( स० मो०) १ उपनिरपिशेर । इम शील, या उद्योगी । (पु०) २ अतिशय उद्योग, पड़ा यत ।। उपनिषदको मास्कराचार्य, शरानन्द और नारायण महोना (दि. पु०) पशुओंके एक रोगका नाम । इसमें मृत टोका देखी जाती है। (०) २ गुममन्राभेद। उनका मुंह और पैर पक जाते हैं। महोपमा ( स० स्रो०) पफ नदीका नाम । इसका दूसरा महोना-लखनऊ जिलेफे मलिहावाद तहसीलका एक पर नाम महापगा भी है। गना। यह गोमती नदीके पाए किनारे अवस्थित है। महोपाध्याय (सं० पु०) ३ महान् उपाध्याय, प्रधान भाना। भूपरिमाण १४७ वर्गमील है । यहांके इलोमा और मएिड. २ विद्वान और भारयि कयिको उपाधि । यायन नगरको जनसंख्या सबसे अधिक है । यह स्थान गहीवा-१ युक्त प्रदेशके हमीरपुर जिले का एक उप. पहले भर जातिके अधिकारमें या। पीछे कुर्मियोंने इस विभाग। इसमें महोया मोर पुलपहार नामक दो राद पर अधिकार जमाया। इसके बाद पोवार और घौहान- सील लगती है। राजपूतोंने यहांफ कुर्मियों को मार भगाया गौर महोना २ टन उपषिमागको एक तहसील। पद सस अपने दालमें कर लिया। माज भी ये ही लोग यहांफ २५६ से २५३८३० तथा देशा० ४१ से ८० प्रधान तालुकदार है। पू० मध्य अस्थित है। भूपरिमाण ३२९ वर्ग २ उक्त तहसोलके अन्तर्गत एक नगर । यह लपनऊ माल गौर जनसख्या ६ हजारसे अपर। यहाँका से भीतापुर जानेके रास्ते पर अवस्थित है। लगनऊ अधिकांश स्थान पहाड़ी अधित्यकाभूमिसे परिपूर्ण है। नगरसे रसको दूरी ७॥ कोस है। पहले इस नगरमें ! उम पतयक्ष पर ज्ञा अग्य तदाफार पुरणियां है विवारसदर योर गयएटफे फर्मचारियोंका यास तथा यह नन्दनराजायोंकी प्राचीन कीनिफा भोगा एक दुर्ग शा। पाययत्तों गोविन्दपुर-प्रामवासी एक करता है। ग्राक्षण गजाना नहीं देने के कारण उस दुर्ग को यन्द किया उन मिलेफे मनात एक प्राचीन नगर मार गा। इस पर ग्रामवासीमें यही सनसनी फैन्दी महोपा सदसलका गदा। यह मारा २५१८. मौर उन्होंने उत्तेजित दो पर दुर्ग पर यात्रामप कर तथा देगा ५५ पू०. मध्य भयपि है। पर दिया। इसके बाद आमिस · यहादुरगजमें नया दुर्ग नगर मदनसागर नामक एक यई हर किनारे पर बनाया गया था। नगरको पूर्णसद्धिका' गमी बहुत ऊपर मामा है। गदनसागर प्रगान पान कुरा हाल हो गया है। राराशे असायकोमि पर।