पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४३३

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माध्याकर्षण ३८३ 1: इस प्रकार विभिन्न वैज्ञानिकोंके विभिन्न मतको ऊपरवाली सभी वस्तुओंको अपनी ओर खींचती है। पोपकता करने पर भी जय उससे किसी असल बातका । यदि इसमें खी चनेकी शक्ति न होतो, तो ऊपर फेको पता नहीं लगता, तब हम लोग निश्चय ही प्राचीन- गई वस्तु ऊपर ही ठहर जाती। सिद्धान्तका आश्रय लेते हुए द्रव्योंके अन्यान्य अभि- स्वभावतः ऊपर फेको गई वस्तुमान ही नीचे धात या आपीडनको माध्याकर्षण-क्रियाका निष्पत्ति गिरती है, इसका कारण क्या? इस प्रश्नको हल करनेके सूचक कह सकते हैं। लिये विज्ञानविद्गण परीक्षा और प्रत्यक्ष प्रमाण द्वारा

सचमुच वस्तुमानमें अवस्थित माध्याकर्षणशक्ति जिस सिद्धान्त पर पहुंचे हैं, नीचे उसका संक्षिप्त यिव-

की अधिकता इतनो थोड़ी है, कि दो एक विशिष्ट रण दिया जाता है। कारणों तथा सुप्रणालीवद्ध गभोर भालोचनाको छोड़ परोक्षा द्वारा देखा गया है, कि नियतिस्थानमें एक कर हम लोग उसका अस्तित्व नहीं जान सकते। एक | भारी सीसेके टुकड़े और हलके काग (शोला)-को मेजके ऊपर दो किताव रखनेसे यह कहना होगा, कि वे नीचे गिरानेसे दोनों एक हो समयमें पृथ्वी पर पहः एक दूसरेको आकर्षण करती हैं। कारण भौतिक पदार्थ. चते हैं। किन्तु खुले मैदानमें एक पर और एक खण्ड को आकर्षण अवश्यम्भावी है। किन्तु उस आकर्षणका पत्थरको समान अचाईसे नीचे गिराने पर ऐसा देखा प्रभाव इतना कम है, कि मेज पर रखी जाने के कारण गया है, कि परसे पहले पत्थरका टुकड़ा जमीन पर मेजके आकर्षणको अतिकम कर एक दूसरेकी ओर अग्र गिरा। इसका कारण यह है, कि शेयोक्त दो वस्तुओंका सर नहीं हो सकती । जो कुछ हो, परीक्षा द्वारा मालम | गापेक्षिक गुरुत्व और आकृति मान समान नहीं है। हुआ है कि दो जपिण्डको आकृतिक परिमाणानुसार अलाया इसके पृथ्वी परको वायु पत्थरकी अपेक्षा पर- उनके आणविक सङ्कर्षण में भी पृथकता होती है। उन) को नीचे उतरने वाधा देती है, इसीसे आकर्षणशक्ति- दो जड़पदार्थका आकार यदि छोटा हो, तो उनको शक्ति में फर्क पड़ जाता है। भी छोटी होगी, इस कारण विना.परीक्षाके उसका शान ___ यदि किसी वैज्ञानिक उपायसे वायुको यहाँसे निकाल नहीं हो सकता। किन्तु यदि उन दो पदार्थों में एक | लिया जाय, तो साफ तौरसे देखने में आयेगा, कि उप. पदार्थ दूसरेसे बड़ा हो, तो आकर्षणशक्तिकी अधिकता रोक्त पत्थर और पर एक ही समय में एक ही ऊंचाई- सहज में मालम हो जायगी। से जमीन पर गिरेगा। इस प्रकारको प्रणालीका अनुसरण कर हम लोगोंने । ___ यस्तुकी माकणी-शक्तिका निरूपण करनेके लिये प्रत्यक्ष प्रमाण द्वारा जागतिक माध्याकर्षणशक्तिका वैज्ञानिकगण पतनशील वस्तुके आपेक्षिक गुरुत्व और अस्तित्व अनुभव करना सीखा है। पृथिवीसे संलग्न | उसके आवयविक परिमाणके ऊपर निर्भर करके पतन जितनी जड़ और चेतन पस्तु हैं उन्हें देख कर हम लोग | कालका पाक्य और आकर्षण-प्रभाव निर्देश कर गये इस शक्तिका प्ररात सत्त्व निरूपण करने में समर्थ हुप है। है। वे कहते हैं, कि पृथ्वी पर यदि वायुप्रयाह न रहता, इस पृथिवीकी आकृति बड़ी होनेके कारण उसके ऊपर | वो उस शून्य अन्तरीक्षसे एक येलन वा पक्षीको नीचे या समीपमै जो पदार्थ है, उस पर इस गृहत् जड़पिण्ड- उत्तरनेमें जितना समय लगता, उतने ही समयमै ५६ पौंड की आकर्षणीशक्ति जो ज्यादा पड़ती है, वह सहजमें | तौलका एक जड़पिण्ड भी जमीन पर गिरता। मालम होता है। केवल वस्तुको घनत्व और गुरुत्वके ऊपर वस्तुका वस्तुविशेषके भारीपनके अनुसार उस उस वस्तुके पतन-समय निर्भर करता है, सो नहीं। भूपृष्टके स्थान- साथ पृथिवीकी आकृष्टि-शक्तिका सामञ्जस्य है। इसी विशेषमें वायुस्तरकी विभिन्नता तथा भू पक्षरके तार- आकर्षणके कारण ऊपर फेकी गई वस्तु पृथ्वी पर तम्यानुसार भी इस पतन या आकर्षण शक्मेि बहुत गिरती है। पृथ्वी में ऐसी आकर्षणशक्ति है, कि वह | कुछ पृथकता होती है।