पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४४०

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३६ माध्यान-मान अपनी कन्याशी कोष्टी भेज देना है। दोनोशी कोप्टोमें | माध्यो (सं० रो०) मधुनो विफारः, मधुगण-कोए । अत्र उप विशाहयोग्य मेन्ट दिई देता है, तब क्योतिषी मास्पान्त्यमायोति । पा६५) इति निपात्यते ।। विवादमी मलाह देते हैं। वर-दक्षिणा टीक हो जाने पर मथ, गराय ।२ मध्यादित मुग, यमराव जो मनुपसे रियाद लग्न स्थिर किया जाता है। पनाई जाती है । ३मधुर-कपटक नामको मछली ।। विवादमें आनन्दोटमयको सीमा नहीं रहती। यियाह- पुराणानुसार एक नदीका नाम । मेने पर समपर्शगमन तक सभी कार्य घेदानुमोदित | __ "तैम्पः कान्ता न माची ननौ सम्प्रयपानाम् । भाग्नानुशासन ही होते हैं। ___(मत्स्यपुः १२०११) किसी व्यक्तिको मृत्यु आसन्न दिपाई देने पर (वि०) ५मधुमन्. मधुयुक्त। उसका गिर मुक्या दिया जाता है। पोछे उसे गोपी-माध्योक (मी०) माध्यो म्याथै कन् । १ मधूक मन्दन द्वारा श्रीमद्राको तरद तिलसकी छाप चम भार पुष्पात मद्य, मानुएको शराय । पर्याय--मध्यामय, महानिद कार मफेद पण पहना देश है। अनन्तर | माधयक, मधु। मय देशो। २ मधु, मकरंद । ३ साक्षा. उसके मग पश्चगव्य दिया जाता है। समय रहने पर कृत मद्य, दाम्पको शराय। ४ निपाय, मेम। अयम्गानुसार वैतरनी-दान भी होता है। माध्योगफल (सपु.) माध्यो मधुमत् फलमस्य। _उम मुम्पु फे कानमें जोरसे विष्णुनाम सुनाया | मधुनारिफल वृक्ष, मोठे नारियल का पेट् । नाता गौर धर्मप्रनय पढ़ा जाता है। प्राण निकल जाने माध्योका (स० सी० ) त निष्पाय, मफेद सेम । पर उसे पुनः स्नान कराया जाना और ललाट, वस:- माध्योमधुरा (सं० रबी०) माध्यीमद नपच मधुरा। मगल नगा यान पर श्रीमुद्राका चित्र दिया जाता है। मधुरमईर, मोटो गजूर । पोले शमशानमें ला कर यथाविधि अग्निमियादि होती / माध्योशग ( स० खो०) मधुशरा, चीनी । मधु है। तीन वर्ष कम उमरयाले पालक और संन्यासीको | आठ तरह का होता देसीसे यह शर्करा भो बाट प्रकार लाश गायी जाती है। शयदादके याद कुछ हङ्गोको किसी की है। इसके सभी गुण मधुफे समान हैं। पूतसलिला गदीफे जाल में फेक देना होता है। दशायें | माध्योसिता (सरग्री०) मधुनकरा। दिन गोरमगांदि द्वारा धामनिय सम्पन्न होती है। मान (संशो०) मोयतेऽनेनेनि मा-करणे मयुट् । परित ___ जानानीय और मृताचीच दोनों ही दश दिन तक माण, तौल । पर्याप-यातय, व्यय, पाय, पीतय। रहता। मनीवरी समय को भी किसी प्रकारका तुला, मंगुलि और प्रस्थफे भदमे माग नीन प्रकार मिष्ठाग्न नहीं ला माता। गाग्त्रानुशासनकी फटोरता का है। तुलासे उन्मानादि, गंगुलिमे दस्तादि और ममी विषयों में दिल देती है। प्रत्यसे दय्यादिका मान समझा जाता है। . इन लोगों में स्त्रीको अवरोध-प्रथा बहुत प्रपल है। "न मानेन रिना गुतियाप्पा आप परथिन् । नयोड़ा वी किमी रखी. साथ वातवीत तक भी नहीं। प्रयोगकाम्यांग मानमयोग्यते मया ॥" (भार) पर मानी। भायप्रकाश माना विषय इस प्रहार लिग-- . प्रतिभायण माममें ही ममा माध्यमालाप मपनी पिना परिमाणके किसी भी ट्रम्पका प्रयोग नहीं हो अपनी कम्याको समुरालमै अपने र लाने हैं । माध्य. सकता। इसलिये सबसे पाले मानको परिमारा जाम ममाजमें पानपविगाह और पयिमा प्रचलित रहने पर लेना भाया मायुपे गनमे माग दो प्रकार मोगियापियाद प्रचलित नही है। पा, मागय मीर कादिक सभी मानामि . माग मान ( 0) आनएसमामा पे। मानो होला बनाई गई है। माधिमपु.) मधुमागे, योग हा मान !-तीम परमाणुका एक सरेण तोता। पंगता हो। . . मरेमी मी करने। राम रही