पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३५६

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३१२ महमूद खां खिलजो-महद खां तुगलक . आगमनकी प्रतीक्षा कर रहा है। इस सम्वाद पर हुथा। कुछ समय तक निरुद्दे श रह कर उन्होंने पुनः । दर्पित सिंहकी तरह मह्म द आगे वढे. और रातको एका.. ८७० हिजरीमें इलिचपुरको आक्रमण किया और.लटा एक कुतुबकी छावनी पर टूट पडे.। दिनको फिर युद्ध | इस युद्धके बाद शान्ति स्थापित हुई। निजाम शाहने । हुआ। १४५१ ई०के मार्च मासमें उद्धत महा द हार कर | इन्हें केरल प्रदेश दे कर छुटकारा पाया। जो कुछ हो, -नौ दो ग्यारह हुए। उनका विख्यात सेनापति -मुजःफर गुर्जरपति मह मूकी मध्यस्थता तथा उनके शासनभयसे खां पकडा और पीछे मार डाला गया। मालयपतिने दाक्षिणात्यकी चढ़ाईसे मुखान मोड़ा। ___ इस पर भी मह्म द हतोत्साहन हुए, फिरसे नागोर १४६६ ई० ( ८७३,हि० ) में मा दखिलजीका पर- जीतनेको निकले। कुतुबुद्दीनने उनकी गति रोकनेके लिये लोकवास हुआ। वादमें उनका लड़का गयासुद्दीन सैयदलाता उलाको भेजा। शम्बरप्रदेशमें दोनों दलमें ! मालव-सिहासन पर बैठा। गयासके पुत्र सुलतान :२५ . मुठभेड.हुई 1 माह पहले ही ध्यर्थ मनोरथ हो स्वराज्य- | महमूदके.शासनकाल.(:१५३१ ई० ) में गुजरातफे राजा । मे लौट आये। -वहादुर शाहने मालयको .जोत कर अपने राज्यमे, मिला . • इसके कुछ दिन बाद नागोरराज फिरोज .यांक लिया । मरने पर मुजाहिर खांने राजतरत अपनाया और फिरोज- महमूद खां तुगलक-दिल्लीके तुगलक (पठार -वशीय के पुत्र सामस सांको राज्यसे निकाल भगाया। सामस् अंतिम बादशाह । पेफिरोज शाहातुके बजीर थे। पनि कमलमीरमें आकर राणाशुम्भका आश्रय लिया। महम्मद शाहक पुन.थे। महम्मद किा महम्मद शाइफे पोछे राणाने नागोरके मुसलमानों को तंग तंग कर डाला मरने पर उनका लड़काहुमायू:शाह हुया.मा १६ दिन और उनके नगरको लूटा। राज्य करक इस 'लोकसे चल बसे । पोछे उनके ____अनन्तर सुलतान कुतुबुद्दीनने क द्ध हो ४६० हिजरी- छोटे भाई,महमूद खां १३६४ ई०के अमिल.मासमें, जव .. में राणाको राजधानी कमलमीर पर धाया योल दिया। उनका उमर सिर्फ दश वर्षको थो, नाशिर उद दुनियार इस युद्ध में राणा पराजित हो प्राणभिखारी हुए थे। दूसरे । उद्दोन.महम्मद.शाह नाम धारण कर दिलोक सिंहासन . वर्ग ८६१ हिजरी (१४५७ ई०)-में कुतुबुद्दीन और महमूद । पर अधिरूढ़ हुए। . . . . . खिलजीने मिल कर चित्तोर पर चढ़ाई फर दो। आखिर वालक राजा शासनकाल में शासनविटखलता तथा . दोनोंमें मेल हो गया । महमूदको मन्दशोर प्रदेश अमीर उमरावॉक अन्तविप्लवके कारण राज्यम सामत- मिला। राजाओने विद्रोह खड़ा कर दिया। इस सूत्रस बहुतेरे - इसके बाद ८६६ हि० (१४६२ ई.)-में निजाम | सामन्तराज स्वाघानाहा गये। मोका-पाकर इसा समय उल-मुल्ककै दहकानेसे महा द खिलजीने दाक्षिणात्यको । मुगलपति श्रमार तैमूरने भारतवर्ष पर चढ़ाई कर दी। ओर कदम बढ़ाया। उन्होंने हुमायूशाहके पुत्र निजाम- मुगलसेनाओंफे साथ परास्त हो कर मह मुद शाह गुज- शाहको घिदरफी लड़ाई में हरा कर दुर्ग को घेर लिया। रातकी ओर भाग गये। ..ऐतिहासिक फिरिस्ताके मत. इस समय निजामफे प्रार्थनानुसार गुर्जरपति महमद से १३६६ ई०की १५वी तथा सरफउदोन घेजदोंके विगाडा मालबाराजके विरुद्ध अग्रसर हुए। मन द । मतसे १३६८ ई०को १७यों ,दिसम्बरको यह युद्ध । खिलजी यह संवाद पा फर गोण्डवानाको राहसे अपने हुआ था। .. राज्य लौटे। किन्तु राहमें गोंड़झातिने इन पर चढ़ाई फर! · महमूदक भागने पर तैमूर शाहने उसके दूसरे हो दिन दी थी, इस कारण इन्होंने क्रोधमें आ कर. गोएडवाना. दिल्लोक सिंहासनका अधिकार कर लिया। यहां स्ट प्रतिको मार डाला। में उन्हें जो कुछ माल लगा था उसे लेकर थोड़े हो • १४६३ ई० में मम द खिलजीने फिरसे दाक्षिणात्यकी || दिनोंके अन्दर फारसको चल दिये। -- ।' , चढ़ाई कर दी. इस बार भी उनका मनोरथ सिद्ध नहीं इधर सुलतान महम्द शाहको गुजरातमें जाफर खां