पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४४२

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५८८ पान-मानकवि ५ मामयंगतिः। ६ उत्तर दिशाफे पर देशा नाम: प्रद! १० परिष्दक। ११ मन्त। प्रतिष्ठा, इन। मान--वम्यानदेशी सतारा जिलान्तर्गत एक उपविभाग। “ममाः कशिमिन्दन्ति एनिमिच्छन्ति मध्यमाः। भू-परिमाण ६४६ मील है। मागनदीपे दादिने किनारे उमा मानमन्ति मानो मा धनम् ॥ ६दिशाहो गीयमे दमका यिवारसदर प्रतिधित है। गाना हि मनमपस्य माने मनाने धनेन किन। मानफ (स' पु०) मान, पास्परिमाणस्य (शेगर रिमा मनमाड कि भनन हिमापुमा ।" पा४।१५४) इति कप । १ मापक, माननू । २ गराय, (गाहपु० ११५ ० ) : १ मेर। ३ मालाकन्द । उनम प्यक्ति सम्मानको रक्षा करते हैं। पाकिमानरक्षार (संपु०) मानकाय दारः । मानश्या. ' पड़ों के लिपे मान हो एकमात्र धन है। माना अर्थ पतक्षार, मानकच्चूफे संडल और पमेको भस्म कर जो मूल । जिनको मानहानि होती है उनका धन और आरा! रारा गनती है उसीको मानसार कान है। निप्रपोजन अर्थात् मानहीन हो कर जीवित रहना मानरच्चू (दि. पु० १ १ एक प्रकारका मोटा पंद जो अत्यन्त फ्लेशकर है। बहालमें बहुत अधिकतासे होता है। यह प्रायः सर. ८ अनुरक दम्पतीके भायविशेषका नाम मान है। फारोफे रूपमें या दूसरे भगाजीफे साए या भाता है। "दम्पत्यामांर एफर रातोरप्यनुरगयो । यह वाहुन जल्दी पचता है, इसलिपे दुर्वल रोगियों मादि स्वामीहारलेपोमादि निरोधी मान उपपर्ने ।" के लिए यमुन साभदायक है। कहीं कहीं भरारोट या (उन्धत नीलमणि) सागूदानेको जगह मो इसका ध्ययहार होता है। माधु. प्रिय तिमी अपराधसूचक नेटाका नाम मान है। निफ चिकित्सकोंने इस मुद्र, विरेनक, मनकारक और प्रिय व्यक्ति को अपराध करता है गोर-उस अपराध ययासोर तथा फजियतफे लिपे पत उपयोगी लिये उसे जो मानसिक विकारकी उत्पत्ति होती है उसी. माना है। को मान करते हैं। रसायरोमें लिया है, कि पहलघुः । २एक धकारको मिनी ओ सालिय मित्रोफे मागमे मध्यम और गुरभेदसे तीन प्रकारका है। अल्स चेष्टा वाजा मिलती है। मानकन्द (स.पु.) मानक । पारा अपनीत होनेको लघु. कट करके अपनय करनेको मानकर-यमान जिले का पर नगर। यह मा० २३ मध्यम और सत्यात कष्टसे जो अपनप किया जाता है। २५४०" 30 सथा देशा० ८३३०"० पासातमे उसे गुरु करते हैं। यहां बसाया यहाँ रमागास | १० मोटकी दूरी पर भगशित है। यह पाणिग्यका प्रधाम होता है। फेन्द्र बार यहां एशियन रेल-कम्पनीका पर नापिका भायकको यदि दूसरी सीफे साथ बातचीन ! " म्टान भी है। को देगे, तो उसे जो मान होता है उसका नाम ला, मानक ( पु ग, दाद। गिम्हिता, नापामायिका साथ पातचीत करते ममय यदि रिमी सदा-ऊपरी। . इसरो नापिकाका माम से, तो गापिकाको जो मान मानानि ( 0) अमिमानस पद पद विषाद ओ उत्पन्न होता है उसका नाम मध्यम भार मापक सम्प: H Ticा। मापिका गाए सम्मोगादि गिग कर जो मान मानादि-naT गाई पर पिका होता है, उसका नाम गुर। . जन्म संवत् ११६ gगा | प्रगामे पड़े __गागा प्रशारणे फौशादि बारा लपुमाग अपनान निपुन काय। राणा गमि मेरायाको ना. Emादि द्वारा मध्यम मार, थापाले भारत पुरण्या इतिगपनिमारा FIRT भूगनाहि दाम सारा गुपमा अपनोस हुमा करता नापा मr unarnier (AIR) . मी माका ग्रन।