पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३५८

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


महमुद विगाड़ा :- ध्यापत रह कर वह अपने ही अस्त्र द्वारा घायल हुआ। सेनादलको येतनके अलावा जो सब जागीर इसीसे उसकी भी मृत्यु हुई । वाद इसके दाऊदशाह नामक मिली थी, मरने के बाद उसका उपभोग उसके घालवच्चे . 'उसका एक आत्मीय राजवख्त पर बैठो। इसने सिर्फ करेंगे, ऐसा नियम जारी हो गया। अमीरोंके लिये भी सात दिन तक गुजरातका शासन किया था। उसके यहो नियम चालू था। कोई भी सेना महाजनसे रुपये प्रजापीडन और कृपणतासे तंग आं फर अमीर उमरयों- फर्ज नहीं ले सकती थी। जो कोई महाजन राजसैनिकको । ने उसे तख्त परसे उतार फते खांको राजा पसन्द | रुपये कर्ज देता उसे कानूनन दण्ड मिलता-था। जब कभी किया। फतेखां सुलतान'दीन पाना महमूदशाहकी उपाधि सैनिकको रुपयेकी जरूरत पड़ती तय राजदरवारमें एक . धारण कर गुजरातके सिंहासन पर बैठा (१४५६ ई०) खत पेश करने पर ही उसे रुपये मिल जाते थे। इन सय घीय, धुद्धि, न्यायपरता, दया आदि सद्गुणोंसे अलंकृत | नियमोंके जारी होनेसे देश बहुत कुछ उन्नत हो गया। रहने के कारण उसको ख्याति चारों ओर फैल गई। जन-1 सैनिकगण राजानुग्रहसे प्रसन्न हो प्राणपणसे युद्ध करते साधारणमें वह महमूद विगाड़ा नामसे हो मशहर था। थे। इस प्रकार लोगोंको रुपपेका माय. नहों रहने उसने जूनागढ़ और चम्पानेर दुर्गको जीता था, इसी | से महाजनकी संख्या दिनों दिन घटने लगी। यथार्थमें कारण मुसलमान इतिहासकारोंने उसका वि (द्वि)| यह खोरासनफे सुप्रसिद्ध राजा सुलतान हुसेन मिर्जा, उन गाड़ा नाम रखा। फिर किसी किसीने उसकी बुद्धिको | का प्रधान वजीर मीर अली शेर, मौलाना हाजी, दिल्ली. गभीरता देख कर अथवा उसे दुर्द्ध पैजान कर 'बिगाड़ / वर सिकन्दर-दिन-वहोललोदी और उनका मंत्री मियां शब्दसे अभिहित किया है। . भुवाफ्स लोहानी, माण्डुराज महमूद खिलजीफा पुत्र उसके राज्यारोहणके कई मास बाद ही उमराव लोग गयासुद्दीन तथा दाक्षिणात्यके विख्यात राजा महमूद वागी हो गये। तेरह वर्ष का वालक महमूद राज्यारोहण- शाह वाहनी और उनके राजनीतिकुशल बजीर मालिक के आरम्भमें ही ऐसा विपजनक विष्टव' देख विचलित निशान (मालिक गवान् ) आदिके चलाये हुए पन्थका' हो गया। गाखिर उसने वड़ो वीरताके साथ इस / अनुसरण करके शासनसम्पकीय तथा राजकीय समी विद्रोहका दमन किया था। इस समय कई एक प्रसिद्ध कार्य करता था। उमराव मारे गये थे। उसके शासन कालमें धान आदि किसी भी अनाज: चौदह वर्षका बालक साधारण घुद्धिवलसे अनेक को महंगी नहीं हुई । जो सब प्रजा विभिन्न देशमात पक्ष विपत्तियोंको झेलता हुआ अपने राज्यको उन्नति करनेकी रोपते थे, उन्हें पुरस्कार मिलता था। उसोफे उत्साह इच्छासे राज्यतन्त्र के संस्कारमें बद्धपरिकर हुमा । तद से फिरदोस और सावानका प्रसिद्ध उद्यान लगाया नुसार इसने अपने विश्वस्त मित भोर अनुचर मालिक गया था। जगह जगह इनारे खोदे गये तथा टूरी फटी पहाजी, मालिक तोघान, मालिक बहाउद्दीन, मालिक, | इमारतीका संस्कार किया गया। इन सब कामों में लाखों __आइन, मालिक कालू और मालिक सारङ्ग आदिको राज. रुपये खर्च किये गये थे। ... :: : कार्य के प्रधान प्रधान पद पर नियुक्त किया था। . . सुलतान महमूद यद्यपि व्यवहारशारत्रके घेत्ता नहीं . इसके याद राजशक्तिकी वृद्धिके लिये, उसने अपनी थे, तौभी साधुओं के साथ रहने के कारण उन्हें न्याया- • सैन्य संख्याको बढ़ाया। उसके जमाने में गुजरात राज्य : न्यायक विचारमें अच्छी सूझ हो गई थी। शेखपुरानगरके उन्नतिको चरम सीमा तक पहुंच गया था। साकुमोका प्रतिष्ठाता प्रसिद्ध मुसलमान-साधु शेख सिराज उदोन जो भय था, यह विलकुल- जाता रहा । दरवेश और || उनके गुय मीर प्रधान परामर्शदाता थे। विना उनकी __ यणिकंगण स्वेच्छानुसार जहां तहा भ्रमण कर सकते यनुमतिफे महमूद किसी भी काम हाथ नहीं चालते . थे। उसके मुशासनसे गुजरातमें तमाम शान्ति विरा•| थे। . . . . . . . . . . . .":- . जने लगी थी। ... . .. १४६०-१४६३ ई. तक इन्होंने दलबलफे साथ कप्पर.