पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४१७

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३७६ पाघवदेव-पाधवराव थे। कहते हैं, कि ये एक वार 'वनमें भी आये थे। माधवपाय-चन्द्रद्वीप के अन्तर्गत एक प्रसिद्ध स्थान । माधवदेव-भावस्वभाव नामक वैद्यक ग्रन्थ के रचयिता। यह माधवपाशा नामसे विख्यात है। • २ वेदभाष्यके प्रणेता । ३ काशीस्थित एक विख्यात नैया- ' माधयपुर-राजगृहके अन्तर्गत एक प्राचीन ग्राम ।

यिक। ये लक्ष्मणदेवके पौत्र थे। इन्होंने रामभद्रत गुणं ! माधवपुरी-पयावलीधृत एक प्राचीन कवि ।

'रहस्यको गुणरहस्यप्रकाश नामकी टोका, न्यायप्तार, माधवप्रिय ( स० क्लो०) पीतचन्दन, पोला चन्दन । प्रमाणादिप्रकाशिका और तकैमापासारमञ्जरी नामक माधयभट्ट-१ निम्बार्कसम्प्रदायके एक आचार्य। ये बहुत-से न्याय प्रन्य बनाये । शेपोक्त ग्रन्थमें इन्होंने गौरी- भूरिभट्टके शिष्य और श्याममट्टके गुरु थे। कान्त और गोवद्धनका मन उद्धत किया है। । २ दूसरे तीन प्रसिद्ध पण्डित । ३ कवोन्द्रचन्द्रो. माधवट म (सपु० ) भाम्रवृक्ष, आमका पेड़। दयधृत एका कवि। ४ सिद्धान्तरत्नावलि नामक सार- माधवद्विज-नवद्वीपके जमींदार शुभानन्दके दो पुत्र थे, स्वत प्रक्रियाकी टोकाके रचयिता। ५ प्रणयो माधर. 'रघनाथ और जनार्दन । ये सभी 'राजा' नामस जन- चम्पू और सुमदाहरण श्रीगदित नामक दो ग्रन्थोंके प्रण- साधारणमें परिचित थे रघुनाथके पुवका नाम जग ! यनकर्ता। ये मण्डलेश्वर भट्टके पुत्र तथा हरिहरके माथ तथा जनार्दनके पुत्रका नाम माधव था। ये ही। भाई थे। . माधय और जगन्नाथ जगाइ गधाइ नामसे सभी जगह माघ्रा मागध ( स० पु. ) एक प्राचीन कवि । विख्यात हैं। माधाइको धर्मपरिवर्तन कहानी विनित मागध माधय देखो। है। कहते हैं, कि पहले ये मद्य मांस तथा पर-खी गमन- माधवमिश्र-१ अनुमानालोकदीपिका नामक तत्व में मस्त रहते थे। सच पूछिये तो ऐसा कोई भी पराब चिन्तामण्यालोक टीकाकी प्याल्पा प्रणेता । २ गदाधर- काम न था जिसे इन्होंने न किया हो। यहां तक कि के पुत्र । इन्होंने भेददीपिका नामक एक वेदान्तमन्य रचा। धे गो बध तथा ब्रह्म-वधको भी अधर्म नहीं समझने थे। माधयमुनि-यापपणभट्टीय घ्याण्याके प्रणेता। धोमहाप्रभुने निताई और हरिदास पर हरिनाम प्रचारका माधवयतीन्द्र (सरस्पती.)-सुराष्ट्रवासी एक पण्डित । भार सौंपा था। नामका प्रचार करते करते निताइ एक इन्होंने मितभाषिणी नामको शिवादित्यकृत समपदा. दिम जंगाइमाधाइके सामने जा पहुचे । उन्हें देतते । यीय टीका रची। 'हो माधाइको गुस्सा हुआ और एक फूटे बरतन माधवयोगी--एक साधुपुरुष। ये मीमांसानययिका- टुकड़े को ले कर उनके सिरमें मारा । इसकी चोटसे लङ्कार के प्रणेता दामोदरके गुरु थे। सिरसे लेह चलने लगा। इतने पर भी निनादचांद जरा माधवराव महाराष्ट्रके चतुर्थ पेशवा । यह पेशवा बालाजी मी विचलित न हुए, वरन् मोठे स्वरों में उस पापीसे कहने बाजीरावके द्वितीय पुत्र थे। इनका असल नाम था लगे-"माधाइ तुमने हमें कलसीके टुकड़े में मारा है | माधवराव बल्लाल । पिताके मरनेके समय इनको उमर तो भी मैं तुम्हें प्यार करूंगा।" इतना कहते ही पत्थर सिर्फे १७ वर्ष थी। उस समय भी महाराष्ट्रपति सतारा. गले गया। मरुभूमिमें बाढ़ उमड़ आई । माधाइ निताइके में शक्तिहीन और नाममात्रको राजा थे। माधवराजने प्रेमपाशमें बंध गए, और उनका शिष्यत्व प्रहण किया। उनके समीप आ कर १७६१ ई०के सितम्बर मासमें माधयनन्दन---अशौचदशकके प्रणेता रामेश्वर सूरिके पुत्र । पेशवाको खिलअत ली। माधवपण्डित-१ एक विख्यात पण्डित । ये पण्डित-श्रेष्ठ । इस समय अङ्करेजों को सहायतासे जजिराके सिदी विश्व श्वरके गुरु थे। २ दत्तादर्शके रचयिता। कोकणके अनेक स्थानोंका पुनरुद्धार कर रहे थे। अगरेज माधवपदाभिराम-तर्कसंग्रहवाफ्यायनिरूक्ति नामक ग्रन्थ लोग भी सालसिट आदि द्रोपों पर दांत गडाये धैठे थे। के रचयिता। इस समय पेशवाको तहबील भी खाली थी । इसी माधयपाठक-पुरश्चरणचन्द्रिका प्रणेता। . दुःसमयमें माधवराव पेशवा हुए। उन्होंने अपने