पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३५०

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३०६. महमूद मुताविक धन प्रदान किया। अन्तमें भीमपालके साथ । कर नदीको पार करने के लिये अपने सिपाहियोंको उत्सा.. चांदायको फन्याका विवाह हो गया। अन्तमें पुरु-हित करने लगा। सुलतानके आद सुदक्ष सैनिक जयपाल सुलतानके भयसे भाग कर भोजदेयके राज्यमे तैर कर नदो पार होने के लिये उतरे । पुरुजयपालने वड़ो चले गये। 'चांदराय सुलतानके साथ युद्ध करनेके लिये चेष्टा की, कि यह सिपाही पार न उतरे ; किन्तु यह , . तय्यार था, किन्तु उनके दामाद भीमपालने उनको भाग सिपाहो पार हो आये। धीरे धोरे सुलतानके सभी जानेको राय दो। अब युद्धको वात भूल कर ये कुछ। सिपाही इस पार' आ गये। डरपोक पुरुजयपाल भाग : धन सम्पत्ति ले कर निविड़ वनमें भाग गये। गया । सुलतानको २७० हाथी हाथ . लगे। सुलतानने चांदरायके प्रसिद्ध पहाड़ो किले पर अधि. यहांसे सुलतानने नगरोंको लूटता, मन्दिरों को तोड़ता फार जमा लिया । अपरिमित धनदौलत सुलतानके हुमा नन्दराजके पास वशता स्वीकार करनेके लिये अपना हाथ लगी। चांदरायको सुलतानने बहुत खोजा, किन्तु एक दूत भेजा 1 नन्दराजने अस्वीकार कर दिया और युद्ध- उनका कुछ पता नहीं लगा। चांदरायके पास एक बहुत | को तय्यारी करने लगे। उनके पास ३६ हजार घुड़ बड़ा हाथी था, यह हाथी स्वयं सुलतानके खेमेके पास | सबार, १ लाख पैदल और ६४० सिखाये हुए हाथी थे। चला गया। इस पर सुलतानने यह सोचा, कि इसे | उधर सुलतान नन्दराजको निभीकताका कारण हूँढनेके खुदाने मेरे पास भेजा है । इसलिये इसका नाम खुदा- लिये पर्व पर चढ़ कर उनकी फौजोंको देखने लगा। दाद रखा। फौज देख उसके छपके इट गये। वह भूमि पर गिर कर __चांदरायके राज्यमें सुलतानको तीन करोड़ दिरहाम | ईश्वरसे जीतकी प्रार्थना करने लगा। . . . . . . (सोनेका सिका) मिला था । सिवा इसके मणि मुक्ताकी | रातको आकाश मेघाच्छन्न हुआ. रजनोने घोर . तो बात ही नहीं। यहांसे उसने गजनीकी यात्रा की। अन्धकारका साम्राज्य फैला दिया। नन्द उसी रातको उसने वहां जा कर लूट के मालका हिसाब लगाया। वीस दुःस्वप्न देख कर भयसे भयभीत हो कर यहांसे भांग करोड़ सोनेका सिका, अगणित मणि मुक्ता हीरामोतो, ! गये । महमूदको सवेरे यह खबर मिली, किन्तु उसको यह १५०० हाथी, और १ लाख कैदी यहांसे वह ले गया था। विश्वास नहीं हुआ। गुप्तचरोंसे पक्को खबर पा.फर उसने इन कैदियों में अधिकांश स्त्रियां ही थी। कैदी वीस दिर ! लूटना शुरू किया। १८० हाथो और अपरिमित धन हाममें बेचे जाने लगे। इराक और खुरासनके प्रव भाण्डार उसके हाथ लगा। इस धनभाण्डारको पशु सायी आ कर कैदियों को खरीद ले गये। मुसलमान- | भी ढोने में असमर्थ हुए। यह फिर गजनोको यहांसे भूमि सहस्र सहस्र हिन्दू दासदासियोंसे परिपूर्ण हुई। | रवाना हुआ। ... .. सन् १०१२ ई०में उसका १३वां आक्रमण हुआ। सन् २०१३ ई०में किरात, नूर, लोहकोट और सुलतानने सुना, कि कन्नोजराजके उनकी वशता स्वीकार · लाहौरमें उसका १४यां आक्रमण हुआ। उसने गजनो करने पर नन्दराजने उसे मार डाला है । अतः नन्द- | जा कर सुना, कि जलालाबाद और पेशावरके उत्तर पाय: राजको दण्ड देनेके लिये वह फिर तेरहवां धार भारतमें | में मूर्तिपूजक रहते हैं। अनेक कारोगर और पत्थर . आया। काटनेवाले मिस्त्रियों को साथ ले कर यह वहां पहुंचा। इस वार नन्दराजकी मदद करनेके लिये पुरजयपाल- किरातगण सिंह और सिंहवानोको पूजा करते थे। यहां ने यमुना किनारे अपना खेमा खड़ा किया। सुलतान बहुतेरे बौद्ध ध्वंसावशेष दिखाई देते है.। किरातोंने राहमें छोटे छोटे. राजाओंकी. धनसम्पत्ति लूटते हुए! - मुसलमान बन कर वशता स्वीकार कर लो। नूरदशके नन्दराजकी ओर बढ़ने लगा। पुरुजयपाल जहां ठहरे थे। राजाने भी किरातीका हो अनुसरण किया। उसका नाम राहिव था। यहां यमुनाफा जल अथाह और यहाँसे सुलतान लोहकोट पर आक्रमण करने के लिये 'किनारा पङ्कमय था।..सुलतान नदीके किनारे पहुच चला। यह किला काश्मोरके सोमान्त पर है। महमूदने