पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३८

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। मशूरो-मसजिद . मशूरो-युक्तप्रदेशके देहरादून जिलेके अन्तर्गत एक गपीलेख्यदल ( स० पु. ) मपीमिलोख्य लेखनयोग्य दलं. . पहाड़ी नगर। यह अक्षा० ३०२७ उ० तथा देशा ७८] यस्य । धीताल वृक्ष। ५ पृ०के मध्य अवस्थित है। हिमालयके एक प्रदेश पर | मष्ट (हि वि०). १ संस्कारशून्य, जो भूल गया हो। २ अवस्थित होनेके कारण इसका प्राकृतिक सौन्दर्य बहुत उदासीन, मौन। मनोरम है। यहांकी जनसंख्या साढ़े छः हजारके फरीव | मण्यार (सं० क्लो०) तीर्थभेद, ऐतरेय ब्राहाणके अनुसार, है। हिन्दुको संख्या सबसे ज्यादा है। इसके पास ही एक प्राचीन तीर्थका नाम । लन्दोरा नामफ स्थानमें सेना रहती है। समुद्रपृष्ठसे मसक (सं० पु० ) मस्यते परिमीयतेऽसौ मस कर्मणि घ, . शहरकी ऊंचाई ७४३३ फुट है। यह स्थान बड़ा हो| अल्पार्थे कन् । क्षदरोगविशेष । मशक देखो। . ' स्वास्थ्यकर है। प्रोमकालमें दूर दूर स्थानके लोग | मसक (दि. पु.) १ मसा, मच्छड़। (स्त्री०) २ मशक स्वास्थ्यलागको आशासे यहां आते हैं। यहां ईसाइयो- | - देखो। फा गिरजा, पांच विद्यालय और साधारण पुस्तकालय मसकना (हिं कि० ) १ विचाय या दवावमें डाल कर है। सरकारी उद्भिन्योद्यान ( Botunical garden), कपड़े को इस प्रकार फाड़ना कि चुनावटके सब तन्तु टूट यहाँको म्युनिस्पलिटीकी देखरेखमें है । शहरमें एक कर अलग हो जायं। २ किसी चीजको इस प्रकार अस्पताल भी है। द्वाना कि यह योचमेंसे फट जाय या उसमें दरार पड़ मशोना-पायके फोथी राज्यके अन्तर्गत एक पर्वत और mamtी जा त एक पर्वत और जाय। ३ जोरसे वाना, जोरसे मलना। . किसी उसके नीचे में अवस्थित एक यदा प्राम । यह अक्षा० - पदार्थका दवाय या खिचाव गादिके कारण वीचमैसे ३९८ उ० तथा देशा० ७७ पू०के मध्य विस्तृत है। फट जाना। ५ चिन्तित होना, दुःखके कारण धंसना। जामे TE RATE शोटी री दापता है। सामान्य मसकरा (हिं० पु०) मसखरा देखो। प्राम होने पर भी यहां प्रीष्मकालमें सिगलासे अनेक | मसकला (अ० पु०) १ सिकलीगरों का एक औजार । । यह हंसियेके आकारका होता है। इसमें काठका एक दर्शकमएडली आती हैं। दस्ता लगा रहता है। इससे रगड़नेसे धातुओं पर मश्क ( अ० पु० ) किसी कामको अच्छी तरह करनेका चमक आ जाती है। इससे तलवारे मादि भी साफ को अभ्यास। जाती है। मश्शाफ ( अ० वि०) जिसे कोई काम करनेका खूब मसकली (हिं० स्त्री० ) मसकता देखो। अभ्यास हो, अभ्यस्त । मसखरा (भ० पु०) १ वहुत हसी मजाक करनेवाला, मप (हिं० पु०).गख देखो हंसोड़। २ विदुपक, नकाल । मपराण ( स० ली० ) स्थानमेह । , मसखरापन (अ० पु०) दिल्लगी, ठठोली। । । मपि ( स० स्त्री० ) १ फाजल । २ सुरमा। ३ स्याही । | मसखरी (फा० स्रो०) दिल्लगी, हसी। मपिपी ( स० स्त्री०) मपेः कूप-श्व मपिकप अल्पार्थे | | मसनवा (हिं० पु०) मांसाहारी, यह जो मांस पाता हो। डीप । मस्याधार, दावात । मसजिद (फा० स्त्री०) (जुम्मा या जामा मसजिद) मुसलमान मपिधान (संलो०) धीयतेऽस्मिन्निति धा अधिकरणे, जिस घरमें खुदाकी इयादत किया करते हैं, उसको मस. त्यु , मपेर्धान: स्थानं.। मस्याधार, दावात । जिद कहते हैं। इस मसजिद सभी तरहये इसलाम धर्म- मपिपण्य (सं० पु०) लेखक, लिखनेका फाम करनेवाला ।। के माननेवाले नमाज पढ़ने जाते हैं। जैसे हिन्दुओंका मविप्रसू (स रो०) १ दावात ! २ कलम । शिवालय या ठाकुरयाड़ो या ईसाइयोंका गिरजा है, से . मपिमणि ( स० स्त्री०) दायात । ही मुसलमानोंका यह मसजिद है। महम्मदफे चलाये मपो (हिं० स्त्री०) मपि देखो। इस इसलाम मजदमें फर्मकाण्डकी कोई तिचिमा न pri: ।