पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३९७

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माणिरूप्यक-माण्डोगढ़ ३५३ माणिकप्य का ( सं० लि०) मणिरूप्यसम्बन्धोय।। राजको शाप दिया, कि तुम शूद्र हो जायो। फलस्वरूप मारिट ( ०) वैदिक आचार्यभेद । यमराज दासीके गर्भसे पाएड के यहां उत्पन्न हुए थे। माण्डकाण (स० पु० ) मण्डकर्णका गोलापत्य, मुनि-माण्डध्य-एक विख्यात ज्योतिर्विद । इन्होंने माण्डव्य- 'विशेप। . . संहिता और कार्तिकविवाहपटल नामके दो ज्योतिग्रन्थ माण्डप: (सनिक ) मण्डप अण। मण्डपसम्बन्धीय । बनाये। रघुनन्दन, नारायण, हेमाद्रि आदि तथा गृह. माएकि ( त्रि०) मएडरका गोलापत्य। संहितामें इनका नाम पाया जाता है। माएडा लिक (सपु०) मएडलं रक्षति मण्डल ठक् । १, माण्डव्यापुर ( स०क्की. ) गोदावरी नदीके किनारे मएडलरक्षक, यह जो किसी मण्डल या प्रान्तकी रक्षा स्थित एक नगर। इसका वर्तमान नाम माण्डवी है। अथरा शासन करता हो । इसे अंगरेजी में Magistrate | माण्डव्यायन (सपु०) माण्डव्यका गोलापत्य । कहते हैं। २ वह छोटा राजा जो किसी सावभीम या माण्डव्येश्वर ( स० क्ली० ) १ शिवलिङ्गभेद । २ एक चक्र वत्ती राजार्फ भधोन हो और उसे कर देता हो। ३ तीर्थका नाम । शासन कार्य। माण्डू-मध्यभारतके धारराज्यके अन्तर्गत एक परित्यक्त माए डव ( संकलो) साममेद । नगर। मापडोगढ़ देखो। मार इया-रेवाकान्धाके सम्वे-मेघासफे अन्तर्गत एक माण्डूक (सपु०)प्राचीनकालके एक प्रकारके ब्राह्मण सामन्तराज्य । जो चैदिक मण्डूक शाखाके अन्तर्गत होते थे । माडवा-बम्बई प्रदेशके कोलावा जिलेके अलीयाग उप. | माण्डूकायन ( स० पु० ) मायङ्कक देश्यो। विभागान्तर्गत एक नगर । माण्डूकायनि ( स० पु० } एक वैदिक आचार्यका नाम । माण्डवी (सखी०) १ राजा जनकके भाई कुगध्यज-माण्डूकि (स० पु०) माण्डकका गोलापत्य । - की कन्या जो भरतको ध्याही थो। (रामा० ११७३१२६) | माण्डकीपुत्र (स.पु.) वैदिक भाचार्यभेद। २ माण्डध्य नगरमें स्थित दाक्षायणी मूर्ति । माण्डूकेय (सं० पु०) मण्डकका गोत्रापत्य, वैदिक आचार्य- ग्राण्डवी-बम्बईप्रदेशके कच्छ राज्यका एक बन्दर । यह भेद । अक्षा० २२.१५ ३०“3० तशा देशा०६६ २१४५०पू० माण्डकेयीय ( स० वि०) १ माण्डूकेय सम्बन्धोय । (५०) कच्छ उपसागरके किनारे अवस्थित है। इसका प्रधान २माण्डकेयका मव ।। याणिज्यस्थान मस्कमाण्डवी है जिसका प्राचीन नाम माण्डूपय ( स० त्रि०) मण्डूक सम्बन्धी । । रायपुर है। माण्डपयोपनिषद् ( स० स्त्री०) एक उपनिषदका नाम । । माण्डवी-१ बम्बई प्रदेशके सूरत जिलेका एक उप-माएडीगढ़-मध्यभारतके धार राज्यके अन्तर्गत पक नगर। विभाग । भूपरिमाण २८० वर्गमील है। मुसलमानोंकी अमलदारीमें यहाँ मालय राज्यकी प्राचीन ___-२ उक्त उपविभागका एक प्रधान नगर । यह अक्षा राजधानी थी। यह नमदोनदीके किनारे १९४४ फुट

२१.१८ २०“उ० तथा देशा०७३२२ ३०“पू०के बीच ऊँची एक अधित्यका पर बसा हुआ है। प्रत्लतत्त्य.

पड़ता है। ३ रेवानदी तीरस्थ एक प्राचीन तीर्थ। । विदोंका मत है, कि यह नगर ३१३ ई०में यसाया गया ... । (रेवाखंयड) था। उस समय यह विशेष समृद्धिशाली और ३७ मील माण्डध्य । म.पु.) १ वैदिक भाचार्य मेद। ये माएडयो- लंधे प्राकारसे घिरा था। के पुत्र थे। २ मण्डका गोलापत्य, ३ पक जातिका यहांके ध्वंसावशेषमें जामि मसजिद, मालयावासी - नाम। . ४ एक प्राचीन नगरका AIR 1 ५एक प्राचीन होसड़घोरीकी मर्मरकी बनी मसजिद और वाज बहादुर- पि। इनको वाल्यवस्थाको किये हुए अपराधके कारण का प्रासाद अफगान-कीर्तिका परिचय देता है। राजा यमराजने शूली बढ़वा दिया था। इस पर ऋपिने यम-! होसङ्ग घोरोने १४वीं शताब्दी में नगरको चारों ओर खाई Vol. XVII. 89