पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/३९९

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पातदिल-मातादीन शुल्क ३५५ मातदिल (अ० वि०) मध्यम प्रकृतिका, जो गुणके विचार-| गहरा होनेसे ना पण्यद्रव्य ले कर आसानीसे आ जा से न बहुत हैढा हो और न बहुत गरम। इस शब्दका सकती हैं। · प्रयोग प्रायः षधियों या जल-वायु आदिके सम्वन्धमें । मातला या पोर्टकैनिंग नगर इसी नदीके किनारे होता है।

बसा है । लार्ड कैनिंगने यहांसे यूरोपीय वाणिज्यकी

मातना ( TO fito) मस्त होना, नशे में हो जाना। सुविधा होगी जान कर यहाँ अपने नाम पर राजधानी . मातयर ( म०सि० ) विभ्यास करने योग्य, विश्वसनीय। वसाई थी, किन्तु अभी वे सब मकान छोड दिये गये हैं। मातवरी ( म० र प्रो०) पातवर होनेका भाव, विश्वस- मातला-इसी नामकी नदीके किनारे बसा हुआ एक धड़ा - नीयता। गांव। मातम (१० gol) १ मृतकका शोक, वह रोना-पोटना । मातलि (सं० पु०) मति लातीति ला-क, पोदरादित्वात् आदि जो किसी के मरने पर होता है। २ किसी दुःख- साधुः वा मतलस्यापत्यं पुमान मतल ( अत इम् । पा दायिनी घटनाके कारण उत्पन्न शोक। । १६५ ) इति इम् । इन्द्र के सारथी। मातमपुसी (फा स्त्री० ) जिसके यहां कोई मर गया हो। "मतस्त्रिलोकराजस्य मातलिर्नाम् सारथिः । उसके यहां जा कर उसे ढाढ़स देनेका काम, मृतकके तस्यकैव कुले कन्या रूपतो लोकविश्रुता ॥" सम्यन्धिर्योको सान्त्वना देना। (भारत ५६७११) मातमो ( फा०वि।) मानम संबंधी, शोक सूचक मातलिस्त ( स० पु०) इन्द्र । मातमुख (हिं० वि।।) मूर्ख । मातली (सं० पु०) एक प्रकारके वैदिक देवता। ये यम मातर (सं० पु.)। कृमि, छोटा कीड़ा। और पितरों के साथ उत्पन्न माने गए हैं। भातरगितरी (सं०1०) माता च पिता २ ( मातरपिसरा- मातलीय (स' नि ) मातली-सम्बन्धीय । धुदीचाम् । पा ६३॥ ३२) इत्यार ङा देशो मातृशब्दस्य ' मातवचस (सपु०) मतवांका गोलापत्य । निपात्यते । तात। और जनयिनी, मां वाप। यह शब्द मातहत (२० पु०) किसीकी अधीनतामें काम करनेवाला, हमेशा द्विवचनान्त है। अधीनस्थ कर्मचारी। मातरिपुरुष (स० पुल ) वह जो केवल घरमे अपनी माता । मातहतो (अ० स्त्री०) मातहत या अधीनतामें होनेका आदिके सामने ही ४ पिनी वीरता प्रगट करता हो, वाहर काम या भाव । या पौरों के सामने कड़ा डरपोक हो। माता (सं० स्त्री०) मान्यते पुख्यते इति मान पूजायां तन मातरिश्व ( स० पु०) अग्निभेद, एक प्रकारको अग्नि। । ततापि निपातनात् साधुः । जननी, जन्म देनेवाली। मातरिश्चन् ( स० पु०. मातरि अन्तरीक्षे वयति पद्धते । मातृ देखो। इति-यद्वा मातरि जननां श्वयति बर्द्धत सप्त सप्तकत्वा । "विश्वेश्वरी विश्वमाता चण्डिको प्रणमाम्यहम् ।" दिति शिव (श्वन उक्षमिति । उया १३१५८ ) इति कणिन् । (शिवरहस्य दुर्गोत्सव) नाम्नि सप्तम्या अलुक । वायु, अन्तरिक्षमें चलनेवाला माता ( म०वि० ) मदसस्त, मतवाला। पवन | २ अग्निभेद, एक प्रकारकी अग्नि। माताङ्गा (संत्री० ) नागवला, गंगेग्न । मातला रायमला, चौवीस परगना जिले में प्रवाहित मातादीन मिथ-सरायमीराके रहनेवाले एक भाषाकवि । एक नदी। विद्याधरी, करतोया और अठारवाका नाम- इन्होंने शाहनामा भाषा अनुवाद किया । अलावा की तीन नदी ओपसमें मिल कर उक्त नामसे सुन्दरवन इसके कविरताकर नामक एक संग्रह गन्ध भी इन्होंने होती हुई वङ्गोपसागरमें जा गिरी हैं। इस नदीका मुहाना बनाया। ..सागरद्वीपसे १५ कोस पू तथा कलककत से १४ कोसमातादीन शुक्ल-एक सरयूपारी ब्राह्मण ! पे..अजगरा दक्षिण पड़ता है ।, नदी का, मुहाना विस्तृत तथा । जिला प्रतापगढ़में रहते थे। राजा अजीत सिंह,मोम