पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४६१

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


मानवतत्त ४०५ मालूम होता है, कि यहाँ खटके जन्मसे २००० वर्ष पहले रण पितृभाषाको पुलियां हैं। उपरोक्त सिद्धान्तों पर यहाँफे राजवंश सिंहासन पर बैठ कर राज्य करते थे। मानवतत्त्वविद् पण्डित कहते हैं, कि इतिहासका सीमा- । भारतवर्षके विज्ञानका अनंत भाण्डार और पृथ्वीका वद्ध विवरण भापासष्टिके प्रथम समयमै संघटित हुआ "प्राचीनतम साहित्य वेदको पर्यालोचना करने पर प्रचीत्य है। उससे पहले के इतिहासमे जिसका जानना पठिन बुद्धमण्डलीने भयभीत हो कर आशंकित कंठसे कहा है, जो घटनाये हुई थों, भूतसाशी इतिहास उस विषयमें है. कि ईसाके ४,५ हजार वर्ष पहले इस वेदको रचना हुई। निरुत्तर हो जाता है। किस तरह पशुपक्षोके आकारसे . घो। भारतवर्षको भूस्तरावली भव्छी तरहसे जांचो नहीं। साङ्केतिक चिह्न अवलम्बन फर भापाको सृष्टि हुई, उस. गई है। केवल प्रत्लतत्त्वका साहाय्य ले कर प्रलतत्व का विवरण वागविज्ञान और वर्णमाला शब्दमें लिवा विद् पंडित कुछ अनुमान करते हैं। फिर भी भार- है। तीय भूतत्त्य नामक पुस्तक पढ़नेसे मालूम होता है, कि भाषाविज्ञान। बहुत प्राचीन समयमें भारतवर्षको उत्पत्ति हुई होगी। भाषाविज्ञानके जाननेवाले पण्डितोंका कहना है, कि उन्होंने कहा है, कि विन्ध्य पर्वत या विध्याचल पर्वत बहुत प्राचीनकालमें सब जातिको हो वायकथनप्रणाली “एक प्राचीनतम ज्यालामुखी पर्वत है । जिस दिन सजोय | एक तरहको थो। पीछे देशभेदसे जव जातिवैचित्राकी 'ज्यालामुखी विध्याचल अग्निहोन हुआ, जिस दिन सृष्टि हुई, तवसे हो उधारणका वैपम्य उपस्थित हो यौवन के उद्दाम उच्छड्नलता दंडस्वरूप इन्द्र द्वारा उसका जातीय चरितके अनुरूप भायसे माषाको विमिन्नता पक्ष लूट लिया गया, जिस दिन निस्तेज दुवला पतला होतो रहो। पाकरण और अभिधान (डिकस्नरी) को विन्ध्यागिरि अगस्तके पद पर झुका उस दिनका इति । रचनामणाली अवलम्बन कर भाषा विज्ञानविद् पंदितों- "हास २० हजार वर्ष पहले का है। इधर उधर फेंके दाक्षि ने मानयतत्त्रके विषयमें बहुमेरे अभिनय विवरण लिया णात्यके शेलखण्डौकी परीक्षा करनेसे देखा जाता है, कि है। भापावशानके सूत्रपातसे ही सभ्यताका इतिहास 'वे विन्ध्याचलके ही फेंके हुए है। इसलिए कितने वर्ष | भारम्भ हुआ है। पूर्व भारतके पूर्वाकाशमै सभ्यतामा प्रथम विकाश हुआ मूक व्यक्ति से सङ्केत द्वारा मनका भाव प्रकाश •था यह कौन कह सकता है ? करते . वैसे हो मानव जातिको पहली अवस्था सङ्केत १. भाषा और शिक्षाका प्रथम विकाश । और विभिन्न चिह्नों द्वारा अभिप्राय जनाते थे। पीछे "प्रतीच्य बुद्धमण्डलीका कहना है-"प्राचीन शैल- भापाकी सृष्टि हुई। प्रत्येक जातिके इतिहासको आलो. युगसे हो मानवसमाज में सभ्यताका सूत्रपात हुआ। चना करने पर यह मालूम होता है, कि सहुत ही भाषा- • प्राचीन मिस्र, याविलन और चीनका इतिहास पढ़ कर की पहली सोढ़ी है। मनका मायेग, दुःख, विस्मय और उन्होंने उक्त सिद्धान्तके परीक्षित और सत्य होनेको । क्रोध प्रकाश करनेवाली भाषा प्रायः सभी जातियोंकी घोषणा को है। भाषाविज्ञानविद् पण्डित पृथ्योको एक ही तरह है। 'प्राचीनतम भाषाओंकी परीक्षा कर कह रहे हैं, कि हिमके | ___केवल गत अ शताब्दीसे ही भाषाविज्ञान या याग- 'साथ अरवी भापाका बहुत ही सादृश्य और सामोप्य है। विज्ञान (Philologs)को सृष्टि हुई है । इस अल्प समयमें इससे अनुमान किया जाता है, कि ये दोनों भाषायें एक उक शास्त्र पृथ्वीको विमिन्न भाषाओंको बंशपरम्परा पिताकी दो सहोदरा है। फल के वशीभूत हो कर पितृ | और उत्पत्ति तथा परिपुष्टि भादिके निर्णय करने में समर्थ माषा अन्तर्हित हुई है। वही लुप्त मापा उस समयके ) हुमा है। लोगोंकी मातृभापायो। उन्होंने उस प्राचीन भाषाके फिसो किसी सम्प्रदायके भापा-विधानविदोंका अधिकांश सांदृश्य और उधारणकी समताको देख निम-कहना है, कि संस्टन यो अरवी, चीन या पेभियान 'पणं किया है, कि सारी मापा ही एफ विलुप्त साधा- किसी समयमें भी एक मापासे उत्पन्न नहीं हुई है, Volh XVII, 102