पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३३९

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महमूद १२६१ सन् १७६०में सुयुक्तगीन मर गया। मरनेके कुछ। दीवारी और किले के चारों ओर एक गहरी खाई खुदी - दिन पहले अपने छोटे लड़कको यह अपना उत्तराधिकार यो। तीन दिन तक इन्होंने अपने गढ़को इस तरह रक्षा . बना गया। इसका नाम इम्माइल था। महा द इससे को, कि मुसलमान सैनिकों को योरता नष्ट हो चुकी , यहा था और खुरामान देशका शासक था। यह सब थी। किन्तु महमूद बड़ा धीर पुरुष था। यह जल्द ही होने पर भी यह जारज (दोगला) था. इममे सुबुनगीन.' हताश होनेवाला न था। इसने अपने सैनिकोंको बहुत ने अपने छोटे लड़केको हो गज पद पर बैठाया था। उत्साहित किया और फिर युद्ध करने लगा। घमसाग किन्तु महमूद अपने अधिकारको महज ही छोइनेवाला युद्ध करनेके बाद महमूदने जयलाम किया। विजयराजने पुरुष न था। इसने इस्माइलसे युद्ध कर उसे पकड कर कैदखाने में ही प्राण विसर्जन किये। इस यार महमूद कैदखाने में डाल दिया और सुलतानका खिताब ले गजनी.. २८० हाथी, बहुतेरे सेनाध्यक्षोंको तथा लूटो हुई चीजों. का अधोवर हुआ। को ले कर गजनी गया। भाटिया राज्य गजनीमें मिला सुलतान महमूदने ३३ वर्ष से ज्यादा राज्य किया था। लिया गया। यह सत्तरह बार भारत पर आक्रमण कर यहांसे मणि सन् १००६ ई में इसका चौथा आक्रमण हुआ। मल- मुक्तादि हीरा-जवाहर ले गया था। भारतके धनमे गजनी तानफे शासक यददुल फतेह लोदीने महमूदकी अघो. धनधान्य पूर्ण हो गया। नता अस्वीकार कर जयपालके पुत्र अनङ्गपालका साथ सन् १००० ई० में इसका पहला आक्रमण पेशावरके दिया। इसके आक्रमणका कारण केवल लोदीका दमन निकट सीमान्त प्रदेशके कई किलों पर हुआ। किले करना ही था । आनन्दपाल अपने अदम्य उत्साहसे इसके दखल मा गपे भीर यहां लूट पाट कर यह बहुत महमूदके साथ पेशापरफे निकट युद्ध में प्रवृत्त हुथा। - धन गजनी ले गया। किन्तु अन्त में पराजित हो कर उसने काश्मीरमें मामय - सन १००२ ई०में इसका दूसरा आक्रमण हुआ था। ' लिया। विजयो मुलतानने गलतान में पहुँच उक्त लोदी- यह कोई दश हजार घुडमयार ले कर पेशावर पहुंचा । ' को दमन किया। यहाँ जयपालके साथ इसका युद्ध हुआ। इस युद्ध में अबदुल फतेह दाउद लोदी भाग कर गुमरातफे निकट • जयपालने बड़ा पराक्रम दिपाया; किन्तु अन्ती १५ सरनद्वीपमें जा टिपा । मदमूदको उसके सजाने से सामन्तोंके साथ ये कैद कर लिये गये। यदि तुपारणत. २००००००० हिरदम यानी स्वर्णमुद्रा मिली। सिया नहीं हुआ होता, तो जयपाल कभी पराजित नहीं होते। इसके बहुत बड़ा रत्नभाण्डार इसके हाथ मा गया। इस युद्ध में जयपालके ५००० सैनिक मारे गये थे। मद, लोदीने २०००० दिरहम यार्षिक कर दे कर सन्धि की . मूदको यहां लूट पाटमें बहुत धन हाय आया । मु सिद्ध और फिर आ कर सहामन पर पैठा। मारतीय हीरा कोहिनूर भी इसको इसो युद्धमें हाय लगा इसके बाद महमूदने २०० क्लिोंको जीता। ऐसे समय पा। (यही कोहिनूर एक दिन राजा कर्णके मस्तक पर महमूदको खबर मिली, कि तानार राज्य राजा इलाफ उनके किरीटमें शोमा पाता था और आज कल यह रानी ने उसको राजधानी पर आक्रमण किया है। महमदने मेरीक मुफुटका शोभा बढ़ा रहा है ) तरफत इ-अधरोमें मरने विश्वामी नौकर शुरूपाल पर रिमित देशोंका अयपालको वीरस्यवार्ता स्वर्णाक्षरों में लिखी हुई है। : भार देर यहांसे अपनी राजधानीशी यात्रा की। शश- • दिन्दूराजा इसको कर नहीं देते थे। इससे यह पाल जयपालके चंगफा ही था। किन्तु यह फेशायरकी फुद्ध हो कर तीसरी बार सन् २००४ में भारतमें लड़ाई में कैद हो कर मुसलमान बन गया। माया। मुलतान होते हुए यद मारिया नामक स्थानमें मन् १००८ ई०में महमूदका पवियों माकमपदमा। या पहुंचा । यहाँ विजयराज अपने गढ़को प्रम- इस मारमपमें नवाम गाहको पराजय हुई। महमूद के तोके धमएडमें निडर थे । इस गढ़ धारों भोर चहार, गजगी पर माममण करनेवाले इलाक प्रांको पराजित