पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३६९

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पांस ३२३ बद्धक और लिदीपनाशक है। पौण्ड क-पित्तवर्द्धक, । :प्रदीपक है। छोटे वफरेका मांस लघु तर, हृदय त्रिदोषनाशक, कुछ लघु और फफनाशक है । दर्भर-कफ नाही, ज्वरनाशके लिये उत्तम, सुखप्रद और अत्यन्त पित्त और · · हृद्रोगनाशक तथा • शीतवीय है । ] घलकारक है। वधिया किये हुए बकरे (वगड़ा ) का - वत्तींक पक्षी-मधुररस, शीतवीर्य्य, रूक्ष तथा कफ और मांस कफकारक, गुर, स्रोतःशोधक, बलकारक, मांस- पित्तनाशक है। तीतर दो तरदका होता है, एक काला पद्धक एवं वायु और पित्तनाशक है । वुद्ध और बीमारी और दूसरा गोरा। काला तोतर वलकारक, धारक, से मरे यारेका मांस यायु और कफवर्द्धक है। बकरे- हिचकी, त्रिदीप, दमा, खांसी और ज्वरनाशक ; गोरा! का मस्तक ऊर्व जगत व्याधिनाशक तथा रचि. तीतर काले तोतरको अपेक्षा अधिक गुणवान् है। कर होता है। . चरक-शीतवीर्य, स्निग्ध, मधुररस, शुक्रवद्धक, कफ मेडे के मास-पाएकारक, पित्त और फफवद्धक .प्रदायक और सशिपातनाशक । गृह-चटककामांस अति तथा गुरा होता है। बधिया भेडे का मांस जरा लघु

शुक्रवर्द्धक है।

होता है। दुग्वे भेडे का मांस भी इसी देशी भेड़े के मांस. • 'कुषफुट (मुर्गा) दो प्रकारका होता है,--चन्यकुक्कुट की तरह है । (दुम्या भेड़ा-जिसको दुम बहुत मोटी और और स्थलकुक्कुट । वन्य कुक्कुटमांस (वनमुर्गे)का गुण चाल बडे, मुलायम होते हैं, इसके बालसे जो कपडे, स्निग्ध, शरीरका उपचयकारक, कफजनक, गुरु तथा वनते हैं, वे पशमीने कहलाते हैं। ) इसकी मोटी दुम- घायु, पित्त, क्षय, वमि मौर विषम ज्वरनाशक । स्थल का मांस हृदयग्राही, शुक्रवर्द्धक, श्रान्तिहर, पित्त और • कुफ्फुटका मांस-शरोरफा उपवयफारक, निग्ध, उष्ण कफवर्द्धक तथा सामान्य वातरोगनाशक है। गो मांस • वीर्य, वायुनाशक, गुरु, चक्षुका हितकर, शुक्रजनफ, अत्यन्त गुरु, पित्त और कफवर्द्धक, शरीरका उपचय- फफकारक, वलकर, वृष्य तथा कपाय रस 1 हारीत पक्षी कारक, वातघ्न, यलकारक, अपथ्य तथा प्रतिश्यायनाशक; • लाल या.पीला होता है। उसके मांसका गुण-रक्ष, घोडे,का मांस नमकीन, मधुर रस, अग्नि, कफ, पित्त और

  • उष्णयीय, रक्तपित्तघ्न, कफनाशक, स्वेदजनक, सरवद्ध क वलकारक होता है। यह वायुनाशक, उपचयकारक, नैन-

तथा फुछ वायुवर्द्धक माना जाता है। पाण्ड पक्षी सुखकर और लघु है। भैसेका मांस मधुर रस, चिकना, दो तरहका होता है। इनमेसे पकको चित्रपक्ष और कल उष्णवी, यायुनाशक, निद्राजनक, धीय पद्धक, “ध्यान तथा दूसरेको धवल, कपोत और स्फुटखन कहते | वलकारक, गुरुपाक, पुटिकारक, मल मूल निःसारक और है। चित्रपक्ष कफ, वायु तथा ग्रहणीरोगनाशक और वायु, पित्त और रक्तदोपनाश करनेवाला होता है। धवल रक्तपित्तनाशक तथा शोतोय माना गया है। मण्ड क मांस या मेढकका मांस कफ वद्धक और वल- "कबूतरका मांस--गुरु, स्निग्ध, रक्तपित्तघ्न, वायुनाशक, कारक है । कुछएका मांस-बलकारक, वायु और पित्त- धारक, शीतवीर्य तथा धीर्यवर्द्धक । पक्षोके अण्डे भी। नाशक तथा नामर्दाको दूर करनेवाला है। बड़े कामकं होते हैं। ये कुछ स्निग्ध, पुष्टिकारक, ___ताजा मांस अमृत तुल्य और रोगनाशं मधुररस, मधुरविपाक, वायुनाशक, गुरु तथा अत्यन्त | करने में समर्थ होता है। यह वयःस्थापक और देहके शुक्रवर्द्धक होते हैं। . ... . उपचयको बढ़ानेवाला है और हितकर है। ताजा मांसके ____बकरेका मांस-लघु, स्निग्ध, मधुरविपाक, त्रिदोय. सिवा अन्य मांस परित्याग करने लायक है। जो प्राणी नाशक, मधुररस, पीनस नाशक, बलकर, रुचिकारक, स्वयं मर जाते हैं, उनका मांस न खाना चाहिये, क्योंकि शिरको उपचय करनेवाला और वोट्यवर्द्धक है। यह ऐसा मांस बलहानिकारक, मतिसारजनक और गुरु होता न तो अत्यन्त शीतल है और न अत्यन्त गर्म ही है। । है। बूढे प्राणीका मांस लिदोपजनक, कम उम्रके प्राणीका .: चिना भ्यायो वकरीका ,मोस--पीनसविनाशक, सूखो मोस वलकारक और लघु माना गया है। सर्पादि खांसी, अरचि और शोपरोगमे हितकर तथा अग्नि-! हिस्र जन्तु द्वारा जो सेव प्राणी मरते हैं उनका मांस