पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४३४

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३८२ . माध्याकर्षण है। जिस प्रकार युवकको अयस्कर्षणोशक्ति स्थमाय जड़यस्तुओंके परस्परं संयोगनित 'मापोहनको हो सिद है, उसी प्रकार लाईमें भी चुम्बक पांचनेको | इसका मूल कारण स्थिर किया । ये एनया फार शक्ति है। किन्तु यह शक्ति प्रत्यक्ष दिग्नाई न देने पर गये हैं, कि यातुस कुन्के संयोगफे सिया माध्याकाणका भी उसकी विशेषता मालूम हो जाती है । लोदेको दूसरा कारण और हो ही नहीं सकता। छोड़ कर किसी दूसरे मात पदार्थ चुम्बकको माव:- ___माध्याकर्षणका तत्त्व जानने के लिये हानिक लोग पंणी शनि जिस प्रकार साफ साफ दिखाई नहीं देती, जिन सब अनुमानों की कल्पना कर गये हैं उनमें कोई भी उसी प्रकार जागतिक विभिन्न पदार्थफे मध्य जो एक आज तक समीचीन और सर्गवादिसम्मत नहीं माना भननुभूत भाकर्षणशक्ति विद्यमान है, उसे सहजमें गया है। ला केलपिनके भावसंवादसे माध्याण- जाननेका उपाय नहीं। को उत्पत्ति होनेकी भाशाको बहुतेरे पोपण फरते हैं। सर भाइजान्युटनने गभीर गयेरणा द्वारा जो अध्यापफ टेट ( Tait) शोर एटुवार्ट (Stewart) के माणविक वा पादायिक भाकर्षणशक्तिकी विद्यमानता मतसे तेजस इयर ( I.uminiferous Ether ) के साथ स्थिर को है उसका ज्योनिपिंद प्रबर भास्कराचार्य, / माध्याकाणका सम्बन्ध स्थापन बिलकुल निष्फल है। गिनका जन्म न्यूटनसे बहुत पहले हुमा था, अपने .. माध्याकर्षण फहने से सचमुच प्रत्येक यस्तुके साप गोलाध्यायमें 'माष्टिशकिश्च मदोतया यत्" | भन्न जातिको प्रत्येक वस्तुका भाकर्षण ही समझा लोकमें विवरण कर गये है। अतपय हम लोग सिर्फ जाता है । यह ( attraction of Gravitation) इतना ही कह सकते हैं, कि भास्करानार्यको इस यस्तु- चौम्पक मार्गण ( Mngnetic attraction )-से विल. की म्यशक्ति भाइजक न्युटन द्वारा विस्तृतरूपसे आलो. कुल पृथक् है। इन दोनों मार्गणी-शक्तिके गुरुत्य चित हो कर जनसमाजमें प्रचारित हुई है। सच पूछिये, ( Intensities) की विभिन्नता पर ध्यान देनेसे सापे तो इस शक्तित्वका उदुमायक यूरोप नहीं, हम लोगों. माप विस्मय होना.पड़ता है। किन्तु अनुशीलन द्वारा की भार्यप्रधान भारतभूमि है। उस सूक्ष्मतम तत्यका हाल मालम हो जाने से और कोई . . परिश्त न्युटनने कहा है कि गाध्याकर्षण भौतिक सन्देह रहने नहीं पाता। . पदार्यनिष्ठ, गनिमित्तफया सहजधार्ग है। इस धर्म सचमुच सुम्यक, दो पृथक जातीय भाकर्षणको यशतः एक स्वस्तु मध्ययत्ती बिना किसी संयोजक- विद्यमानता मौजूद है। उनसे एक चुम्बककाधार गालम्बनको सहायताफे दुरस्थित दूसरी एक सड़यानुफे स्थित चौम्पक मार्गण-सोसे यह लोहेको नजदीक अपर मिया कर सकती है। माध्याकर्षण निश्चय ही घोच लाता है। फिर पर्शमान प्रतिपादित माध्या- निर्षिय नियमानुसार क्रियाकारिशक्तिविशेष द्वारा मयतिल या लो भारए होता. तित होता है। यह भाति भौतिक है या भौतिफ, इसी ऐसा कह सकते हैं। मतपय एक युवक युगपत् पर विचार करना आवश्यक है। चौरफ और पास्तय मारपण विराममान है। इसीसे ___ उक पण्डित प्रपरने अपने प्रगमें दूसरी जगद ममि घोम्यक-थाकर्षणमें पादायिक भागमणसे ज्यादा बल पास या आपीडनको ही माध्याकर्षणका कारण घतलाया पतलाया है। यह सतासिम माने जाने पर भी पस्तुको है। प्रसिर गणिताध्यापक इलर (Lular) मागा. भारतिगत यिमिग्नताफे गनुमार भाव भी तार.. कर्षणको किसी चेतन पदार्थ अधया किसी सूक्ष्म अनो. तम्य हुमा करता है। किन्तु साधारण पापंगालका द्रिय शक्तिपिरोपका कार्ग समझने हैं। अध्यापक धनत्य (intensity ) और भारति परिमाण कितना यालिस (Prof. challis ) ने माध्यामिफा प्रत दो पढ़ा पयों न हो, गायक-माणको तुलनामें . सहा जागनेके लिये भी गमीर-गयेपणा को गौर मास्तिर माध्यमशक्ति करोड़ों शो पर होगी। ।।