पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४३०

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२८. .माधुर्ग-पाध्यन्दिनीयक सामिभ्याधरमाधुरीति विषया सोऽपि चैन्मानर्म। माधक (सं० पु०) वर्णसङ्कर जातिविशेष। इस जातिके सस्यो नागमाधिहन्तविरहव्याधिः कथं पद्धते ॥" लोग मधुर शब्दों में लोगों को प्रशंसा करते हैं इसीसे पे . (गीतगो० ३ सर्ग)| माधूफ कहलाते हैं। मनुष्यों को सदा प्रशंसा करना ही माधुर्य ( स० लो० ) मधुरस्य भावः मधुर-( यदादिभ्यः । इनकी गृत्ति है। प्यन् पा ५॥१२३ ) इति प्पम् । १मधुर होनेका "मेरे यफन्तु वैदेहो माधूक सम्प्रसयते। गाय, मधुरता। .२ लावण्य, सुन्दरता। नन् प्रशंसत्यज्यजल यो घण्टातामोऽग्योदथे ।" "रूप किमयनिय तोमर्माधुर्य मुच्यठे।" (मनु ११३३) (उज्ज्वलनोनमणि)। कुछ लोग इन्हें बन्दी भी कहते हैं। ये प्रातकाल . शरीरः किसी निर्वचनीय रूपविशेषका नाम | घंटा यजा कर राजाओंकी अजम्न प्रशंसा करते है जिससे माधुर्य है। २ पाञ्चालीरीतिविशिष्ट काव्यगुण । साहित्य | उनकी नींद टूट जाती है। दर्पणमें लिखा है कि जिस रचनामें चित्त द्रवीभूत होता माधूकर (सं० त्रि०) मधुमक्खियों के जैसा संग्रह करने और अत्यन्त प्रसन्नता आती है उसे माधुर्य फहते हैं। याला। यह सम्भोग, फरण, विप्रलमा और शान्त रसमें ही माधूची ( स० स्त्री०) मधु बाह्मणपूजक । ..... अधिक होता है। इसमें अत्ति वा अल्पति तथा वा देवप्रीतये मधुमाध्वीभ्यां मधुमाधूचीम्याः, ... इसकी रचना मधुर होगी। इस रचना अन्त्यवर्ण, . (शुक्ल यमु ३७॥१८) युकवर्ण तशा ट, 2, 3 और ढ आदि घों का प्रयोग माधूचोम्यां मधुनाक्षणमञ्चयतः पूजयतः ती मध्यश्ची दोपायद है। ताभ्यां मध्यगम्यामिति प्राप्त डोपि अलोपे मधूनोभ्या. "चत्तद्रयामायगयोहलादोमाधुर्य मुच्यते। मिति लिङ्गव्यत्या आदिदीर्घश्छान्दसम्' (येददीय) · : मम्मोगे यरुगे विमत्तम्भे शान्तेऽधिक प्रमात् ।। माधूल (सपु०) मधूल गोलापत्य । . . .. मूनि पर्गान्त्ययण ने युक्ताटठ-इ-दान यिना । | माधो (हिं. पु०) १ श्रीकृष्ण । २ श्रीरामचन्द्रनो। रयो लघु च तवयक्तौ पः कारगायां गताan माधी (हि० पु.) गाधर देखो। .. धत्तिरतिया मधुरा रचना तथा !!" माध्यन्दिन (सं० नि०) मध्ये भव, मध्य ( भन्तःपूर्वपदात् । (साहित्यदर्पण ८ परि.) ठन् । पा४।३।६० ) इत्यत्र कानिफासूवरत्तो 'मध्यो ३ नायिकों का अयत्नज बलकार विशेष ।। मध्यं दिनण् चास्मात्' इति दिनण। १ मध्यम, दिनका "सहोमेमपनुदं गा माधुर्य परिकीर्तितम् ।" - मध्य भाग, दोपहर । २ मध्यन्दिनसम्बन्धी। (साहित्यदर्पण ३।१२६) | माध्यन्दिनशासा ( स० सी० ) शुक्लयजुर्वेदको एफ सक्षोभकालमें भी जो चित्तका अनुग रहता है, उसे | माना। . माधुय कहते हैं। ४ सात्त्विक नायक गुणभेद, पिना | माध्यन्दिनायन (स० पु०) माध्यन्दिन शाखाका गोला.. किसी कारणफ ङ्गार आदिके ही नायकका सुन्दर जान | पत्य। . पटना। ५ वाषयमें एकसे अधिक भोंका होना, माध्यन्दिनि (सपु०) माध्यन्दिनका गोलापत्य । २ पापयका श्लेष। पक ययाकरण । "या पृथपदताय सन्माधु कायरो" माध्यन्दिमा (स० स्त्री०) शुरु यजयदकी एक शाखाका . .६ मिठाई, मिटासा माम। माधुर्य प्रधान (म. पु.) गानेका एक प्रकार, यह गाना माध्यन्दिनीय (सलि०) माध्यन्दिन गाया सम. हिममें माधुरीका पिक ध्यान रखा जाप और उसके धोय। (पु० २मारायण, परमेश्यर। शुग का यिगनगो परया न को भाय। | माध्यग्दिनीयक (सं० ) माध्यन्दिन तीर्थ।...